ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
492
रास्ते जीवन की डगर पर मुश्किलें कई है,बस है चलते जानाlइसने तो निकलने का,कोई तो रास्ता होगाllयदि कोई मुँह मोड़ ले,इस मुश्किल घड़ी मे ना घबरानाlकोई मिले तुमसे अगर, कोई तो वास्ता होगाllमेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/घुमन्तू - https://th...
अमितेश कुमार
179
दीनानाथ मौर्य, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं. नाटक और रंगमंच के साथ शिक्षाशास्त्र इनकी विशेषज्ञता और रूचि का क्षेत्र है. 'यूनिवर्सिटी थियेटर' इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया समूह है जो अभी एक साल क...
अमितेश कुमार
179
भारतीय रंगमंच को समझने के लिए किसी एक किताब का नाम लीजिए? इस सवाल के जवाब में अगर ‘रंग दर्शन’ का नाम लिया जाए तो शायद ही किसी को आपत्ति हो. ‘रंग दर्शन’ भारतीय रंगमंच की प्रवृतियों, विशेषताओं, सौंदर्य, सामाजिकता, ऐतिहासिकता, व्यवहारिकता आदि को एक साथ समझने...
अमितेश कुमार
179
Courtesy- Newslaundry Hindiगिरीश कर्नाड, नहीं डॉ. गिरीश कर्नाड ... नाम जेहन में आते ही वो बेधने वाली तस्वीरें सामने आ जाती है जिसमें एक शख्स नाक में ड्रिप लगाए ‘नॉट इन माई नेम’ की तख्ती लिए हुआ खड़ा है, जो अपने समय में अपनी उपस्थिति को भौतिक रूप से भी दर्ज कर...
शिवम् मिश्रा
3
सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। विश्व रंगमंच दिवस की स्थापना 1961 में इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट (International Theatre Institute) द्वारा की गई थी। रंगमंच से संबंधित अनेक संस्थाओं और समूहों द्वारा भी इस दिन को विशेष दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। इस दिव...
kumarendra singh sengar
30
बाबू मोशाय, हम-सब तो रंगमंच की कठपुतलियाँ हैं, जिनकी डोर उस ऊपर वाले के हाथों में है. कब, कौन, कैसे उठेगा, यह कोई नहीं जानता. ये भले ही एक फिल्म का डायलॉग हो मगर वास्तविक जीवन में भी ये पंक्तियाँ सटीक बैठती हैं. यहाँ उक्त दोनों पंक्तियों के बजाय चर्चा सिर्फ पहले हि...
अमितेश कुमार
179
9'0हिंदी समाज उपर से भले ही एकरूपी  समाज  दिखता हो लेकिन इसके भीतर पदसोपानिकता के विविध स्तर हैं.  वर्ग और वर्ण के अतिरिक्त बहुत सारीसामाजिक प्रकियाएं हिंदी समाज के भीतर की हलचल को निर्धारित करती हैं. इसको संचालित करने वाले कई सूत्रों में से सबसे हाव...
 पोस्ट लेवल : हिंदी रंगमंच hindi theatre
Yashoda Agrawal
5
सत्तर ऊपर सात हैं, बाकी हैं कुछ एकईश्वर के दरबार में अब तो माथा टेकबाजू में अब दम नहीं, धीरे उठते पाँवयौवन मद का ही रहा था अब तक अतिरेकक्यों है ढलती उम्र में तू माया से ग्रस्तबिन ललचाए काम तू करता जा बस नेकइस दुनिया में मिल सका कब तुझको है मानहोगा दूजे लोक में संतो...
 पोस्ट लेवल : एक मंच से
Bharat Tiwari
28
स्थानीय जानकारों के मुताबिक केंद्र में पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार और राज्य में लंबे समय से भाजपा सरकार होने के कारण अब इस संगठन को राम मंदिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता का मसला छोड़ देने को कहा गया है।(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoo...
अमितेश कुमार
179
ड्रीम्स ऑफ तालीमधारा 377 को रद्द करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने शेक्सपियर का प्रसिद्ध संवाद ‘नाम में क्या रखा है?’ को उद्धृत किया। उद्धरण से ध्यान गया कि एलजिबिटीक्यूआई की सामाजिक स्वीकार्यता के लिए लड़ी गई लड़ाई को या इनके जीवन को सांस्कृतिक कला रूपों में व...