ब्लॉगसेतु

कुमार मुकुल
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''मौत ने बनाया मुझसे फरेब का कोई रिश्‍ता'' जैसी पंक्ति‍यां लिखने वाले अग्रज कवि पंकज सिंह जैसे जानते थे मृत्‍यु को, कि कैसे 'मृत्‍यु अपना चेहरा छिपाये आती है। अपनी प्रिय चरागाहों में'। इसलिए हीमोफिलिया और हृदय रोग के घेरे में रहकर भी हर पल को वो जिन्‍दादिली से...
कुमार मुकुल
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कैंसर सर्वाइवर सोनू पर लिखी किताब की भूमिकाकुमार मुकुल से मेरी मुलाकात कविता के पुल पर हुई थी जिसे हम दोनों ने मिलकर बनाया था - पटना के सीटीओ के प्रेस रूम में, पत्रकार मित्र प्रियरंजन भारती की पहल पर । मैंने एक ग़़ज़़ल के कुछ अशआर सुनाए थे और मुकुल जी ने पहाड़ शीर्...
कुमार मुकुल
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 निराला के एक छोर पर शमशेर दूसरे पर नागार्जुन हैं। (दैनिक पाटलीपुत्र टाइम्‍स, पटना - 1995)क्‍या कविता केंद्र में वापस आ रही है और उसका उन्‍नयन हो रहा ?उन्‍नायक से ज्‍यादा जो कविता के नायक हैं वही ऐसा कहते हैं। अशोक वाजपेयी, कमलेश्‍वर ऐसे ही नायक हैं। कव‍िता क...
कुमार मुकुल
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विडंबना-बोध को ऐसे यथार्थवादी ढंग से अभिव्यक्त करना कि वह रूढि़यों की मिट्टी पलीद कर दे, विष्‍णु नागर की रचनाओं की खासियत है। हिंदी में यह बात नागार्जुन के यहाँ और ज्यादा सादगी के साथ केदारनाथ अग्रवाल के यहाँ दिखती है। ऐसे में जब कवि ईश्वर से जुड़ी नई रूढि़याँ पैदा...
कुमार मुकुल
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रोजाना ना जाने कितनी कितनी बार उसकी धज्जियां सरेआम व सरेशाम उड़ायी जाती हैं पर धज्जियों का यह बादशाह कभी हार नहीं मानता। रावण के सिर की तरह उसकी धज्जि‍यां हमेशा उग-उग आती हैं। रक्‍तबीज की तरह अपनी हर बूंद से वह बहुगुणित होता जाता है। उसकी धज्जियां उडाकर सब प्र...
 पोस्ट लेवल : व्‍यंग्‍य-मुकुल
कुमार मुकुल
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1.बचपन में अंग्रेजी के शिक्षक पिता की टेबल पर जिन किताबों से मेरा साबका पडता था उनमें शेक्‍सपीयर के कम्‍पलीट वर्क्‍स के अलावे दिनकर की कविताओं का संकलन 'चक्रवाल', मुक्तिबोध की 'भूरी-भूरी खाक धूल' के अलावा नामवर सिंह की 'दूसरी परंपरा की खोज'  और 'कवि...
कुमार मुकुल
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 गजानन माधव मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन और त्रिलोचन के बाद जिन कवियों ने हिन्‍दी में नयी जमीन तोडी है उनमें रघुवीर सहाय, केदारनाथ सिंह और कुंअर नारायण प्रमुख हैं। इनमें रघुवीर सहाय जहां इस जनतंत्र में तंत्र की भूमिका को आलोचनात्‍म...
कुमार मुकुल
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लेखक की राजनीतिक दृष्टि साफ होनी चाहिए वरिष्‍ठ कवि विजेंद्र से कवि, पत्रकार कुमार मुकुल कीबात-चीत-राष्‍ट्रकवि और जनकवि जैसे संबोधन को आप किस तरह देखते हैं। हाल के दशकों में ना कोई राष्‍ट्रकवि कहलाया ना जनकवि। जबकि राष्‍ट्र और जन दोनों विकसित हुए हैं ? राष्ट्र कवि औ...
कुमार मुकुल
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'चिराग-ए-दैर (मंदिर का दीया)' मिर्जा गालिब की बनारस पर केंद्रित कविताओं का संकलन है जिसका मूल फारसी से सादिक ने अनुवाद किया है। चिराग-ए-दैर की कविताओं से गुजरते लगता है जैसे बनारस ने गालिब को भी अपने रंग में रंग दिया था - 'बैठकर काशी में / अपना भूल काशाना (छोटा सा...
 पोस्ट लेवल : गालिब कुमार मुकुल
कुमार मुकुल
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तो भैया अब और कितना डिजि टल-मल विकास चाहते हैं। धरती पर 'स्‍वच्‍छ भारत' चलाते-चलाते हमने अंतरिक्ष में कचरा फैलाने की क्षमता हासिल कर ली है। मिशन शक्ति पर नासा का प्रहार अमेरिकी दुष्‍प्रचार और प्रोपे गैंडा है। भाई यह अमेरिकी गैंडा तो बड़ा खतरनाक लग रहा। अब अपने मो...
 पोस्ट लेवल : व्‍यंग्‍य-मुकुल