अल्फ़ाज़ है कुछ माज़ी के दिल कभी भूलता ही नहींनये-पुराने घाव भर गए सारे  दर्द-ओ-ग़म राह ढूँढ़ता ही नहीं। उम्र भर साथ चलने का वादा है अभी से लड़खड़ा गए हो क्यों ?प्यास बुझती कहां है इश्क़ में साहिल पे आज आ गए हो क्यों ?गर  न  हों&nbsp...