ब्लॉगसेतु

जेन्नी  शबनम
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महज़ नाम  *******   कभी लगता था कि किसी के आँचल में   हर वेदना मिट जाती है   मगर भाव बदल जाते हैं   जब संवेदना मिट जाती है   न किसी प्यार का ना अधिकार का नाम है   माँ संबंध नहीं   महज पुकार क...
 पोस्ट लेवल : रिश्ता माँ संतान समाज
अनीता सैनी
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उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
Yashoda Agrawal
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देखते ही देखते जवान,पिताजी बूढ़े हो जाते हैं..सुबह की सैर में,कभी चक्कर खा जाते हैं,सारे मौहल्ले को पता है,पर हमसे छुपाते हैं...दिन प्रतिदिन अपनी,खुराक घटाते हैं,और तबियत ठीक होने की,बात फ़ोन पे बताते हैं...ढ़ीले हो गए कपड़ों,को टाइट करवाते हैं,देखते ही देखते जवान,&n...
 पोस्ट लेवल : माँ - बाप
sanjiv verma salil
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 माँ के प्रति प्रणतांजलि:तन पुलकित, मन सुरभित करतीं, माँ की सुधियाँ पुरवाई सी.दोहा गीत गजल कुण्डलिनी, मुक्तक छप्पय रूबाई सी..मन को हुलसित-पुलकित करतीं, यादें 'सलिल' डुबातीं दुख में-होरी गारी बन्ना बन्नी, सोहर चैती शहनाई सी..*मानस पट पर अंकित नित नव छवियाँ...
 पोस्ट लेवल : muktak माँ ma मुक्तक
sanjiv verma salil
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चौपदे :  माँबारिश में आँचल को छतरी, बना बचाती थी मुझको माँ.जाड़े में दुबका गोदी में, मुझे सुलाती थी गाकर माँ..गर्मी में आँचल का पंखा, झलती कहती नयी कहानी-मेरी गलती छिपा पिता से, बिसराती थी मुस्काकर माँ..*मंजन स्नान आरती थी माँ, ब्यारी दूध कलेवा थी माँ.खेल-कूद...
 पोस्ट लेवल : चौपदे माँ मुक्तक
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माँ जल रहा है तन बदन लग रही ज्यों आग है रोशनी से है भरा घर का हर इक भाग है ऐ रवि आकर के देखो रात में भी तुम कभी चांद पर भी लोग कहते हैं कि काला दाग है रिश्ते नातों को संभालो टूटते ही जा रहे डस रहे हैं अब सभी को संबंध के ही नाग हैं घोर कलयुग में कहाँ पर हंस चुगते मो...
sanjiv verma salil
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स्मृति-गीतमाँ के प्रति:संजीव*अक्षरों ने तुम्हें ही किया है नमनशब्द ममता का करते रहे आचमनवाक्य वात्सल्य पाकर मुखर हो उठे-हर अनुच्छेद स्नेहिल हुआ अंजुमनगीत के बंद में छंद लोरी मृदुलऔर मुखड़ा तुम्हारा ही आँचल धवलहर अलंकार माथे की बिंदी हुआ-रस भजन-भाव जैसे लिए चिर नवलले...
 पोस्ट लेवल : स्मृति-गीत maa माँ smruti geet
Yashoda Agrawal
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माँ तेरा बचपन देख आया हूँ माँ तुझे खेलता देख आया हूँ मैंने देखा तुम्हें अपनी माँ की गोद में रोते देखा तुम्हें थोड़ा बड़ा होते मिटटी सने हाथ देखे तुम्हारे खिलौने भरे हाथ देखे तुम्हारे तुम्हारी मासूम हँसी देखी तुम्हारा रोना देख...
 पोस्ट लेवल : शिवनाथ कुमार माँ
देवेन्द्र पाण्डेय
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पिता स्वर्ग में रहतेघर मेंबच्चों के संगमां रहती थीं।बच्चों के सुख की खातिरजाने क्या-क्यादुःख सहती थीं।क्या बतलाएं साथी तुमकोमेरी अम्माक्या-क्या थीं?देहरी, खिड़की,छत-आंगनघर का कोना-कोना थीं।चोट लगे तोमरहम मां थींभूख लगे तोरोटी मां थींमेरे मन की सारी बातेंसुनने व...
 पोस्ट लेवल : कविता माँ
सरिता  भाटिया
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माएँ हमेशा अपनी मर्जी चलाती हैंअपने बच्चों को दुखों से बचाती हैंरातों रात जागती हैं ..पानी कहीं चला नही जायेसोचते सोचते जल्दी उठ जाती हैंदुर्गा जैसे अष्ट भुजाओं से काम निपटाती हैंएक हाथ से पानी भरती है ,सब्जी बनाती हैंआटा गूँथती हैंबच्चों को जगाती हैंतभी तो माँ ......
 पोस्ट लेवल : दुर्गा माँ