ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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तेज धड़कनों का सचसमय के साथ बदल जाता हैकभी देखते हीया स्पर्श भर सेस्वमेव तेज रुधिर धारबता देती थीहृदय के अलिंद निलय के बीचलाल-श्वेत रक्त कोशिकाएं भीकरने लगती थी प्रेमालापवजह होती थीं 'तुम'इन दिनों उम्र के साथधड़कनों ने फिर सेशुरू की है तेज़ी दिखानीवजह बेशकदिल द मामला...
Bharat Tiwari
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लप्रेक – है क्या यह? पढ़िए मुकेश कुमार सिन्हा की तीन लघु प्रेम कहानियाँउम्मीद शायद सतरंगी या लाल फ्रॉक के साथ, वैसे रंग के ही फीते से गुंथी लड़की की मुस्कुराहटों को देख कर मर मिटना या इंद्रधनुषी खुशियों की थी, जो स्मृतियों में एकदम से कुलबुलाई।मॉनसूनमेघों को भी...
रेखा श्रीवास्तव
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माँ कौन होती है , एक वह जो जन्म देती है देवकी और दूसरी वो  यशोदा जो परिस्थितिवश संरक्षण देकर पालती है या फिर अपना सानिंध्य देती है।  लेकिन हम किसे कितना मान देते हैं ये हमारे दिल की बात होती है की किसकी कितनी छवि जीवन भर मनो मष्तिष्क पर अंकित  रहती ह...
 पोस्ट लेवल : मुकेश कुमार सिन्हा
अर्चना चावजी
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यहाँ आपको मिलेंगी सिर्फ़ अपनों की तस्वीरें जिन्हें आप सँजोना चाहते हैं यादों में.... ऐसी पारिवारिक तस्वीरें जो आपको अपनों के और करीब लाएगी हमेशा...आप भी भेज सकते हैं आपके अपने बेटे/ बेटी /नाती/पोते के साथ आपकी तस्वीर मेरे मेल आई डी- archanachaoji@gma...
 पोस्ट लेवल : मुकेश कुमार सिन्हा
रेखा श्रीवास्तव
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           सबके अपने अपने  होते हैं  वे बड़े हों या फिर छोटे उन तक  न पहुँच पाने   का दर्द सभी को होता है .  उसकी कसक सपने जिसके  होते हैं उसको ही महसूस होती है। इस कड़ी में आज मुकेश कुमार सिन्हा...
Krishna Kumar Yadav
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ऐ नादान हसीनाक्यूं तेरा इठलानातेरा इतरानाऐसे लगता है जैसेबलखाती नदी कीहिलोंरे मरती लहरोंका ऊपर उठानाऔर फिर नीचे गिरनाक्यूं तुमफूलों से रंग चुरा करभागती हो शरमा करबलखा करक्यूँ तेरा हुश्नहोश उड़ाएफिर नजरो सेदिल में छा जायेक्यूं तेरे आनेकी एक आहटभर दे ख्यालो मेंसतरंगी...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती मुकेश कुमार सिन्हा जी की कविता 'प्यार, प्यार और प्यार'. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...न आसमान को मुट्ठी में,कैद करने की थी ख्वाइश,और न, चाँद-तारे तोड़ने की चाहत!कोशिश थी तो बस,इतना तो पता चले की,...