ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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प्यार, प्रेम, इश्क ऐसे शब्द हैं जिन पर कहीं न कहीं चर्चा देखने-सुनने को मिल जाती है. कोमल भावनाओं को अपने में समेटे इन शब्दों के साथ समाज बहुत ही कठोरता से अपना व्यवहार करता है. प्यार को लेकर आये दिन हमें स्वयं हमारे कुछ मित्रों की तरफ से अनेक सवालों से दो-चार होना...
kumarendra singh sengar
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आज की पोस्ट रिश्तों पर लिखने की सोच रहे थे मगर लगा कि रिश्तों की परिभाषा है क्या? जो हम आपसी संबंधों के द्वारा निश्चित कर देते हैं, क्या वही रिश्ते कहलाते हैं? क्या रिश्तों के लिए आपस में किसी तरह का सम्बन्ध होना आवश्यक है? दो व्यक्तियों के बीच की दोस्ती को क्या कह...
kumarendra singh sengar
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लोगों का उत्साह, लोगों की उमंग, लोगों की आकुलता देखकर लग रहा है जैसे उन सभी लोगों के लिए जाने वाला साल सकारात्मक रहा होगा या फिर उनके द्वारा अपने आपसे सोचे गए कार्य अधिकतम रूप में सफलता को प्राप्त किये होंगे. यदि ऐसा नहीं है तो फिर नए साल के स्वागत के लिए, उसके आने...
mahendra verma
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क्या आपको किसी ने कभी कहा है कि ‘ज़रा खुले दिमाग़ से सोचो’ या क्या यही बात आपने किसी से कभी कही है ?  इस बात से ऐसा लगता है कि सोचने वाला अब तक ‘बंद दिमाग़’ से सोच रहा था । क्या बंद दिमाग़ से भी सोचा जा सकता है ? सोचते होंगे कुछ लोग ! तभी तो कहने की ज़़रूरत पड़ी कि...
kumarendra singh sengar
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पिछले साल इसी दिसंबर की बात है, हम लोग बिहार के सबसे छोटे जिले शिवहर में थे. न कोई घूमने का विचार, न यहाँ छुट्टियाँ मनाने का कोई कार्यक्रम. हमारे एक मित्र राकेश द्वारा अपने देशव्यापी साईकिल अभियान का समापन अपने गृह-जनपद में किया गया था. समय भी लगभग इसी तिथि के आसपा...
kumarendra singh sengar
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हैदराबाद में चिकित्सक महिला के साथ हुई वीभत्स वारदात के बाद पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. इस बहस के केन्द्र में जहाँ महिलाओं की सुरक्षा है, शासन-प्रशासन की कानून व्यवस्था है वहीं इसके साथ-साथ मजहब विशेष के पुरुषों द्वारा ऐसे जघन्...
kumarendra singh sengar
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बेटियों के साथ होने वाली किसी भी घटना के बाद एक आम पोस्ट आती है कि बेटियों के बजाय बेटों को शिक्षा दें कि वे स्त्री को एक इन्सान समझें. हम बराबर और बार-बार कहते हैं कि समाज में स्त्री-पुरुष का, लड़के-लड़की का, बेटे-बेटी का भेद करने से कभी कोई सुधार नहीं आने वाला. बे...
kumarendra singh sengar
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आज कुछ लिखने का मन नहीं हो रहा था किन्तु कल से ही दिमाग में, दिल में ऐसी उथल-पुथल मची हुई थी, जिसका निदान सिर्फ लिखने से ही हो सकता है. असल में अब डायरी लिखना बहुत लम्बे समय से बंद कर दिया है. बचपन में बाबा जी द्वारा ये आदत डाली गई थी, जो समय के साथ परिपक्व होती रह...
kumarendra singh sengar
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अक्सर मन में सवाल उठा करते हैं कि व्यक्ति आपस में सम्बन्ध क्यों बनाता है? आपस में दोस्ती जैसी स्थितियों की सम्भावना वह क्यों तलाशता है? क्यों दो विपरीतलिंगी आपस में प्रेम करने लग जाते हैं? क्या ऐसा होना प्राकृतिक है? क्या ऐसा मानवीय स्वभाव की आवश्यकता के चलते किया...
kumarendra singh sengar
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विश्वास और अविश्वास के बीच एक अक्षर का अंतर है मगर दोनों की प्रकृति में जमीन आसमान का अंतर है. विश्वास के द्वारा व्यक्ति अपनी प्रस्थिति को मजबूत बना पाता है वहीं अविश्वास के कारण उसके व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. विश्वास और अविश्वास के बीच के बारीक अंतर...