ब्लॉगसेतु

4
--उत्तरायणी पर्व के, भिन्न-भिन्न हैं नाम।आया लेकर हर्ष को, उत्सव ललित-ललाम।।--गंगा में डुबकी लगा, पावन करो शरीर।नदियों में बहता यहाँ, पावन निर्मल नीर।।--जीवन में उल्लास के, बहुत निराले ढंग।बलखाती आकाश में, उड़ती हुई पतंग।।--सूर्य रश्मियाँ आ गयीं, ख...
वंदना अवस्थी दुबे
364
सर्दिया शुरु होते ही मेरे ज़ेहन में जो त्यौहार ज़ोर मारने लगता है वो है मकर संक्रान्ति. सर्दियों में आने वाला एकमात्र ऐसा बड़ा त्योहारजिस पर हमारे घर में बड़े सबेरे नहा लेने की बाध्यता होती थी. इधर जनवरी शुरु हुई, उधर हमारे घर में सन्क्रान्ति की तैयारियां शुरु . कम से...