ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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जो भी हो जाए कम है,क्यों तेरी आँखें नम हैं?देते हैं  ज़ख्म  अपनें,मिले गैरां से मरहम है।तू अपनी राह चला चल,पीकर अपमान हलाहल।या मोड़ दिशा हवाओं के,गर तुझमें भी कुछ दम है।न्याय सिसक कर रोए,अन्याय की करनी धोए.यहाँ झूठ, फ़रेब के क़िस्से,नित लहराते परचम हैं।नैतिकत...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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मत टिकाओ उम्मीद को अपनी किसी लफ़्फ़ाज़ के सहारे, नहीं  तो डूब जायेगी नैया एक दिन देखते रह जाओगे किनारे। दरारें दिख रहीं हैं दूर से मुझको संयम के बाँध अब हैं फूटने वाले ,जायेंगे टूट जब एक दिन कच्चे विश्वास के...
Ravindra Pandey
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रूठ जाये ये जहां, परवाह मैं करता नहीं...एक तेरा साथ यारा, महफ़िलों से कम नहीं...क़ातिलाना हर अदा, गुस्ताख़ हैं तेरी नज़र,सब उलझने बेमायने, जो तेरे पेंचोखम नहीं...आशिक़ी या दिल्लगी, सोचेंगे हमने क्या किया,है मगर मालूम, कोई महबूब सा मरहम नहीं...कीजिएगा इक इशारा, मिलने आएँ...
Yashoda Agrawal
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होती हैअजीबो गरीबखुजलीकिसी को भीकहीं भीहो सकती हैखुज़लीजब चाहोजहाँ चाहोकर लोखुज़ली..आदमी ही नहींजानवरों को भीहोती है खुज़लीऔर तो औरगणमान्य लोगोंको भी होती हैखुज़लीज़बान उनकीहरदमखुजलाते रहती हैउसी खुज़ली कोनिरखमीडिया वालों को भीहोने लगती हैखुज़लीजहाँ-तहाँख...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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                                                    "तूँ है एक अनुपम तस्वीर" 'नारी'  चिरस्थाई जीवन वट "नारी" चिरस्थाई जी...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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ये          कहाँ         से आ        गयी     बहार   है  ,बंद                     तोमेरी   गली   का  द्वार...
Sandhya Sharma
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दुखों से प्यार है, मुझे यही कहा था ना तुमने और मुझे... तुम पर फक्र हैजख्म को सहेजावेदनाओं की सीमा से परे बगैर पैरासिटामाल केआंसुओं के समन्दर को अपनी आँखों में जगह दीकितने तूफ़ान उठे पर छलकने ना दिया कवि ही पढ़ सकता हैआँखों में छिपी...