ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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1212 1122 1212 22यूँ उसके हुस्न पे छाया शबाब धोका है ।तेरी नज़र ने जिसे बार बार देखा है ।।1वफ़ा-जफ़ा की कहानी से ये हुआ हासिल।था जिसपे नाज़ वो सिक्का हूज़ूर खोटा है ।।2उसी के हक़ की यहां रोटियां नदारद हैं ।जो अपने ख़ून पसीने से पेट भरता है ।।3खुला है मैक़दा कोई सियाह शब मे...
अमितेश कुमार
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बिहार में समस्तीपुर के एक गाँव का क्वारेंटीन सेंटर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना क्योंकि पंचायत ने सेंटर में दिन बीता रहे लोगों के लिए ‘लौंडा नाच’ का आयोजन कराया. अधिकांश लोगों ने इस ख़बर की निंदा करते हुए आश्चर्य व्यक्त किया कि इस विकट समय में ऐसा आयोजन क्यों और कैस...
भावना  तिवारी
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--रंग-मंच है जिन्दगी, अभिनय करते लोग।नाटक के इस खेल में, है संयोग-वियोग।।--विद्यालय में पढ़ रहे, सभी तरह के छात्र।विद्या के होते नहीं, अधिकारी सब पात्र।।--आपाधापी हर जगह, सभी जगह सरपञ्च।।रंग-मंच के क्षेत्र में, भी है खूब प्रपञ्च।।--रंग-मंच भी बन गया, जीवन का जंजाल।...
Yashoda Agrawal
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आज आपको एक ग़ज़ल पढ़वा रहे हैंफेसबुक से उठा लाए हैं हमआपको ज़रूर पसंद आएगी...वादा किया है जो भी निभाएंगे रात दिनहर रस्में वफ़ादारी दिखाएँगे रात दिन।नज़रों से तेरी आँख का काजल निकाल कर,चेहरे को अपने ख़ूब सजाएँगे रात दिन।हर इक क़दम पे रूसवा हुए ठोकरें मिलीं,फिर भी तेरी ग...
rishabh shukla
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रास्ते जीवन की डगर पर मुश्किलें कई है,बस है चलते जानाlइसने तो निकलने का,कोई तो रास्ता होगाllयदि कोई मुँह मोड़ ले,इस मुश्किल घड़ी मे ना घबरानाlकोई मिले तुमसे अगर, कोई तो वास्ता होगाllमेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/घुमन्तू - https://th...
अमितेश कुमार
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दीनानाथ मौर्य, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं. नाटक और रंगमंच के साथ शिक्षाशास्त्र इनकी विशेषज्ञता और रूचि का क्षेत्र है. 'यूनिवर्सिटी थियेटर' इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया समूह है जो अभी एक साल क...
अमितेश कुमार
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भारतीय रंगमंच को समझने के लिए किसी एक किताब का नाम लीजिए? इस सवाल के जवाब में अगर ‘रंग दर्शन’ का नाम लिया जाए तो शायद ही किसी को आपत्ति हो. ‘रंग दर्शन’ भारतीय रंगमंच की प्रवृतियों, विशेषताओं, सौंदर्य, सामाजिकता, ऐतिहासिकता, व्यवहारिकता आदि को एक साथ समझने...
अमितेश कुमार
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Courtesy- Newslaundry Hindiगिरीश कर्नाड, नहीं डॉ. गिरीश कर्नाड ... नाम जेहन में आते ही वो बेधने वाली तस्वीरें सामने आ जाती है जिसमें एक शख्स नाक में ड्रिप लगाए ‘नॉट इन माई नेम’ की तख्ती लिए हुआ खड़ा है, जो अपने समय में अपनी उपस्थिति को भौतिक रूप से भी दर्ज कर...
शिवम् मिश्रा
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सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। विश्व रंगमंच दिवस की स्थापना 1961 में इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट (International Theatre Institute) द्वारा की गई थी। रंगमंच से संबंधित अनेक संस्थाओं और समूहों द्वारा भी इस दिन को विशेष दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। इस दिव...
kumarendra singh sengar
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बाबू मोशाय, हम-सब तो रंगमंच की कठपुतलियाँ हैं, जिनकी डोर उस ऊपर वाले के हाथों में है. कब, कौन, कैसे उठेगा, यह कोई नहीं जानता. ये भले ही एक फिल्म का डायलॉग हो मगर वास्तविक जीवन में भी ये पंक्तियाँ सटीक बैठती हैं. यहाँ उक्त दोनों पंक्तियों के बजाय चर्चा सिर्फ पहले हि...