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sanjiv verma salil
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'शाम हँसी पुरवाई में' विमोचन पर मुक्तिकाआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*शाम हँसी पुरवाई में। ऋतु 'बसंत' मनभाई में।।झूम उठा 'विश्वास' 'सलीम'।'विकल' 'नयन' अरुणाई में।।'दर्शन' कर 'संतोष' 'अमित'।  'सलिल' 'राज' तरुणाई में।।छंद-छंद 'अमरेंद्र' सरस्। 'प्...
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 दोहा मुक्तिकासंजीव * दोहा दर्पण में दिखे, साधो सच्चा रूप। पक्षपात करता नहीं, भिक्षुक हो या भूप।।*सार-सार को गह रखो, थोथा देना फेंक। मनुज स्वभाव सदा रखो, जैसे रखता सूप।।*प्यासा दर पर देखकर, द्वार न करना बंद। जल देने से कब करे, मना बताएँ कूप।। *बिसरा गौतम-सीख...
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मुक्तिका * भय की नाम-पट्टिका पर, लिख दें साहस का नामकोशिश कभी न हारेगी, बाधा को दें पैगाम*राम-राम कह बिदराएँ, जप राम-राम भव पार लूटें-झपटें पा प्रसाद, हँस भक्त करें आराम *लेख समय का अजब गजब, है इंसानों की जात जाम खा रहे; पीते भी, करते...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
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मुक्तिका *जो है अपना, वही पराया है? १८  ठेंगा सबने हमें बताया है     १८ *वक्त पर याद किया शिद्दत से १७ बाद में झट हमें भुलाया है *पाक दामन जो कह रहा खुदको पंक में वह मिला नहाया है *जोड़ लीं दौलतें ज़माने ने अंत में सं...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
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 मुक्तिका: है यही वाजिब...संजीव 'सलिल'*है यही वाज़िब ज़माने में बशर ऐसे जिए।जिस तरह जीते दिवाली रात में नन्हे दिए।।रुख्सती में हाथ रीते ही रहेंगे जानतेफिर भी सब घपले-घुटाले कर रहे हैं किसलिए?घर में भी बेघर रहोगे, चैन पाओगे नहीं,आज यह, कल और कोई बाँह में गर चाह...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
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कार्यशाला मुक्तिका दिल लगाना सीखना है आपसे २१२२ २१२२ २१२*दिल लगाना सीखना है आपसेजी चुराना सीखना है आपसे *वायदे को आप जुमला कह गए आ, न आना सीखना है आपसे *आस मन में जगी लेकिन बैंक से नोट लाना सीखना है आपसे * बस गए मन में निकलते ही नहीं हक जमाना सीखना है आपसे *देशसेवा...
 पोस्ट लेवल : दिल मुक्तिका
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अभिनव प्रयोग त्रिपदिक मुक्तिका *निर्झर कलकल बहता किलकिल न करो मानव कहता, न तनिक सुनता। *नाहक ही सिर धुनता सच बात न कह मानव मिथ्या सपने बुनता। *जो सुन नहीं माना सच कल ने बतलाया जो आज नहीं गुनता। *जिसकी जैसी क्षमता वह लूट खा रहा है कह कैसे हो समता?*बढ़ता न कभी कमता बि...
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बृज मुक्तिका संजीव *जी भरिकै जुमलेबाजी कर नेता बनि कै लफ्फाजी कर *दूध-मलाई गटक; सटक लै मुट्ठी में मुल्ला-काजी कर *जनता कूँ आपस में लड़वा टी वी पै भाषणबाजी कर *अंडा शाकाहारी बतला मुर्ग-मुसल्लम को भाजी कर&nbs...
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बाल रचना बिटिया छोटी *फ़िक्र बड़ी पर बिटिया छोटी क्यों न खेलती कन्ना-गोटी?*ऐनक के चश्में से आँखें झाँकें लगतीं मोटी-मोटी *इतनी ज्यादा गुस्सा क्यों है?किसने की है हरकत खोटी *दो-दो फूल सजे हैं प्यारे सर पर सोहे सुंदर चोटी *हलुआ-प...
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 मुक्तिका:मुक्त कह रहे मगर गुलामतन से मन हो बैठा वामकर मेहनत बन जायेंगेतेरे सारे बिगड़े कामबद को अच्छा कह-करताजो वह हो जाता बदनामसदा न रहता कोई यहाँकिसका रहा हमेशा नाम?भले-बुरे की फ़िक्र नहींकरे कबीरा अपना कामबन संजीव, न हो निर्जीवसुबह, दुपहरी या हो शामखिला पंक...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका