ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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             इस दुनिया में हमारा आना अपने माता-पिता के कारण होता है और उनसे जुडे अन्य दूसरे रिश्ते स्वतः हमारे साथ भी जुड जाते हैं, वे हमें अच्छे लगें या नहीं ये अलग बात है किंतु हमें उन्हें अनिवार्य रुप से जीवन भर...
सुशील बाकलीवाल
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       फेसबुक की उपयोगिता व इसका खुमार सामान्यजन के जीवन में जिस तेजी से फैल रहा है चलते-फिरते इंटरनेट युक्त स्मार्फोन के इस युग में ये किसी से छुपा नहीं है । नित नए मित्रों को बढाते चले जाने वाले इन मित्रों में कौन किस प्रवृत्ति और नियत से हमसे...
sanjiv verma salil
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दोहानिधि जीवन की मित्रता, करे सुखी-संपन्नमित्र न जिसको मिल सके, उस सा कौन विपन्न.http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : mitrata doha दोहा मित्रता
Bhavna  Pathak
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                 आज जब रिचा दिल्ली से चंडीगढ़ वापस लौट रही थी तो मन बहुत हल्का था। तमाम संदेहों दुश्चिंताओं की बदली छंट चुकी थी। उसे अपने पर हंसी आ रही थी। वह अब तक एक रस्सी को सांप मान कर डर में जी रही थी। उसने तय किया...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दोस्त ! आपकी ज़िन्दगी ख़ुशियों  से रहे गुलज़ार राहें रौशन हों  सदा घर-आँगन रहे बहार। मनहर पयाम लाती  रहे  पवन बग़िया में क़ायम रहे फूल और माली-सी लगनसुदूर तक ग़मों का साया न हो साँस...
sanjiv verma salil
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मित्र दिवस *मित्र न पुस्तक से अधिक,बेहतर कोई मीत!.सुख-दुःख में दे-ले 'सलिल',मन जुड़ते नव रीत.*नहीं लौटता कल कभी,पले मित्रता आज.थाती बन कल तक पले,करे ह्रदय पर राज.*मौन-शोर की मित्रता, अजब न ऐसी अन्य. यह आ, वह जा मिल गले पालें प्रीत अनन्य.*तन-मन की तलवार है, मन है तन...
संतोष त्रिवेदी
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वे मित्र थे।अब नहीं रहे।पिछली रात जब हम सोए थे,सब कुछ ठीक-ठाक था।यह जानकर हमने इत्मीनान की नींद ली थी कि उनके फेसबुकी दिल में अपन महफूज हैं।सुबह उठे तो देखा;ठुकराए प्रेमी के गुलदस्ते की तरह अपन उनके फेसबुकी दरवाजे पर मुरझाए पड़े हैं।दरवाजा अंदर से कसकर बंद है।धूल झ...
PRABHAT KUMAR
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मित्रता 1. हे मित्र! कर्ण और दुर्योधन की मित्रता की बात करूँ या राम और लक्ष्मण की मित्रता की. सिनेमा में जय और वीरू की बात सुनोगे या देवदास और पारो की की. आज तुम्हें सच सुनाते है क्योंकि तुम मित्रता की ही बात किया करते हो.पगूगल साभार इस संसार में जब माँ के पेट...
 पोस्ट लेवल : मित्रता चिन्तन
संतोष त्रिवेदी
151
वे मित्र थे।अब नहीं रहे।पिछली रात जब हम सोए थे,सब कुछ ठीक-ठाक था।कुछ समय से हमें चकमक पत्थर रगड़कर सोने की आदत थी, हमने उसे रगड़ा, अलार्म सेट किया और यह जानकर इत्मीनान की नींद ली कि अपन उनके फेसबुकी दिल में महफूज हैं।सुबह उठे तो देखा कि ठुकराए प्रेमी के गुलदस्ते की...
सुशील बाकलीवाल
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            1.   जो आपसे दिल से बात करता है, उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना ।            2.  एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है पर 50 साल तक...