ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
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वास्तविक जीवन और नाटकीय जीवन में मुखौटों का अलग महत्व है। अज्ञेय ने मुखौटों पर लिखा है कि असल जीवन में यह फरेब है, और नाटक में सच्चाई। रामलीला में अगर कुंभकर्ण का मुखौटा है तो वह कुंभकर्ण का ही पात्र है। जीवन में यह द्वैत है। अगर जीवन पर रंगमंच खेला जाए तो फिर से म...
जन्मेजय तिवारी
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                          उस दिन रात कुछ ज्यादा ही काली और डरावनी थी । झींगुर तक डर के मारे अपने वाद्य यंत्रों को समेट कर इधर-उधर छिप गए थे । कभी...
रणधीर सुमन
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 यूरोप के कई देश आई.एस.आई.एस. से कच्चा तेल खरीदते हैं अब इस बात में कोई संदेह नहीं है। यह बात स्वयं जना हाइबसकोवा ने स्वीकार किया है जो यूरोपियन यूनियन की इराक में अम्बेसडर हैं। उन्होंने यूरोपियन फारेन अफेयर्स कमेटी के सामने बोलते हुए कहा कि यूरोपियन यूनियन के...
रणधीर सुमन
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 जब 8 अप्रैल 2013 में आई.एस.आई.एस. (इस्लामिक स्टेट आफ सीरिया एंड इराक) के गठन का एलान हुआ तो दुनिया ने इसे भी पिछले 12 सालों से उस क्षेत्र में छोटे बड़े प्रतिक्रियावादी सशस्त्र संगठनों की तरह ही देखा, लेकिन जैसे ही 29 जून 2014 को आई.एस.आई.एस. प्रमुख अबू बकर अल...
केवल राम
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वैसे तो परम्पराओं के प्रति आकृष्ट होना कोई बुरी बात नहीं है, वह हमारे जीवन और आधार का हिस्सा हैं, हमें उनका निर्वाह करना चाहिए, लेकिन वक़्त और हालात को देखते हुए, उनकी प्रासंगिकता और व्यावहारिकता को देखते हुए. वर्ना हममें इतना भी साहस होना चाहिए कि हम उन पुरानी, अव्...
Sanjay Chourasia
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उस नव पल्लवित कोमल कोरे मन पर संस्कारों की कलम से पवित्र चरित्र की तस्वीर लिखी गयी और कहा गया यह मानव है !उस नवजात को लगा हर कोई यहाँ मानव है !पर जब वो आगे बढ़ा वह जिससे भी मिला जिससे भी जुड़ा उसमें खुद की तस्वीर को...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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दोस्तों, आज आपको एक हिंदी ब्लॉगर की कथनी और करनी के बारें में बता रहा हूँ. यह श्रीमान जी हिंदी को बहुत महत्व देते हैं. इनके दो ब्लॉग आज ब्लॉग जगत में काफी अच्छी साख रखते हैं. अपनी पोस्टों में हिंदी का पक्ष लेते हुए भी नजर आते हैं. लेकिन मैंने पिछले दिनों हिंदी प्रे...
ललित शर्मा
278
 मैं  एक बहुरुपिया हूँ क्षण - प्रतिक्षणमुखौटे बदल लेता हूँतू है तो तेरे जैसा मै हूँ तो मेरे जैसान जाने सुबह से शाम तककितने रूप बदलता हूँबेटा,पिता,पतिचाचा,ताऊ,मामा,आदि आदिआचार्य, कवि, चित्रकारउद्घोषक, संचालक आदि आदिकिसान,जवान,सियानमुर्ख, विद्वान्,बुद्...
ललित शर्मा
278
मै एक बहुरुपिया हौंक्षण - प्रतिक्षणमुखौटे बदल लेता हूँतू है तो तेरे जैसा मै हूँ तो मेरे जैसान जाने सुबह से शाम तककितने रूप बदल लेता हूँबेटा,पिता,पतिचहाचा,ताऊ,मामा,आदि आदिआचार्य, कवि, चित्रकारउद्घोषक, संचालक आदि आदिकिसान,जवान,सियानमुर्ख, विद्वान्,बुद्धिमान आदि आदिमि...
seema sachdeva
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खट्टी-मीठी यादों से मेरी बहुत सी यादें जुडी हैं , वो फिर कभी अवसर मिलते ही पोस्ट करुन्गी लेकिन पहले वो छोटी छोटी कहानियां/घटनाएं जिन्होंने मुझे लिखने पर मजबूर कर दिया मुखौटामेट्रिक पास , उम्र लगभग सोलह साल ,बातों में इतनी कुशल कि बड़े-बड़ों मात दे जाए , साँवला रंग...