ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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चर्चा मंच-दो कालजयी रचनाएँ: एक प्रश्न *प्रस्तुत हैं शैली और शैलेन्द्र की दो रचनाएँ. शैली की एक पंक्ति ''Our sweetest songs are those that tell of saddest thought.'' और शैलेन्द्र की एक पंक्ति ''हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें / हम दर्द के सुर में गाते हैं'' के सन्दर्भ...
अमितेश कुमार
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कोलकाता रंगमंच पर अभी एक प्रयोग हुआ जिसमें हिंदी और बांग्ला की अभिनेत्रियों ने अलग अलग निर्देशक के साथ मिलकर रविन्द्र साहित्य की सात प्रसिद्ध स्त्री पात्रों को एक नई व्याख्या में प्रस्तुत किया. इस प्रस्तुति की रपट भेजी है जीतेंद्र सिंह ने. "मनुष्यों की तरह ही...
अमितेश कुमार
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पटना रंगमंच में सक्रिय रविकांत नाटकों के साथ फिल्मों में भी अभिनय करते हैं. वे फिल्म समारोहों के आयोजन में भी सक्रिय हैं. पटना रंगमंच पर उनके विचार रंगविमर्श पर. पटना रंगमंच विगत कुछ वर्षों से प्रयोग के दौर से गुज़र रहा है। प्रयोग से कोई गुरेज नहीं हैं क्योंकि...
 पोस्ट लेवल : Patna theatre Ravikant पटना रंगमंच
Yashoda Agrawal
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गर्मी के बावजूद इस बार अप्रैल में कई जगह आना-जाना करना पड़ा था। जिसमें सालासर बालाजी के दर्शनों का सुयोग भी था। जिसका ब्यौरा पिछली पोस्ट में कर भी चुका हूँ। पर इस यात्रा के दौरान एक चीज पर ध्यान गया कि टी.वी पर रोज हर मिनट बरसाए जा रहे इश्तहारों का अस...
 पोस्ट लेवल : गगन शर्मा. एक मंच
Yashoda Agrawal
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क्या हादसा ये अजब हो गया बूढ़े हुए, इश्क़ रब हो गयाचाहत का पैग़ाम तब है मिला पूरा सभी शौक जब हो गया हम आ गए ज़ुल्फ़ की क़ैद मेंमिलना ही उनसे गजब हो गया रहते थे हमसे बहुत दूर वो मिलने का ये शौक कब हो गया हमको मिला ना ख़ुदा, ना सनम पूरा ख़ल...
अमितेश कुमार
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यह  वर्षांत पर लिखी गई पोस्ट है. कुछ कारणों से यहाँ देरे से प्रकाशित हो रही है. 2016 के अंत में रंगमंच को रंगकर्म की संख्या से देखेंगे तो उत्साहजनक नजर आता है लेकिन जैसे ही निगाह गुणवत्ता की तरफ करते हैं तो यह उत्साह भी कम हो जाता है. हालाँकि यहाँ यह...
 पोस्ट लेवल : हिंदी रंगमंच hindi theatre
Yashoda Agrawal
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पड़ी मझधार में क़श्ती है किनारा दे दोमेरे टूटे हुए इस दिल को सहारा दे दोमुझे दुनिया की नहीं, दिल की नज़र से देखोमेरी नज़रों को मुहब्बत का इशारा दे दोमेरी मज़बूर तमन्ना पे करम फ़रमाओमेरे ख़्वाबों को हसीं एक नज़ारा दे दोनहीं मालूम मेरा दिल क्यों बुझा सा है येतुम निगाहों से इ...
शिवम् मिश्रा
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सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।विश्व रंगमंच दिवस की स्थापना 1961 में इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट (International Theatre Institute) द्वारा की गई थी। रंगमंच से संबंधित अनेक संस्थाओं और समूहों द्वारा भी इस दिन को विशेष दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। इस...
S.M. MAsoom
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हिंदुस्तान में महिलाओं का नाम पुरुषों के पहले लेते हैं.कुलपति प्रो सुंदर लाल(News from the file 2013)औरत  अपने  स्त्रित्व  को पहचाने:डॉ वंदना , औरतों को खुद अपने विकास के लिए आगे आना होगा:तमन्ना फरीदीवीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय...
अमितेश कुमार
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पारसी रंगमंच  बहाने मुम्बई के इतिहास  और गलियों की तरफ एक झरोखा इस लेख में खुलता है. विजय कुमार जी ने रंगविमर्श पर प्रकाशन के लिये हमें अनुमति दी हम उनके आभारी हैं.  शहरों को हम जिस तरह से देखते हैं, उस देखने में ही हमारे लिये उनके विशेष अर्थ खुलने ल...