ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
16
सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार।मीना कुमारी (1 अगस्त, 1933 - 31 मार्च, 1972) भारत की एक मशहूर अभिनेत्री थीं। इन्हें खासकर दुखांत फ़िल्म में उनकी यादगार भूमिकाओं के लिये याद किया जाता है।1952 में प्रदर्शित हुई फिल्म बैजू बावरा से वे काफी वे काफी मशहूर हुईं।मीना कुमारी...
अनंत विजय
56
मीना कुमारी भारतीय फिल्मी दुनिया में एक ऐसा नाम है जिनकी जिंदगी के अनगिनत किस्से जुड़े हैं । उनके बचपन, उनकी किशोरावस्था से लेकर जवानी और फिर मौत तक । साठ के दशक में बॉलीवुड पर मीना कुमारी का राज चलता था । उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाती थी । उसी तरह उनके अफ...
शिवम् मिश्रा
16
सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। मीना कुमारी (1 अगस्त, 1933 - 31 मार्च, 1972) भारत की एक मशहूर अभिनेत्री थीं। इन्हें खासकर दुखांत फ़िल्म में उनकी यादगार भूमिकाओं के लिये याद किया जाता है।1952 में प्रदर्शित हुई फिल्म बैजू बावरा से वे काफी वे काफी मशहूर हुईं।मीना...
Yashoda Agrawal
233
आज मीना कुमारी जी की पिच्चासवीं जयन्तीउनको शत-शत नमन'तुम क्या करोगे सुनकर मुझसे मेरी कहानी,बे लुत्फ जिंदगी के किस्से हैं फीके-फीके'एक छोटा सा ज़िक्र फिर एक गीतबॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी की आज 85वीं जयंती मनाई जा रही है. वह फिल्मी दुनिया में मीना कुमारी के...
 पोस्ट लेवल : जन्म दिन मीना कुमारी
विजय राजबली माथुर
75
इकबाल रिजवी अपने वक्त की बेहद खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन रूपहले पर्दे पर निभाए अपने किरदारों की बदौलत वो हमेशा जिंदा रहेंगी। उनका जीवन का ज्यादातर हिस्सा रहस्य के साए में घिरा रहा। उनकी अभिनेत्री बेटी मुनमुन सेन और...
शिवम् मिश्रा
16
नमस्कार दोस्तों, आज मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारीकी पुण्यतिथि है. आज ही के दिन 31 मार्च 1972 को उनका निधन हो गया था. उनका जन्म 1 अगस्त 1932 को मुंबई के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. उनके पिता अलीबख़्श एक पारसी थिएटर में काम करते थे...
Bharat Tiwari
27
शराब की कुछ घूंट गले के नीचे उतर जाने दो (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); मीना कुमारी ने हिन्दी सिनेमा में जिस मुकाम को हासिल किया वो आज भी अस्पर्शनीय है.थका थका सा बदन,आह! रूह बोझिल बोझिल,कहाँ पे हाथ से,कुछ छूट गया याद नहीं....आज उ...
 पोस्ट लेवल : Meena Kumari ख़बर. मीना कुमारी News
अनंत विजय
56
कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो काल से होड़ लेती हुई कालजयी हो जाती हैं । ऐसी ही एक फिल्म है ‘पाकीज़ा’ । आज से करीब साठ साल पहले यानि सत्रह जनवरी 1957 में एक फिल्म का मुहूरत हुआ था और मुहूरत के पंद्रह साल बाद 4 फरवरी 1972 में ये फिल्म रिलीज हो पाई । यह एक ऐसी ऐतिहासिक...
Yashoda Agrawal
3
जलती-बुझती-सी रोशनी के परेहमने एक रात ऐसे पाई थीरूह को दांत से जिसने काटा थाजिस्म से प्यार करने आई थी जिसकी भींची हुई हथेली से सारे आतिश फशां उबल उट्ठेजिसके होंठों की सुर्खी छूते हीआग-सी तमाम जंगलों में लगी  आग माथे पे चुटकी भरके रखीखून की ज्यों बिंद...
Yashoda Agrawal
3
 चांद तनहा है आसमां तन्हादिल मिला है कहां-कहां तनहाबुझ गई आस, छुप गया ताराथरथराता रहा धुआं तन्हा  जिंदगी क्या इसी को कहते हैंजिस्म तन्हा है और जां तन्हाहमसफर कोई गर मिले भी कहींदोनों चलते रहे यहां तन्हाजलती-बुझती-सी रौशनी के परेसिमटा-सिमटा सा इक मकां तन्ह...