ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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चीनी वायरस कोरोना के कारण जन-जीवन अस्तव्यस्त होता नजर आ रहा है. लॉकडाउन के चार चरणों के बाद जब देश में अनलॉक की प्रक्रिया आरम्भ हुई तो भी लोगों में एक तरह का डर बैठा हुआ है. ये और बात है कि बहुत से लोग इस डर का प्रदर्शन कर दे रहे हैं और बहुत से इसे छिपाने में सफल ह...
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प्रेम, प्यार, मुहब्बत, इश्क ये शब्द आज के समय में गंभीरता से नहीं लिए जाते हैं. इनके पीछे कहीं व्यंग्य का भाव, कहीं उपेक्षा का भाव, कहीं अन्योक्ति का भाव छिपा दिखता है. इश्क की चर्चा होने से पहले ही सामने वाला अपने दिमाग में एक छवि उभर कर स्थायी भाव ग्रहण कर लेती ह...
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किसी घटना के सामने आने के बाद वैचारिकी उसी तरफ मुड़ जाती है या कहें कि तमाम विचार उसी घटना के इर्द-गिर्द भटकने लगते हैं. इन विचारों में पक्ष, विपक्ष जैसी स्थिति देखने को मिलने लगती है. विचार-विमर्श की दृष्टि से ऐसा होना गलत नहीं है मगर इसे लेकर विचार रखने वाले का आक...
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व्यक्ति कितनी जल्दबाजी में रहता है इसको सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है. एक-दो पंक्तियों की पोस्ट को तो व्यक्ति पढ़ लेता है मगर कुछ लम्बी पोस्ट दिखाई देने की स्थिति में लोग बस लाइक का बटन खटका कर आगे बढ़ जाते हैं. कुछ तो पोस्ट पर बस लाइक का खटका दबाने ही आते हैं. एक म...
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कल रात नियमित भ्रमण पर हमारीवाणी पर टहलना हो रहा था. अभी ज्यादा दूर जाना नहीं हो सका था कि एक पोस्ट का शीर्षक हमें अपनी कविता जैसा दिखा. ब्लॉगर का नाम भी पहचाना हुआ था. इसलिए लगा नहीं कि हमारी कविता वहाँ पोस्ट की गई होगी. इसके बजाय लगा कि कहीं हमारी कविता के बारे म...
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युवा फ़िल्मी कलाकार सुशांत की आत्महत्या ने सोशल मीडिया पर विमर्श का दौर आरम्भ करवा दिया. यह विमर्श उस दौर में आरम्भ हुआ है जबकि हमारा देश प्रतिदिन सैकड़ों मौतों को कोरोना वायरस से होते देख रहा है. यह विमर्श उस देश में शुरू हुआ है जहाँ इस लॉकडाउन के पहले तक हजारों-लाख...
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आज मन कुछ उदास सा है. क्यों है ऐसा पता नहीं, बस कुछ करने का मन नहीं कर रहा. कुछ कर भी रहे हैं तो लग रहा जैसे सबकुछ यंत्रवत ही करना पड़ रहा है. इस अनमने मूड के चलते आज  कुछ विशेष भी नहीं किया जा सका. पूरा दिन बेकार ही निकला. सुरक्षात्मक कदमों के चक्कर में कदम घर...
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लॉकडाउन 4 का अंत हुआ या समापन, ये सभी लोग अपने हिसाब से तय कर लें. आज एक जून से अनलॉक किये जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. कुछ लोगों का ऐसा विचार बना हुआ था कि लॉकडाउन अभी बढ़ेगा. कुछ लोगों ने अब इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी कि अभी लॉकडाउन हटना नहीं चाहिए...
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ज़िन्दगी जितनी प्यारी होती है और मौत उतनी ही डरावनी. सच है न? आखिर हम सब मौत से इतना डरते क्यों हैं? किसके लिए डरते हैं? जिस दिन हम जन्म लेते हैं उसी दिन हमसे बड़े लोगों को, हमसे पहले जन्मे लोगों को (इसमें वे लोग जो बौद्धिक रूप से समृद्ध हैं) जानकारी होती है कि हमें...
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लोगों की रुचि दूसरों की ज़िन्दगी में झाँकने की क्यों होती है? दूसरे की ज़िन्दगी में सुख है या दुःख इससे झाँकने वालों का कोई लेना-देना नहीं होता है, बस वे उसमें झाँकना चाहते हैं. इस ताका-झाँकी में यदि विषय प्रेम का, इश्क का हो तो फिर कहना ही क्या. इस विषय के आगे सभी व...