ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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विश्व भर में अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए आज सोशल मीडिया  का इस्तेमाल हर क्षेत्र में किया जा रहा है और इसी कारण यह अब राजनेताओं की पहली पसंद  बन चूका है । भारत वर्ष में इसका सफल प्रयोग पहली बार करने का श्रेय नरेंद्र मोदी जी को जाता है जिन्होंने...
Yashoda Agrawal
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एक नन्हा फूल कल तक थी कलीआज चकित सा पवन में हिल रहादेख कर वो रंग भरी पांखुरीमन ही मन निज रूप पर था खिल रहागंध मदमाती हॄदय को मोहतीछा रही उपवन में चारों ओर थीपुष्प के रंगीन जीवन की यहआज पहली -पहली किंचित भोर थीतितलियों के संग वह मस्ती भरीथा अजब अठखेलियाँ सी कर रहाको...
अनंत विजय
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भारत संभवत: विश्व का इकलौता देश होगा जहां अपनी कला संस्कृति को बचाने, संजोने और सहेजने को लेकर एक तरह की उपेक्षा का भाव दिखाई देता है । यहां अपनी विरासत को आगे बढ़ाने को, अपनी पारंपरिक भाषा और वेशभूषा में बात करने को पिछड़ेपन की निशानी करार दिया जाता रहा है । हमारे...
अमितेश कुमार
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व्योमेश शुक्ल स्थापित कवि और उभरते हुए रंगकर्मी हैं. हिंदी की कालजयी काव्य कृतियों पर नृत्य नाटिकाओं की प्रस्तुति से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इनके अब तक के रंगमंचीय सफर का एक परिचय प्रस्तुत किया है कवि-आलोचक अविनाश मिश्र ने.वस्तु स्थिति यह है कि—जब...
जन्मेजय तिवारी
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                  दरबार-ए-आम आज बतकहियों, कहकहों, हँसी-ठहाकों से गुंजायमान है । हर वर्ग की जनता उपस्थित है । जिसे होना चाहिए, वह तो है ही; जिसका होना जरूरी नहीं, वह भी मौजूद है । सभी के दिलों में जोश व उत्साह की लहर...
जन्मेजय तिवारी
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               जिसे चाचा-भतीजा को घर के आंगन में देखने की आदत सी पड़ी हुई है, उसके लिए यही सलाह है कि वह अपनी इस आदत को अलविदा कह दे । पिछले लगभग पाँच साल के दौरान समय ने ऐसी करवट ली है कि ये दोनों आमने-सामने हैं । सत्ता...
अनंत विजय
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हिंदी में काफी पहले एक कहावत कही जाती थी-  बिना कोक जो रति करे/बिना गीता भख ज्ञान/बिन पिंगल कविता रचै/तीनों पशु समान । यह उक्ति कविता के संदर्भ में कही जाती थी लेकिन कालांतर में छंद ही कविता से गायब हो गई तो अब पिंगल को कोई क्यों पूछे । दरअसल इस कहावत को उद्धृ...
Yashoda Agrawal
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देखा? रात्रि-तिमिर का भूतकृशकाय, कंकाल,  कुरूप;  चिता की अग्नि से उठा साअग्निबेताल, अघोर, अवधूत.प्रश्न पर तुम बने थे निःशब्द,वह समझा विछोह ही प्रारब्ध;हुआ ऐसा विचलित, विक्षिप्त,जीवन कर लिया व्यर्थ, विद्रूप.अब उसे देख काँपते अप्रयासबढ़ा देते हो कदम अनायास;ज...
Yashoda Agrawal
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मैं तुमसे प्यार तो नहीं करतालेकिन तुम्हारी मुस्कानमुझे अच्छी लगती है।तुम्हारी हँसी और भीशानदार लगती है।तुम्हारा लिबास, तुम्हारी स्टाइलक्या बात है!तुम्हारे चेहरे की चमकजैसे हीरे जवाहरात हैं।लेकिन मैं तुमसे क़तईप्यार नहीं करताक्योंकि मेरा प्यार तुम्हें रास नहीं...
 पोस्ट लेवल : एक मंच से
Yashoda Agrawal
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दिन सावन केतरसावन केकौंधे बिजलीयादें उजलीअंगड़ाई लेसांझें मचलीआते सपनेमन भावन के...चलती पछुआबचते बिछिआसिमटे-सहमेंमन का कछुआहरियाए तनसब घावन केनदिया उमड़ीसुधियां घुमड़ीलागी काटनहंसुली रखड़ीछाये बदरातर-सावन के..बरसे बदरारिसता कजराबांधूं कैसेपहुंची गजराबैरी दिन हैंदुख...
 पोस्ट लेवल : कविता मंच से