ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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शिकवा करूँ न करूँ तुमसे शिकायत कोई, बिखर गया दर्द, दर्द का वह मंज़र लूट गया,  समय के सीने पर टांगती थी शिकायतों के बटन, राह ताकते-ताकते वह बटन टूट गया |मज़लूम हुई मासूम मोहब्बत ज़माने की,   भटक गयी राह अच्छे दिनों के दरश को तरस...
मधुलिका पटेल
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तुम मेरी नज़मो के मुसाफ़िर बन गए हो आते जाते चंद मुलाकात होती रहती है पर अब धीरे-धीरे तुमने उस ज़मी को हथिया लिया है और इक खूबसूरत सा मकानबना लिया है नज़मों की गलियों में जब तुम नहीं होते बहुत ख़ामोशी सी छाई रहती है लफ्जों के दरमियाँ अब नज़्म चाहती है तुम्हारी रौनके लगी...
शिवम् मिश्रा
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आदरणीय ब्लॉगरगण नमस्कारप्रस्तुत कर रहा हूँ  आज का बुलेटिन -मेरी नई कविता के साथ जिसका आधार या विषय जो भी आप कहिये है - एक मुसाफ़िर - जो निकल पड़ा है जीवन को खोजने | वैसे तो इस संसार में हम सभी एक मुसाफ़िर से ज्यादा कुछ नहीं हैं | हम संसार में आते हैं, घुमते फिरते...