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sanjiv verma salil
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मुक्तिकासंजीव 'सलिल'*कद छोटा परछाईं बड़ी है.बेहद बेढब आई घड़ी है.चोर कर रहे चौकीदारीक्या कह दें रुसवाई बड़ी है.बीबी बैठी कोष सम्हालेखाली हाथों माई खड़ी है..खुद पर खर्च रहे हैं लाखोंभिक्षुक हेतु न पाई पड़ी है..'सलिल' सांस-सरहद पर चुप्पीमौत शीश पर आई-अड़ी है..३०-...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
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मुक्तिकासंजीव*मुझमें कितने 'मैं' बैठे हैं?, किससे आँख मिलाऊँ मैं?क्या जाने क्यों कब किस-किससे बरबस आँख चुराऊँ मैं??*खुद ही खुद में लीन हुआ 'मैं', तो 'पर' को देखे कैसे?बेपर की भरता उड़ान पर, पर को तौल न पाऊँ मैं.*बंद करूँ जब आँख, सामना तुमसे होता है तब हीकहीं न होकर...
 पोस्ट लेवल : मैं मुक्तिका
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मुक्तिका*अर्णव-अरुण का सम्मिलनजिस पल हुआ वह खास हैश्री वास्तव में है वहींजहँ हर हृदय में हुलास हैश्रद्धा जगत जननी उमाशंकारि शिव विश्वास हैसद्भाव सलिला है सुखदमालिन्य बस संत्रास हैमिल गैर से गंभीर रहअपनत्व में परिहास हैमिथिलेश तन नृप हो भलेमन जनक तो वनवास हैमीरा मनन...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
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मुक्तिका*सुधियाँ तुम्हारी जब तहेंअमृत-कलश तब हम गहेंश्रम दीप मंज़िल ज्योति होकोशिश शलभ हम मत दहेंबन स्नेह सलिला बिन रुकेनफरत मिटा बहते रहेंलें चूम सुमुखि कपोल जबसंयम किले पल में ढहेंकर काम सब निष्काम हमगीता न कहकर भी कहें*संजीव२६-३-२०२०९४२५१८३२४४http://divyanarmada...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका -Acharya Sanjiv Verma 'Salil'
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द्विपदी *कांत सफलता पाते तब ही, रहे कांति जब साथ सदामिले श्रेय जब भी जीवन में, कांता की जयकार लिखें*सुबह उषा का पीछा करता, फिर संध्या से आँख मिलारजनी के आँचल में छिपता, सूरज किससे करें गिला?*http://divyanarmada.blogspot.in/
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मुक्तिका*खर्चे अधिक आय है कम.दिल रोता आँखें हैं नम..*पाला शौक तमाखू का.बना मौत का फंदा यम्..*जो करता जग उजियाराउस दीपक के नीचे तम..*सीमाओं की फ़िक्र नहीं.ठोंक रहे संसद में ख़म..*जब पाया तो खुश न हुए.खोया तो करते क्यों गम?*टन-टन रुचे न मन्दिर की.रुचती कोठे की छम-छम.....
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मुक्तिका:                                          &nbs...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका होली
sanjiv verma salil
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हाइकु मुक्तिकासंजीव*आया वसंत, / इन्द्रधनुषी हुए / दिशा-दिगंत..शोभा अनंत / हुए मोहित, सुर / मानव संत..**प्रीत के गीत / गुनगुनाती धूप / बनालो मीत.जलाते दिए / एक-दूजे के लिए / कामिनी-कंत..*पीताभी पर्ण / संभावित जननी / जैसे विवर्ण..हो हरियाली / मिलेगी खुशहाली / होगे श्...
 पोस्ट लेवल : हाइकु मुक्तिका
sanjiv verma salil
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मुक्तिकासंजीव*खर्चे अधिक आय है कम.दिल रोता आँखें हैं नम..पाला शौक तमाखू का.बना मौत का फंदा यम्..जो करता जग उजियाराउस दीपक के नीचे तम..सीमाओं की फ़िक्र नहीं.ठोंक रहे संसद में ख़म..जब पाया तो खुश न हुए.खोया तो करते क्यों गम?टन-टन रुचे न मन्दिर की.रुचती कोठे की छम-छम.....
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
sanjiv verma salil
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मुक्तिकाजो लिखा*जो लिखा, दिल से लिखा, जैसा दिखा, सच्चा लिखाकिये श्रद्धा सुमन अर्पित, फ़र्ज़ का चिट्ठा लिखासमय की सूखी नदी पर आँसुओं की अँगुलियों सेदिल ने बेहद बेदिली से, दर्द का किस्सा लिखाकौन आया-गया कब-क्यों?, क्या किसी को वास्ता?गाँव अपने, दाँव अपने, कुश्तियाँ-घिस...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका