ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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मै भारत-भूमि !ना जाने कब सेढूंढ रही हूँअपने हिस्से कीरोशनी का टुकड़ा….लेकिन पता नहीं क्योभ्रष्ट अवव्यस्था के ये अँधेरेइतने गहरे हैंकि फ़िर फ़िर टकरा जाती हूँअंधी गुफा की दीवारों से…बाहर निकल ही नहीं पातीइन जंजीरों से,जिसमे मुझे जकड़ कर रखा हैमेरी ही संतानों नेउन सं...
Yashoda Agrawal
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देखो...तुम रोना मत मेरे घर की  दीवारेंकच्ची हैं तुम्हारे आंसुओं का बोझ ये सह नहीं पाएंगी -:-वो तोमहलों की दीवारें होती हैं जो न जाने कैसेअपने अंदर इतनी सिसकियाँसमेटे रहती हैं और फिर भीसर ऊंचा करकेखड़ी रहती हैं-मंजू मिश्रा&nbs...