ब्लॉगसेतु

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--मैं हूँ निपट भिखारी, कुछ दान माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।। --दुनिया की भीड़ से मैं,बच करके चल रहा हूँ,माँ तेरे रजकणों को,माथे पे मल रहा हूँ,निष्प्राण अक्षरों में, मैं प्राण माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।। -- अज्ञान...
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--आओ माता! सुवासित करो मेरा मन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।--घोर तम है भरा आज परिवेश में,सभ्यता सो गई आज तो देश में,हो रहा है सुरा से यहाँ आचमन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।--दो सुमेधा मुझे मैं तो अनजान हूँ,माँगता काव्य-छन्दों का वरदान हूँ,चा...
Yashoda Agrawal
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घर में माँ की कोई तस्वीर नहीजब भी तस्वीर खिचवाने का मौका आता हैमाँ घर में खोई हुई किसी चीज को ढूंढ रही होती हैया लकड़ी घास और पानी लेने गई होती हैजंगल में उसे एक बार बाघ भी मिलापर वह डरी नहीउसने बाघ को भगाया घास काटी घर आकरआग जलाई और सबके लिए खाना पकायामई कभी घास य...
अनीता सैनी
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तल्ख़ियाँ तौल रहा तराज़ू से ज़माने नैतिकता को क्षणभँगुर किया,    दौर फिर वही वक़्त दोहराने लगा,  हटा आँखों से अहम-वहम की पट्टीवक़्त ने फ़रेब का शृंगार किया | संस्कारों में है सुरक्षित आज की नारी,   एहसास यही लगा...
Ravindra Pandey
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किसको सुनाऊँ, अज़ब दास्तां,सूना है तुम बिन, ये सारा जहां।रुँधा गला है, और आँखें हैं नम,मुस्कुराने की मैंने, ली है कसम,समय चल रहा है, हवा बह रही,ठहर सा गया हूँ, एक मैं ही माँ।सुना है तुम बिन...कसक हैं कई पर सुनाऊँ किसे,ये पाँवों के छाले दिखाऊँ किसे,बिखर जो गया, समेटे...
जेन्नी  शबनम
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महज़ नाम  *******   कभी लगता था कि किसी के आँचल में   हर वेदना मिट जाती है   मगर भाव बदल जाते हैं   जब संवेदना मिट जाती है   न किसी प्यार का ना अधिकार का नाम है   माँ संबंध नहीं   महज पुकार क...
 पोस्ट लेवल : रिश्ता माँ संतान समाज
अनीता सैनी
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उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
Yashoda Agrawal
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देखते ही देखते जवान,पिताजी बूढ़े हो जाते हैं..सुबह की सैर में,कभी चक्कर खा जाते हैं,सारे मौहल्ले को पता है,पर हमसे छुपाते हैं...दिन प्रतिदिन अपनी,खुराक घटाते हैं,और तबियत ठीक होने की,बात फ़ोन पे बताते हैं...ढ़ीले हो गए कपड़ों,को टाइट करवाते हैं,देखते ही देखते जवान,&n...
 पोस्ट लेवल : माँ - बाप
sanjiv verma salil
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 माँ के प्रति प्रणतांजलि:तन पुलकित, मन सुरभित करतीं, माँ की सुधियाँ पुरवाई सी.दोहा गीत गजल कुण्डलिनी, मुक्तक छप्पय रूबाई सी..मन को हुलसित-पुलकित करतीं, यादें 'सलिल' डुबातीं दुख में-होरी गारी बन्ना बन्नी, सोहर चैती शहनाई सी..*मानस पट पर अंकित नित नव छवियाँ...
 पोस्ट लेवल : muktak माँ ma मुक्तक
sanjiv verma salil
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चौपदे :  माँबारिश में आँचल को छतरी, बना बचाती थी मुझको माँ.जाड़े में दुबका गोदी में, मुझे सुलाती थी गाकर माँ..गर्मी में आँचल का पंखा, झलती कहती नयी कहानी-मेरी गलती छिपा पिता से, बिसराती थी मुस्काकर माँ..*मंजन स्नान आरती थी माँ, ब्यारी दूध कलेवा थी माँ.खेल-कूद...
 पोस्ट लेवल : चौपदे माँ मुक्तक