ब्लॉगसेतु

जेन्नी  शबनम
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महिला दिवस के उपलक्ष्य में रंगारंग कार्यक्रम अपने चरम पर था। तय समय से ज्यादा वक़्त हो गया परन्तु कार्यक्रम पूरा नहीं हो पाया था। शाम के 7 बज गए थे, सभी महिलाएँ अब जाने को बेताब हो रही थी, इस लिए कार्यक्रम को शीघ्र ख़त्म करने का बार-बार आग्रह कर रही थी।&nbs...
kumarendra singh sengar
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आठ मार्च. महिला दिवस या फिर महिलाओं द्वारा पुरुष विरोधी मानसिकता को दर्शाने का दिन? ऐसा अकारण लिखना नहीं हो रहा. विगत कई वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत रहने के दौरान इस दिन से विशेष रूप से परिचय होता है. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि अपने जनपद में कन्या भ्रूण...
 पोस्ट लेवल : महिला दिवस मानसिकता
sanjiv verma salil
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मुक्तिका*झुका आँखें कहर ढाएमिला नज़रें फतह पाएचलाए तीर जब दिल परन कोई दिल ठहर पाएगहन गंभीर सागर सीपवन चंचल भी शर्माएधरा सम धैर्य धारणकरबदरियों सी बरस जाएकरे शुभ भगवती हो यहअशुभ हो तो कहर ढाएकभी अबला, कभी सबलाबला हर पल में हर गाएन दोधारी, नहीं आरीसुनारी सभी को भाए**...
जेन्नी  शबनम
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पूरक *******  ओ साथी, अपना वजूद तलाशो, दूसरों का नष्ट न करो   एक ही तराजू से, हम सभी को न तौलो   जीवन जो नेमत है, हम सभी के लिए है   इससे असहमत न होओ।   मुमकिन है, युगों की प्रताड़ना से आहत तुम  &nbsp...
ज्योति  देहलीवाल
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8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता हैं। महिला दिवस पर हर महिला की अपेक्षा होती हैं सभी लोग उसे सम्मान दे और उसकी कद्र करें! उसे एक 'व्यक्ति' के नजरिए से देखें क्योंकि उसका भी अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व हैं!! लेकिन होता ये हैं कि हम महिलायें खुद ही खुद को...
अनंत विजय
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इन दिनों फिल्म ‘थप्पड’ की बहुत चर्चा हो रही है। निर्देशक अनुभव सिन्हा ने बेहतर फिल्म बनाई है। अनुभव सिन्हा से विचारधारा के स्तर पर असहमत लोग भी इस फिल्म की कथावस्तु को लेकर उनकी सराहना कर चुके हैं। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी ने तो साफ तौर पर कह...
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--लीक पीटने का कहीं, छूट न जाय रिवाज।मना रहा है इसलिए, महिला-दिवस समाज।।--जग में अब भी हो रहे, मौखिक जोड़-घटाव।कैसे होगा दूर फिर, लिंग-भेद का भाव।--नारी की अपनी अलग, कैसे हो पहचान।ढोती है वो उमर भर, साजन का उपनाम।।--सीमाओँ में है बँधी, नारी की प...
Pratibha Kushwaha
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हमेशा से यह धारणा रही है कि महिलाएं वोट डालने के मामले में अपने परिवार का अनुसरण करती रही हैं और करती हैं। शायद यही कारण है कि देश की आधी आबादी को सत्ता में एक फिलर के तौर पर ही ट्रीट किया जाता है। राजनीतिक दलों की नजर उनके वोटों पर रहती तो है, पर वे उन्हें एक...
जेन्नी  शबनम
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3 x 6 के बिस्तर पर लेटी धीमी गति से चलते पंखे को देख निशा सोच रही है कि ऐसे ही चक्कर काटती रही वह तमाम उम्र, कभी बच्चों के पीछे कभी जिम्मेदारियों के पीछे। पर अब क्या करे? इस उम्र में कहाँ जाए? सारी डिग्रियाँ धरी रह गईं। वह कुछ न कर सकी। अब कौन देगा नौकरी ? रोज़ अख़...
जेन्नी  शबनम
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पानी और स्त्री  *******   बचपन में पढ़ा -   पानी होता है रंगहीन गंधहीन   जिसे जहाँ रखा उस साँचे में ढला    खूब गर्म किया भाप बन उड़ गया   खूब ठंडा किया बर्फ बन जम गया   पानी क...