ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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फूलों की खेती से जिले के किसान मालामाल हो रहे हैं। वह दौर अब बीते दिनों की बात हो चुकी है, जब किसान सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित थे। गेंदे, गुलाब व ग्लेडियोलस की खेती किसानों को खूब मुनाफा दे रही है। इसमें ग्लेडियोलस का नंबर अव्वल है। शायद यह बहुत कम लोग जानते...
Bhavna  Pathak
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वर्ल्ड सोशल फोरम के इस अनूठे महाकुंभ में राष्ट्रीय वन श्रमजीवी मंच के बैनर तले देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए जिसमें ग्रामीण महिलाओं की अच्छी खासी भागीदारी थी। इसी समूह में शुभेन्दु दा के नेतृत्व में प्रतिध्वनि का सांस्कृतिक दल...
Yashoda Agrawal
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जब तनहाई में मुझको तेरी याद सताती है,  तेरे ख्याल आते हैं.....ये पहाड़ भावुकता से मुझे अपना हाले दिल सुनाते हैं....कहते मुझसे -हम भी खड़े सदियों से किसी के इन्तजार में हम भी डूबे थे कभी किसी के प्यार में हमारा प्यार अपने आप में&nb...
अमितेश कुमार
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दिल्ली सरकार के साहित्य कला परिषद के विज्ञापन को वापस लेने के लिए अरविंद गौड़ ने लिखा उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को खुला पत्रमनीष भाई, साहित्य कला परिषद,दिल्ली के ताजा विज्ञापन मे आपकी फोटो के साथ दो थियेटर फेस्टिवल की सूचना छपी है। उसमे लिखे एक नियम...
अमितेश कुमार
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दिल्ली रंगमंच के जाने माने रंगकर्मी अरूण कुकरेजा का हाल ही में देहांत हो गया. उन्होंने फ़ैज़ल अलकाज़ी के साथ रूचिका थिएटर की स्थापना की थी औऱ बहुत से नाटकों का निर्देशन किया. उनको याद किया है उनके साथी फ़ैज़ल अलकाज़ी ने.माडर्न स्कूल का हमारा बैच जो 1972 में पास हुआ...
ज्योति  देहलीवाल
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दोस्तो, आज मैं बहुत-बहुत खुश हूं...क्योंकि ख़बर हैं ही इतनी खुशी की! मैं ही क्यों ख़बर पढ़ कर हर देशवासी खुश होगा। आरएसएस के मुस्लिम विंग राष्ट्रीय मंच ने इस साल देश में बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी न देने की अपील की हैं! मुस्लिम मंच ने कहा हैं कि बकरीद पर जानवरो...
Yashoda Agrawal
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महादेवी वर्मा को जब ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, तो एक साक्षात्कार के दौरान उनसे पूछा गया था, 'आप इस एक लाख रुपये का क्या करेंगी? 'कहने लगी, 'न तो मैं अब कोई क़ीमती साड़ियाँ पहनती हूँ,  न कोई सिंगार-पटार कर सकती हूँ, ये लाख रुपये पहले मिल गए होते...
Yashoda Agrawal
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दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा..!!मैं बैचैन था रातभर लिखता रहा....!!छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान की..!!मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता रहा....!!दरख़्त होता तो, कब का टूट गया होता..!!मैं था नाज़ुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा....!!बदले यहाँ लोगों ने, रंग अपने-अपने ढ...
Yashoda Agrawal
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रातभर जिसने मुझे याद कियावो दिखा तो कुछ न बात कियाआज भी उसने बड़ी खामोशी सेजाने क्या-क्या फरियाद कियाटिमटिमाती हुई दो आंखों सेकुछ सितारों को बर्बाद कियाबांधकर हमसे अपने दिल कोउसने हमको आजाद किया ...हिन्दी साहित्य मंच से
Yashoda Agrawal
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एक सिलसिला सा चल रहा हैदिल आंसुओं में गल रहा हैकभी झांककर देखा अपने अंदरहर तरफ वहां कुछ जल रहा हैआग लगी है रूह के धागे मेंजिस्म मोम सा पिघल रहा हैबहुत साफ है मन का आईनाआंसुओं से जब वो धुल रहा है......हिन्दी साहित्य मंच से