जिन्दगीविवसता में  हाथ  कैसे  मल रही  है जिन्दगीमनुज से ही मनुजता को छल रही है जिन्दगीएक  छोटे  से  वतन  के  सत्य  में आभाव मेंरास्ते की पटरियों  पर  पल  रही  है जिन्दगी//0//फूल  है  जि...
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