ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
6
मुक्तिका:मन में यही...संजीव 'सलिल'*मन में यही मलाल है.आदम हुआ दलाल है..लेन-देन ही सभ्यताऊँच-नीच जंजाल हैफतवा औ' उपदेश भीनिहित स्वार्थ की चाल है..फर्ज़ भुला हक माँगतापढ़ा-लिखा कंगाल है..राजनीति के वाद्य परगाना बिन सुर-ताल है.बहा पसीना जो मिलेरोटी वही हलाल है..दिल से...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
sanjiv verma salil
6
हिंदी ग़ज़ल / मुक्तिका[रौद्राक जातीय, मोहन छंद, ५,६,६,६]*''दिलों के / मेल कहाँ / रोज़-रोज़ / होते हैं''मिलन के / ख़्वाब हसीं / हमीं रोज़ / बोते हैं*बदन को / देख-देख / हो गये फि/दा लेकिनन मन को / देख सके / सोच रोज़ / रोते हैं*न पढ़ अधि/क, ले समझ/-सोच कभी /तो थोड़ाना समझ /...
sanjiv verma salil
6
एक मुक्तिका:महापौराणिक जातीय, सुमेरु छंदविधान: १९ मात्रिक, यति १०-९, पदांत यगण*न जिंदा है; न मुर्दा अधमरी है.यहाँ जम्हूरियत गिरवी धरी है.*चली खोटी; हुई बाज़ार-बाहरवही मुद्रा हमेशा जो खरी है.*किये थे वायदे; जुमला बतातेदलों ने घास सत्ता की चरी है.*हरी थी टौरिया; कर नष...
sanjiv verma salil
6
हिंदी ग़ज़ल / मुक्तिका[रौद्राक जातीय, मोहन छंद, ५,६,६,६]*''दिलों के / मेल कहाँ / रोज़-रोज़ / होते हैं''मिलन के / ख़्वाब हसीं / हमीं रोज़ / बोते हैं*बदन को / देख-देख / हो गये फि/दा लेकिनन मन को / देख सके / सोच रोज़ / रोते हैं*न पढ़ अधि/क, ले समझ/-सोच कभी /तो थोड़ाना समझ /...
sanjiv verma salil
6
बुन्देली मुक्तिका:बखत बदल गओसंजीव*बखत बदल गओ, आँख चुरा रए।सगे पीठ में भोंक छुरा रए।।*लतियाउत तें कल लों जिनखोंबे नेतन सें हात जुरा रए।।*पाँव कबर मां लटकाए हैंकुर्सी पा खें चना मुरा रए।।*पान तमाखू गुटका खा खेंभरी जवानी गाल झुरा रए।।*झूठ प्रसंसा सुन जी हुमसेंसांच कई...
sanjiv verma salil
6
हलदूणवी मुक्तिका नवीन हलदूणवी*वसुआस्सां दा पाणी चुट्टी ,जुड़नीं के प्यारे दी घुट्टी lवेफ़ैदा फणसोइयै अप्पू ,कुनींह् भला ऐ वाज्जी लुट्टी lथ्होंग भला के चैन-तसल्ली ,दूए उप्पर चिक्कड़ सुट्टी lसिरैं पैरिया प्यूंद फल़ा दे ,होण लगी असली दी छुट्टी lमिल्लणसारी अज्ज गु...
sanjiv verma salil
6
मुक्तिकातू है शांत, चंचल है सलिलतू गगन है, ये अबाबील हैतू प्रताप है जो न हारतादुख पैरों पड़ा ज्यों भील हैतू रमा रमा में न पर रमासलिल तुझको अर्पित खील हैजुबां शीरी तेरी ये कह रहीकहीं और न ऐसा फील' हैतुझे देखकर मुझे यूँ लगातू ही कायदा है, तू शील हैमैं शरण में जिसकी ह...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
sanjiv verma salil
6
हास्य मुक्तिका:*हाय मल्लिका!, हाय बिपाशा!!हाउसफुल पिक्चर की आशा*तुम बिन बोलीवुड है सूनातुम हो गरमागरम तमाशा*तोला-माशा रूप तुम्हाराझीने कपड़े रत्ती-माशा*फ़िदा खुदा, इंसां, शैतां भीहाय! हाय!! क्या रूप तराशा?*गले लगाने ह्रदय मचलताआँख खुले तो मिले हताशा*मानें हार अप्सरा-...
 पोस्ट लेवल : हास्य मुक्तिका
sanjiv verma salil
6
मुक्तिका-*सवाल तुमने किये सौ बिना रुके यारांहमने चाहा मगर फिर भी जवाब हो न सके*हमें काँटों के बीच बागबां ने ठौर दियाखिले हम भी मगर गुल-ए-गुलाब हो न सके*नसीब बख्श दे फुटपाथ की शहंशाहीकिसी के दिल के कभी हम नवाब हो न सके*उठाये जाम जमाना मिला, है साकी भीबहा पसीना 'सलिल...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
sanjiv verma salil
6
मुक्तिका*उन्नीस मात्रिक महापौराणिक जातीय ग्रंथि छंदमापनी: २१२२ २१२२ २१२*खौलती खामोशियों कुछ तो कहोहोश खोते होश सी चुप क्यों रहो?*स्वप्न देखो तो करो साकार भीराह की बढ़ा नहीं चुप हो सहो*हौसलों के सौं नहीं मन मारनाहौसले सौ-सौ जियो, मत खो-ढहो*बैठ आधी रात संसद जागतीचैन क...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका