ब्लॉगसेतु

कुमार मुकुल
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लेखक की राजनीतिक दृष्टि साफ होनी चाहिए वरिष्‍ठ कवि विजेंद्र से कवि, पत्रकार कुमार मुकुल कीबात-चीत-राष्‍ट्रकवि और जनकवि जैसे संबोधन को आप किस तरह देखते हैं। हाल के दशकों में ना कोई राष्‍ट्रकवि कहलाया ना जनकवि। जबकि राष्‍ट्र और जन दोनों विकसित हुए हैं ? राष्ट्र कवि औ...
कुमार मुकुल
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'चिराग-ए-दैर (मंदिर का दीया)' मिर्जा गालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग-ए-दैर की कविताओं से गुजरते लगता है जैसे बनारस ने गालिब को भी अपने रंग में रंग दिया था - 'बैठकर काशी में / अपना भूल काशाना (छोटा सा...
 पोस्ट लेवल : गालिब कुमार मुकुल
कुमार मुकुल
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तो भैया अब और कितना डिजि टल-मल विकास चाहते हैं। धरती पर 'स्‍वच्‍छ भारत' चलाते-चलाते हमने अंतरिक्ष में कचरा फैलाने की क्षमता हासिल कर ली है। मिशन शक्ति पर नासा का प्रहार अमेरिकी दुष्‍प्रचार और प्रोपे गैंडा है। भाई यह अमेरिकी गैंडा तो बड़ा खतरनाक लग रहा। अब अपने मो...
 पोस्ट लेवल : व्‍यंग्‍य-मुकुल
कुमार मुकुल
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जहाँ हर चौक चौराहे परराजनीतिक हुंडारअपनी रक्तस्लथ दाढ़लोकतंत्र की राख सेचमकाते फिर रहेकोई पांव-पैदल चल रहाजन-गण-मन की धुन पर'ज्यां द्रेज'दो शब्दों का तुम्हारा नाममेरी समझ में नहीं आतापर  तुम्हारी सायकिल की टुन-टुनसुन पा रहा मैंजैसे  गांधी की आदमकद हरकतों क...
कुमार मुकुल
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क्‍या पाकिस्‍तान शेर है ? नहीं जी, गीदड़ है। पर चुनाव तक उसे शेर मानने में अपुन के बाप का क्‍या जाता है। इसी तरह चुनाव में अपुन सवा सेर साबित हो जाएंगे! फिर इन गीदडों को कौन पूछेगा ? ये सीमा पर फूं फां करते रहेंगे लोहा लेने को अपने जवान हैं इतने, हम उनकी शहादत क...
कुमार मुकुल
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युवाल नोआ हरारी की विश्‍वप्रसिद्ध पुस्‍तक 'सेपियन्‍स' का अनुवाद अब हिंदी में उपलब्‍ध है। सेपियन्‍स रोचक ढंग से 'मानव जाति का संक्षिप्‍त इतिहास' हमारे सामने रखती है। पुस्‍तक इस माने में अनोखी है कि मानव जाति के पूरे वैज्ञानिक विकास क्रम को सामने रखते हुए यह हमें आ...
कुमार मुकुल
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नित्यानंद जब मिलते हैं तो लगातार बोलते हैं, तब मुझे अपने पुराने दिन याद आते हैं। कवियों की बातें , 'कांट का भी दिमाग' खा डालने वालीं। नित्यानंद की कविताएं रोमान से भरी होकर भी राजनीतिक विवेक को दर्शाती हैं। एक बार बातचीत में आलोकधन्वा ने कहा था - लोग नहीं जानते...
कुमार मुकुल
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चित्रकार बनने की आकांक्षा वॉन गॉग में शुरू से थी। गरीबी और अपमान में मृत्यु को प्राप्त होनेवाले महान चित्राकार रैम्ब्रां बहुत पसंद थे विन्सेन्ट को और उसका अंत भी रैम्ब्रां की तरह हुआ और दुनिया के कुछ महान लोगों की तरह उसकी पहचान भी मृत्यु के बाद हुई। जीते जी तो...
कुमार मुकुल
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Thursday, 22 March 2012  लगाएक पूरी नदी उछल कर मुझे डुबो देगीपर मुझे डर न थामारे जाने की सदियों की धमकियों के बीचमन ठहरा था आज     -  वर्तिका नंदास्त्री विमर्श के इस युग में जहां देह की मुक्ति से लेकर उनकी आर्थिक मुक्ति तक की बातें होती र...
 पोस्ट लेवल : कुमार मुकुल स्त्री women
कुमार मुकुल
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 हिंसा और अहिंसा क्या हैजीवन से बढ़ हिंसा क्या है - केदारनाथ अग्रवालउपरोक्‍त पंक्तियां स्‍पष्‍ट करती हैं कि हिंसा और अहिंसा अपने आप में कुछ नहीं हैं। उनके परिपेक्ष्‍य ही उनकी सकारात्‍मकता या नकारात्‍मकता को दर्शाते हैं। भूखा व्‍यक्त्‍िा अगर हिंसा करता है तो उस...