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sanjiv verma salil
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फागुन के मुक्तकसंजीव 'सलिल'*बसा है आपके ही दिल में प्रिय कब से हमारा दिल.बनाया उसको माशूका जो बिल देने के है काबिल..चढ़ायी भाँग करके स्वांग उससे गले मिल लेंगे-रहे अब तक न लेकिन अब रहेंगे हम तनिक गाफिल..*दिया होता नहीं तो दिया दिल का ही जला लेते.अगर सजती नहीं सजनी न...
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sanjiv verma salil
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मुक्तक*मन मंदिर में जो बसा, उसको भी पहचान.जग कहता भगवान पर वह भी है इंसान..जो खुद सब में देखता है ईश्वर का अंश-दाना है वह ही 'सलिल' शेष सभी नादान..*चित्र न जिसका गुप्त है, है नश्वर संसारचित्र गुप्त जिसका वही, सृष्टि रचे साकारकाया रच निज अंश को, रख करता जीवंत-कायस्थ...
 पोस्ट लेवल : मुक्तक
sanjiv verma salil
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मुक्तक'दिग्गी राजा' भटक रहा है, 'योगी' को सिंहासन अर्पणबैठ न गद्दी बिठलाता है, 'शाह' निराला करे समर्पणआ 'अखिलेश' बधाई दें, हँस कौतुक से देखा 'नरेंद्र' नेसाइकिल-पंजा-हाथी का मिल जनगण ने कर डाला तर्पण**http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : मुक्तक
sanjiv verma salil
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मुक्तक*मौन वह कहता जिसे आवाज कह पाती नहीं.क्या क्षितिज से उषा-संध्या मौन हो गाती नहीं.शोरगुल से शीघ्र ही मन ऊब जाता है 'सलिल'-निशा जो स्तब्ध हो तो क्या तुम्हें भाती नहीं?२१.३.२०१०*http://divyanarmada.blogspot.in/
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sanjiv verma salil
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मुक्तक  आईना*आईना देखने में लीन रही आई ना राह देख देख थके, ऐसी प्रीत भाई ना और जब आई बात हमको सुहाई ना संग ही ले आई घर छोड़ आई भाई ना *आईना किससे कहे अपने मन की पीर किसे देख कहिए धरे अपने मन में धीर आईना वह जो करे नित सोल...
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Basudeo Agarwal
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दोस्तो दिल का सदर घर का सदर होने को है,बा-बहर जो थी ग़ज़ल वह बे-बहर होने को है,हम मुहब्बत के असर में खूब पागल थे रहे,जिंदगी की असलियत का अब असर होने को है।(2122×3  212)*********उल्टे सीधे शब्द जोड़ कर, कुछ का कुछ लिख लेता हूँ,अंधों में काना राजा हूँ, मन मर्जी का...
Basudeo Agarwal
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शक्ति कलम की मत कम आँको, तख्त पलट ये देती है,क्रांति-ज्वाल इसकी समाज को, अपने में भर लेती है,मात्र खिलौना कलम न समझें, स्याही को छिटकाने का,लिखी इबारत इसकी मन में, नाव भाव की खेती है।(ताटंक छंद)*********कलम सुनाओ लिख कर ऐसा, और और सब लोग कहें,बार बार पढ़ कर के जिसको...
Basudeo Agarwal
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(करवाचौथ)त्योहार करवाचौथ का नारी का है प्यारा बड़ा,इक चाँद दूजे चाँद को है देखने छत पे खड़ा,लम्बी उमर इक चाँद माँगे वास्ते उस चाँद के,जो चाँद उसकी जिंदगी के आसमाँ में है जड़ा।(2212*4)*********(होली)हर तरु में छाया बसन्त ज्यों, जीवन में नित रहे बहार,होली के रंगों की जै...
Basudeo Agarwal
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आओ करें प्रण और अब आतंक को सहना नहीं,अब मौन ज्यादा और हम सब को कभी रहना नहीं,आतंक में डर डर के जीना भी भला क्या ज़िंदगी,अब कर दिखाना कुछ हमें बस सिर्फ कुछ कहना नहीं।(2212×4)*********किस अभागी शाख का लो एक पत्ता झर गया फिर,आसमां से एक तारा टूट कर के है गिरा फिर,सरहदो...
sanjiv verma salil
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मुक्तकसंजीव*नया हो या पुराना कुछ सुहाना ढूँढता हूँ मैंकहीं भी हो ख़ुशी का ही खज़ाना ढूँढता हूँ मैंनिगाहों को न भटकाओ कहा था शिष्य से गुरुने-मिलाऊँ जिससे हँस नज़रें निशाना ढूँढता हूँ मैं*चुना जबसे गया मौके भुनाना सीखता हूँ मैंदेखकर आईना खुद पर हमेशा रीझता हूँ मैंये संस...
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