ब्लॉगसेतु

Bhavna  Pathak
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    सुननेवालों को वही कहानी बांधे रहती है जिसमें कदम कदम पर चौंकानेवाले मोड़ आते है। हर समय यह धुकधकी बनी रहती है कि पता नहीं अब आगे क्या होता है। श्रोता जो सोच भी नहीं पाता वैसी घटना अचानक घट जाती है। जब उसे लगता है कि हां अब आगे सब ठीकठाक चलेगा तभी कोई...
विजय राजबली माथुर
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हम लेकर रहेंगे आजादी ।सीतामढी मे खेत मजदूर यूनीयन को समबोधीत करते जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष साथी कन्हैया और हम । आने वाले दिनों में हम हिन्दुस्तान की सरज़मी से संघ का खात्मा कर देंगे । सीतामढ़ी में उमड़ी भीड़ यह बता रही थी कि हिन्दुस्तान को किसी भी...
राजीव कुमार झा
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रोना मनुष्य को प्रकृति की ओर से मिला एक जन्मजात तोहफ़ा है,क्योंकि इस दुनियां में प्रवेश करते ही मनुष्य का पहला काम होता है रोना.शिशु का क्रंदन सुनकर ही जच्चाखाने के बाहर प्रतीक्षारत सगे-संबंधी समझते हैं कि बच्चा इस दुनियां में आ गया.उसके बाद आदमी न जाने कितनी बार रो...
राजीव कुमार झा
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हमारे वेद,पुराण और उपनिषद कथाओं के अनंत स्रोत हैं.इन कथाओं में तत्कालीन समाज,सभ्यता,संस्कृति का ही वर्णन नहीं मिलता बल्कि कई सीख भी दे जाती हैं.जितना उनमें गहरे पैठें,उतने ही ज्ञान की प्राप्ति.विद्वता,ज्ञान,तप,योग आदि के अहंकार और फिर इससे पतन के गर्त में जाने की अ...
निहार ranjan
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(कोसी के धार-कछार के मध्य गामवाली की धरती) इब्तिदा चचा ग़ालिब के इस शेर से -लिखता है 'असद' सोज़िशे दिल से सुखन-ऐ-गर्म  ता रख ना सके कोई मेरे हर्फ़ पर अंगुश्त [अपने ह्रदय ताप से 'असद' इतने दहकते शेर लिखता है  ताकि उन शब्दों पर कोई उंगुलियां न उठा...
निहार ranjan
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फैला के अपना दामन ड्योढ़ी के मुहाने पर बैठ जाती है हर रोज़ मेरे आमद की आस लिए अपने तनय की पदचाप सुनने कहती हवाओं से जल्दी पश्चिम से आ जाओ खबर कोई ख़ास लिए हवाओं से ही चुम्बन दे जाती है मुझेमाँ बुलाती है मुझे  स्मृति में समायी शैशव की हर छोटी बातें वो कुल्फी वा...