ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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माहिया*हो गई सुबह आनाउषा से सूर्य कहेआकर फिर मत जाना*तुम साथ सदा देनाहाथ हाथ में लेजीवन नौका खेना*मैं प्राण देह है तूदो होकर भी एकमैं प्रीत; नेह है तू*रस-भाव; अर्थ-आखरगति-यति; रूप-अरूपप्रकृति-पुरुष; वधु-वर*कारक किसका कौन?जीव न जो संजीवसाध-साधना मौन*कौन कहाँ भगवान?द...
 पोस्ट लेवल : माहिया
Nitu  Thakur
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माहिया टप्पे नीतू ठाकुर 'विदुषी'तू छत पे कल आनागन्ना चूसेंगे बेशक जल्दी जानागन्ने जब टूटेंगेतूने बहकायाघरवाले कूटेंगे सावन में गायेगीकोयल काली तोमेढ़क को पाएगी काली कोयल गाएडाली पर बैठीजो तेरे मन भाये महकेगी बगिया जबरजनीगंधा सीआऊंगी मिलने तब...
Basudeo Agarwal
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सीपी में आँखों की,मौक्तिक चंदा भर,भेंट मिली पाँखों की।नव पंख लगा उड़तीसपनों के नभ में,प्रियतम से मैं जुड़ती।तारक-चूनर ओढ़ी,रजनी की मोहक,चल दी साजन-ड्योढ़ी।बादल नभ में छाये,ढ़क लें चंदा को,फिर झट मुँह दिखलाये।आँख मिचौली करता,चन्द्र लगे ज्यों पिय,प्रेम-ठिठौली करता।सूनी जी...
भावना  तिवारी
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कुड़िये कर कुड़माई,बहना चाहे हैं,प्यारी सी भौजाई।धो आ मुख को पहले,बीच तलैया में,फिर जो मन में कहले।।गोरी चल लुधियाना,मौज मनाएँगे,होटल में खा खाना।नखरे भारी मेरे,रे बिक जाएँगे,कपड़े लत्ते तेरे।।ले जाऊँ अमृतसर,सैर कराऊँगा,बग्गी में बैठा कर।तुम तो छेड़ो कुड़ियाँ,पंछी बिणजा...
 पोस्ट लेवल : माहिया Basudeo Agarwal
Basudeo Agarwal
182
चूड़ी की खन खन में,सावन आया है,प्रियतम ही तन-मन में।झूला झूलें सखियाँ,याद दिलाएं ये,गाँवों की वे बगियाँ।गलियों से बचपन की,सावन आ, खोया,चाहत में साजन की।आँख-मिचौली करता।चंदा बादल से,दृश्य हृदय ये हरता।छत से उतरा सावन,याद लिये पिय की,मन-आंगन हरषावन।मोर पपीहा की धुन,सा...
Basudeo Agarwal
182
कुड़िये कर कुड़माई,बहना चाहे हैं,प्यारी सी भौजाई।धो आ मुख को पहले,बीच तलैया में,फिर जो मन में कहले।।गोरी चल लुधियाना,मौज मनाएँगे,होटल में खा खाना।नखरे भारी मेरे,रे बिक जाएँगे,कपड़े लत्ते तेरे।।ले जाऊँ अमृतसर,सैर कराऊँगा,बग्गी में बैठा कर।तुम तो छेड़ो कुड़ियाँ,पंछी बिणजा...
sanjiv verma salil
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त्रिपदियाँ *हर मंच अखाडा है लड़ने की कला गायब माहौल बिगाड़ा है. *सपनों की होली में हैं रंग अनूठे ही सांसों की झोली में.*भावी जीवन के ख्वाब बिटिया ने देखे हैं महके हैं सुर्ख गुलाब *चूनर ओढ़ी है लालसपने साकार हुए फिर गाल...
sanjiv verma salil
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चन्द माहिया सावन केआनंद पाठक *सावन की घटा कालीयाद दिलाती हैवो शाम जो मतवाली*सावन के वो झूलेझूले थे हम तुम कैसे कोई भूले*सावन की फुहारों सेजलता है तन-मनजैसे अंगारों से*आएगी कब गोरी?पूछ रही मुझ सेमन्दिर की बँधी डोरी*क्या जानू किस कारन?सावन भी बीता आए न...
सुबोध  श्रीवास्तव
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चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार(एक)पक्के ही वादों सेहार सदा हारीमज़बूत इरादों से । (दो)मौसम है हरजाईबरखा की चाहतसूरज ले अँगड़ाई ।(तीन)क़िस्मत के क़िस्से हैं-फूल उन्हें,काँटे -सब अपने हिस्से हैं ।(चार)हर मुश्किल पार गएपर अपने दिल केआगे हम हार गए ।(पाँच)समझो हर चा...
 पोस्ट लेवल : माहिया
sanjiv verma salil
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माहियाप्राण शर्मा         -------क्या तुमको भाती हूँ जुड़े में अपने जब फूल सजाती हूँ +नित मांग सजाती हूँ सच बतलाना तुम क्या तुमको भाती हूँ +जगमग सा करता है तन पे तुम्हारे प्रिये हर फूल न...