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S.M. MAsoom
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जौनपुर की अज़ादारी  का इतिहास बहुत पुराना है | यहाँ पे बहुत से ऐतिहासिक इमामबाड़े मुगलों और शार्की समय के  बने हुए हैं जिनमे से बहुत तो इब्राहीम लोधी ने तोड़ डाले | उनमे से बहुत से बाख गए जिन्हें यहाँ के अज़ादार आज तक संभाले हुए हैं | इमाम पुर,सदर इमामबाड...
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दो सौ वर्ष पहले जौनपुर पक्कड तले के शाह मुर्तजा रईस हज्ज और जियारत करने गये तो वहा से हजरत मुहम्मद साहब पे पदचिन्ह और दस्त ए अली के चिन्ह ली आये जिसे पहले पंजे शरीफ मे  रखा  गया और बाद मे  उसे एक दिन हमजा पूर  मे एक चबुतरा बना के राख दिया गया |...
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जौनपुर शहर से 5 किलोमीटर की दुरी पे स्थित हमजापुर का इमामबाड़ा एक ऐतिहासिक इमाम बाड़ा है | यह शार्की समय का ही बना हुआ है | दिल्ली के बादशाह शाह आलम के दौर में इसकी तामील हुयी और शाह ऐ मुर्तजा साहब जब जियारत करने गए तो वहाँ से कदम ऐ रसूल (स.अ.व) और हजरत अली (अ.स) क...
 पोस्ट लेवल : मशहूर इमामबाड़े
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कटघरा इलाका शहर के बीच में गोमती किनारे बसा हुआ है | यहाँ की अज़ादारी ख़ास तौर पे मुहर्रम की 6 और 9 को यहाँ मजलिस होती है और जुलुस बरामद होता है | यह जुलुस नवाब गाजी के रौज़े से उठता है और हमाम दरवाज़े तक जाता है |6 रबीउल अव्वल की अमारी भी यहाँ मशहूर है |इनमे स...
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इमाम हुसैन (अ.स) के चाहने वाले दुनिया के हर कोने मैं आज मौजूद हैं |मुहर्रम का चाँद देखते ही अज़ादारी ऐ हुसैन में कोई कमी नहीं रखते और बड़े खुलूस से इसे अंजाम देते  हैं | कजगांव में पहले बहुत ही एहतेमाम से अज़ादारी हुआ करती थी और इसकी तैयारी मुहर्रम के 15-२० दि...
 पोस्ट लेवल : muharram मशहूर इमामबाड़े
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शार्की बादशाहों ने जौनपुर में बहुत से इमामबाड़े ,रौज़े बनवाये जिसे देख के ऐसा लगता है की वो जौनपुर को बग़दाद की शक्ल देना चाहते थे और बहुत हद तक इसमें कामयाब भी थे | लेकिन इब्राहीम लोधी ने इसे तोड़ दाल और बहुत बर्बाद किया | फिर भी बहुत से रौज़े और इमामबाड़े आज भी बचे हुए...
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मरहूम दुन्ने हसन साहब इस बार इमामबाडा मुर्तज़ा बक्श बड़े इमाम जौनपुर में शब् ऐ आशूर जाना हुआ जहां उस इमामबाड़े के बारे में जानकारी हासिल हुयी | वहां के लोगों के अनुसार ये इमामबाड़ा १८७५ में टूटी हुयी बदहाल हालत में था जिसेउनके खानदान वालों ने फिर से बनवाया और सैयद दुन्...