ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई तो बहुत से लोगों को लगा कि उनको घर में कैद कर दिया गया है. प्रधानमंत्री के शब्द कुछ ऐसे थे भी कि लोगों ने इसे एक तरह का कर्फ्यू ही समझा. समझना भी चाहिए था. खैर, चर्चा इसकी नहीं. लॉकडाउन का कौन, कितना, किस तरह से पालन कर रहा, यह उसकी म...
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आज दो खबरें पढ़ने को मिलीं. दोनों ख़बरें एक ही स्थान से संदर्भित हैं. दोनों ही खबरें एक ही बिंदु पर केन्द्रित हैं. एक खबर मिली कि चीन के वुहान में आज से बस सेवा बहाल कर दी गई. इसी के साथ ये भी खबर पढ़ने को मिली कि वुहान में जिन लोगों को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया...
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संभव है कि कल 22 मार्च के एक दिन के जनता कर्फ्यू के बाद प्रशासनिक कर्फ्यू शुरू हो जाए... ऐसा आप सबके दिमाग में भी होगा क्योंकि आज जिस तरह की भीड़ बाजार में देखी, उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि कल के बाद आजीवन बाज़ार बंद रहेंगे. एक पल को रुक कर सोचिये, आज से बीस-बाईस साल...
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राजनीति करना, राजनीति में बिना किसी पद के बने रहना, राजनीति में चुनाव लड़ना, चुनाव लड़ने में उसका प्रबंधन करना आदि बहुत अलग-अलग प्रकृति की चीजें हैं. आज सांसद, विधायक निधि देख कर और किसी पद की आशा में राजनीति की तरफ भागे आ रहे लोगों को मालूम ही नहीं कि राजनीति महज सफ़...
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आठ मार्च. महिला दिवस या फिर महिलाओं द्वारा पुरुष विरोधी मानसिकता को दर्शाने का दिन? ऐसा अकारण लिखना नहीं हो रहा. विगत कई वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत रहने के दौरान इस दिन से विशेष रूप से परिचय होता है. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि अपने जनपद में कन्या भ्रूण...
 पोस्ट लेवल : महिला दिवस मानसिकता
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पिछले दिनों दिल्ली में हुई हिंसा ने दिल्ली को बेबस कर दिया. उसकी इस बेबसी में स्वतंत्र सोशल मीडिया अपनी तरह से चाल चलता दिखा. दिल्ली हिंसा के बेबसी भरे दौर में बहुतेरे लोग सोशल मीडिया की सम्पादक-मुक्त स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते भी दिखाई दिए. यह सही है कि सोशल मीडि...
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पहले भी कई बार, कई अवसरों पर इसकी चर्चा हम कर चुके हैं कि कैसे इंटरनेट से परिचय बना और उसके बाद कैसे बड़े डरते-डरते ब्लॉगिंग आरम्भ की गई. इस मई में पूरे बारह वर्ष हो जायेंगे ब्लॉगिंग करते हुए. हालाँकि ब्लॉग अप्रैल में ही बना लिया गया था मगर कुछ अज्ञात से भय हावी थे,...
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बहुत लम्बे समय से सामाजिक क्षेत्र से जुड़ाव बना हुआ है. बचपन से ही सभी की मदद करने जैसी सीख अपने बड़ों से मिलती रही. छुटपन में बहुत सारे काम ऐसे देखे जिनका उस समय सन्दर्भ, भावार्थ समझ पान मुश्किल होता था किन्तु समय के साथ उनके पीछे छिपी परोपकार की भावना समझ आने लगी....
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कुछ दिनों पहले हमारी बड़ी बहिन के द्वारा whatsapp पर यह सन्देश मिला. यूँ तो दिन भर में सैकड़ों तरह के सन्देश सोशल मीडिया के माध्यम से मोबाइल पर अपनी पहुँच बनाते रहते हैं मगर इक्का-दुक्का सन्देश ही ऐसे होते हैं जो दिल को छू जाते हैं. ऐसा ही कुछ इस सन्देश ने किया. उस स...
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प्यार, प्रेम, इश्क ऐसे शब्द हैं जिन पर कहीं न कहीं चर्चा देखने-सुनने को मिल जाती है. कोमल भावनाओं को अपने में समेटे इन शब्दों के साथ समाज बहुत ही कठोरता से अपना व्यवहार करता है. प्यार को लेकर आये दिन हमें स्वयं हमारे कुछ मित्रों की तरफ से अनेक सवालों से दो-चार होना...