ब्लॉगसेतु

कुमार मुकुल
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जहाँ हर चौक चौराहे परराजनीतिक हुंडारअपनी रक्तस्लथ दाढ़लोकतंत्र की राख सेचमकाते फिर रहेकोई पांव-पैदल चल रहाजन-गण-मन की धुन पर'ज्यां द्रेज'दो शब्दों का तुम्हारा नाममेरी समझ में नहीं आतापर  तुम्हारी सायकिल की टुन-टुनसुन पा रहा मैंजैसे  गांधी की आदमकद हरकतों क...
निरंजन  वेलणकर
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१५. यात्रा के अनुभवों पर सिंहावलोकनइस लेख माला को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए| एचआयवी और स्वास्थ्य इस विषय पर की हुई‌ साईकिल यात्रा मेरे लिए बहुत अनुठी रही| मुझे बहुत कुछ देखने का और सीखने का मौका मिला| यह सिर्फ एक साईकिल टूअर नही रहा, बल्की एक स्टडी...
लोकेश नशीने
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खाली बैठे-बैठे ईश्वर ने सोचा कि चलो धरती का भ्रमण कर अपने बनाये मनुष्य का हालचाल लिया जाए। मनुष्य के आपसी प्रेम और बंधुत्व की भावना को परखा जाए। मनुष्यता और मानवीयता के विषय पर मनुष्य का विकास देखा जाए। धरती पर "मनुष्य" से भेंट की जाए। यही सोचकर धरती पर आए ईश्वर की...
जन्मेजय तिवारी
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                   ‘चित्रगुप्त जी, आजकल आपके रहन-सहन कुछ ठीक दिखाई नहीं देते...जब देखो आँखें बन्द ।’ महाराज यमराज अपने सिंहासन पर पहलू बदलते हुए बोले । चेहरा तनिक क्रोध से लालिमा के छींटों से युक्त होने लगा था...
केवल राम
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गतअंक से आगे...भावों की अभिव्यक्ति के लिए मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव जन्तु भी कुछ ध्वनि संकेतों का प्रयोग करते हैं. हालाँकि हम उनके ध्वनि संकेतों को समझ नहीं पाते, लेकिन सामान्य व्यवहार में देखा गया है कि वह ऐसा करते हैं. जीवन की हर स्थिति में वह भी अपने भावों की अभ...
केवल राम
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इस ब्रह्माण्ड को जब हम समझने का प्रयास करते हैं तो हम यह पाते हैं कि इसकी गति निश्चित है. जितनी भी जड़ और चेतन प्रकृति है वह अपनी समय और सीमा के अनुसार कार्य कर रही है. विज्ञान ने अब तक जितना भी इस ब्रह्माण्ड के विषय में जाना है उससे तो यही सिद्ध होता है कि इस ब्रह्...
जन्मेजय तिवारी
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                     चूहों की सालाना आम बैठक आहूत की गई थी । तमाम पदाधिकारी और सिविल सोसायटी के चूहे अपने-अपने तर्कों-कुतर्कों के साथ अपने लिए निर्धारित सीटों पर ठसक और कसक के साथ शोभा को प्राप्त हो रहे थे...
जन्मेजय तिवारी
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                      नींद नहीं आ रही थी । करवट बदल-बदल कर उसे बुलाने की सारी कोशिशें बेकार गई थीं । अंततः बिस्तर को छोड़ देना ही मुझे उचित जान पड़ा । मैं घर से बाहर निकल आया और धीरे-धीरे सड़क पर बढ़ने लगा...
केवल राम
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गतअंक से आगे... इस यात्रा का अनुभव अद्भुत है, लेकिन यह महसूस तब होता है जब हम इसे महसूस करना चाहते हैं. अधिकतर तो मनुष्य के साथ यह होता है कि वह जैसे-जैसे जीवन की यात्रा को तय करता है, वैसे-वैसे उसके दिलो-दिमाग पर कई तरह की परतें जमती जाती हैं. उसके मन में कई तरह क...
विजय राजबली माथुर
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डब्लू टी ओ मानवता और प्राकृतिक संसाधनों को लुटने और ध्वस्त करने का अमेरिकी षड्यंत्र-    मंजुल भारद्वाजमुनाफ़ा .. या लूट : संवाद ,मेल मिलाप , सम्पर्क , जानना पहचानना , एक दूसरे से जुड़ना ,एक दूसरे के दुःख दर्द में शामिल होना , एक दूसरे की मदद करना...