ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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सॉनेटधीर धरकर•पीर सहिए, धीर धरिए।आह को भी वाह कहिए।बात मन में छिपा रहिए।।हवा के सँग मौन बहिए।।मधुर सुधियों सँग महकिए।स्नेहियों को चुप सुमिरिए।कहाँ क्या शुभ लेख तहिए।।दर्द हो बेदर्द सहिए।।श्वास इंजिन, आस पहिए।देह वाहन ठीक रखिए।बनें दिनकर, नहीं रुकिए।।असत् के आगे न झ...
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 मुक्तिका सुभद्रा *वीरों का कैसा हो बसंत तुमने हमको बतलाया था। बुंदेली मर्दानी का यश दस दिश में गुंजाया था।। 'बिखरे मोती', 'सीधे सादे चित्र', 'मुकुल' हैं कालजयी। 'उन्मादिनी', 'त्रिधारा' से सम्मान अपरिमित पाया था।। रामनाथ सिंह सुता, लक्ष्मण सिंह भार्या तेजस्व...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका सुभद्रा
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सॉनेटसदा सुहागिन•खिलती-हँसती सदा सुहागिन।प्रिय-बाहों में रहे चहकती।वर्षा-गर्मी हँसकर सहती।।करे मकां-घर सदा सुहागिन।।गमला; क्यारी या वन-उपवन।जड़ें जमा ले, नहीं भटकती।बाधाओं से नहीं अटकती।।कहीं न होती किंचित उन्मन।।दूर व्याधियाँ अगिन भगाती।अपनों को संबल दे-पाती।जीवट क...
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सॉनेटदयानन्द•शारद माँ के तप: पूत हे!करी दया आनंद  लुटाया।वेद-ज्ञान-पर्याय दूत हे!मिटा असत्य, सत्य बतलाया।।अंध-भक्ति का खंडन-मंडन। पार्थिव-पूजन को ठुकराया। सत्य-शक्ति का ले अवलंबन।। आडंबर को धूल मिलाया।। राजशक्ति से निर्भय जूझे। लोकशक्त...
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सॉनेट रस*रस गागर रीते फिर फिर भर।तरस न बरस सरस होकर मन।नीरस मत हो, हरष हुलस कर।।कलकल कर निर्झर सम हर जन।।दरस परस कर, उमग-उमगकर।रूपराशि लख, मादक चितवन।रसनिधि अक्षर नटवर-पथ पर।।हो रस लीन श्वास कर मधुबन।।जग रसखान मान, अँजुरी भर।नेह नर्मदा जल पी आत्मन!कर रस पान, प...
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मुण्डकोपनिषद १परा सत्य अव्यक्त जो, अपरा वह जो व्यक्त।ग्राह्य परा-अपरा, नहीं कहें किसी को त्यक्त।।परा पुरुष अपरा प्रकृति, दोनों भिन्न-अभिन्न।जो जाने वह लीन हो, अनजाना है खिन्न।। जो विदेह है देह में, उसे सकें हम जान।भव सागर अज्ञान है, अक्षर जो वह ज्ञान।। मन इंद्रिय अ...
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नवगीत *बदल गए रे दिन घूरे के कैक्टस दरवाज़े पर शोभित तुलसी चौरा घर से बाहर पिज्जा गटक रहे कान्हा जू माखन से दूरी जग जाहिर गौरैया कौए न बैठते दुर्दिन पनघट-कंगूरे के मत पाने चाहे जो बोलो मत पाकर निज पत्ते खोलो सरकारी संपत्ति बेच दो जनगण-मन में नफरत घोलो लड़ा-भिड़ा खेती...
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सॉनेटसुतवधु *सुतवधु आई, पर्व मन रहा।गूँज रही है शहनाई भी।ऋतु बसंत मनहर आई सी।। खुशियों का वातास तन रहा।। ऊषा प्रमुदित कर अगवानी।रश्मिरथी करता है स्वागत। नज़र उतारे विनत अनागत।।  शुभद सुखद हों मातु भवानी।।जाग्रत धूम्रित श्वास वेदिका।&nbs...
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'शाम हँसी पुरवाई में' विमोचन पर मुक्तिकाआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*शाम हँसी पुरवाई में। ऋतु 'बसंत' मनभाई में।।झूम उठा 'विश्वास' 'सलीम'।'विकल' 'नयन' अरुणाई में।।'दर्शन' कर 'संतोष' 'अमित'।  'सलिल' 'राज' तरुणाई में।।छंद-छंद 'अमरेंद्र' सरस्। 'प्...
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 दोहा मुक्तिकासंजीव * दोहा दर्पण में दिखे, साधो सच्चा रूप। पक्षपात करता नहीं, भिक्षुक हो या भूप।।*सार-सार को गह रखो, थोथा देना फेंक। मनुज स्वभाव सदा रखो, जैसे रखता सूप।।*प्यासा दर पर देखकर, द्वार न करना बंद। जल देने से कब करे, मना बताएँ कूप।। *बिसरा गौतम-सीख...