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sanjiv verma salil
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मुक्तिकाआपकी मर्जी*आपकी मर्जी नमन लें या न लेंआपकी मर्जी नहीं तो हम चलें*आपकी मर्जी हुई रोका हमेंआपकी मर्जी हँसीं, दीपक जलें*आपकी मर्जी न फर्जी जानतेआपकी मर्जी सुबह सूरज ढलें*आपकी मर्जी दिया दिल तोड़ फिरआपकी मर्जी बनें दर्जी सिलें*आपकी मर्जी हँसा दे हँसी कोआपकी मर्ज...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका आपकी मर्जी
Bhavna  Pathak
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बच्चो, नाना- नानी हमेशा ही हर बच्चे को लिए सबसे प्यारे होते हैं। पर हमारे जमाने की बात ही कुछ और थी। गर्मी की छुट्टियां शुरू होनो के काफी पहले से ही हम लोग दिन गिनने लगते थे कि कब मामा जी लिवाने आएंगे। कभी पिता जी भी छोड़ आते थे। पूरी की पूरी गर्मी की छुट्टी वहीं ब...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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मर्जी का मालिकबहुत अच्छा लगा, मन बहुत बहला. तरह - तरह के सुझाव  आए और टिप्पणियाँ आईं. कुछ मजेदार तो कुछ फूहड़. किंतु मन सभी ने बहलाया. कारण दीपिका की “माय चॉईस”. उसके बाद उसका पुरुष संस्करण. दीपिका की बात – यदि खुले दिलोदिमाग से सोचें, तो बहुत ही उत्तम है - तब...