ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
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--कल-कल करती व्यास-विपाशा।मन की बुझती नहीं पिपासा।। --प्यास कहो या आस कहो तुम,तृष्णा-इच्छा, लोभ निराशा,पल-पल राग सुनाता मौसम,जीवन में उगती अभिलाषा।--तन की तृषा भले बुझ जाये,लेकिन मन रहता है प्यासा,कभी अमावस कभी चाँदनी,दोनों करते खेल-तमासा।मन की बुझती नहीं पिपासा...
sanjiv verma salil
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भूमिका हस्तिनापुर की बिथा-कथाबुन्देलखण्ड के बीसेक जिलों में बोली जाबे बारी बोली बुंदेली कित्ती पुरानी है, कही नईं जा सकत। ई भासा की माता सौरसैनी प्राकृत और पिता संस्कृत हैं, ऐसी मानता है। मनों ई बूंदाबारी की अलग चाल है, अलग ठसक है, अलग कथनी है और अलगइ सुभाव है। औरं...
सुशील बाकलीवाल
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      सुबह जब में अपने घर से निकला, रास्ते के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर जिज्ञासावश उसमें लिखा पढने रुका तो उसमें लिखा था, कल शाम अंधेरे की शुरुआत में मुझ गरीब का आखिरी 50/- रु. का नोट यहीं कहीं गिर गया है जिसे मैं नहीं ढूंढ पा रही हूँ । मेरे लिये व...
HARSHVARDHAN SRIVASTAV
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कुमार मुकुल
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 यह 2000 के अंतिम महीनों की बात होगी जब पटना स्टेशन के निकट सीटीओ के मीडिया सेन्टर में पहली बार राजस्थान पत्रिका के पटना से संवाददाता और मित्र प्रियरंजन भारती ने मनोचिकित्सक डॉ.विनय कुमार से यह कहकर परिचय कराया था कि ये भी अच्छी गजलें लिखते हैं। उस समय मैं पटन...
 पोस्ट लेवल : मनोवेद विनय कुमार
सुशील बाकलीवाल
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        प्रायः हम सभी अपने जीवन में दिन की शुरुआत किसी समस्या के समाधान के प्रयत्न से करते हैं और रात्रि में जब सोने जाते हैं तो कुछ अन्य समस्याएं हमारे सामने मौजूद रहती हैं । शायद ही किसी कामकाजी व्यक्ति का कोई दिन कभी ऐसा गुजर पाता हो जब वो ना...
kumarendra singh sengar
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लोगों का उत्साह, लोगों की उमंग, लोगों की आकुलता देखकर लग रहा है जैसे उन सभी लोगों के लिए जाने वाला साल सकारात्मक रहा होगा या फिर उनके द्वारा अपने आपसे सोचे गए कार्य अधिकतम रूप में सफलता को प्राप्त किये होंगे. यदि ऐसा नहीं है तो फिर नए साल के स्वागत के लिए, उसके आने...
कुमार मुकुल
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लालसा सन्यास के पद गुनगुनायेचाटुकारी जब रचे उपसर्ग प्रत्ययतुष्ट होकर अहम सजधज मुस्कुराये। वर्तमान समय की राजनीतिक उलटबांसी और उससे पैदा होती विडंबना को ये गीत ताकतवर और अर्थपूर्ण ढंग से अभिव्‍यक्‍त करते हैं। संस्‍कृतनिष्‍ठ शब्‍दों का इतना मारक प्रयोग वह भी गीतों...
 पोस्ट लेवल : कल्‍पना मनोरमा
HARSHVARDHAN SRIVASTAV
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