ब्लॉगसेतु

गौतम  राजरिशी
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हावड़ा से आने वाली राजधानी एक्सप्रेस ग़ज़ब ही विलंब से चल रही थी | इस बार की आयी बाढ़ कहीं रस्ते में रेल की पटरियों को भी आशिंक रूप से डुबो रही थी तो इस रस्ते की कई ट्रेनें धीमी रफ़्तार में अपने गंतव्य तक पहुँचने में अतिरिक्त समय ले रही थीं | गया स्टेशन पर प्रतीक्षारत य...
गौतम  राजरिशी
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हमारी नयी किताब आयी है | कहानियों की पहली किताब | हिन्दी-साहित्य में सेना और सैनिक हमेशा से एक अछूता विषय रहा है | गिनी-चुनी कहानियाँ हैं सैन्य-जीवन पर...गिने-चुने उपन्यास हैं | एक अदनी सी कोशिश है उसी कमी को थोड़ा कम करने की | कुछ कहानियाँ आपलोग इस ब्लौग पर पहले ही...
सुशील बाकलीवाल
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             अगर आप डॉक्टर हैं और मुस्कराते हुए मरीज का इलाज करेंगे तो मरीज का आत्मविश्वास दोगुना हो जायेगा ।            जब आप मुस्कुराते हुए शाम को घ...
सुशील बाकलीवाल
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बेचारे मर्द...जन्म लेते है, तो बधाइयां माँ को मिलती है..।शादी होती है, तो तारीफ़ और उपहार दुल्हन को मिलते है......और जब मर जाते है, तो बीमा की रकम भी बीबी ले जाती है.......हद तो तब हो गयी जब एक आदमी ने सौ बार "रक्तदान" करके ‘रिकार्ड बनाया।मगर ब्लड बैंक वालो ने यह कह...
मधुलिका पटेल
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तुम आइ थी जब मेरी गोद में मुझे लगा एक परी छुपी हुइ थीजैसे बादलों की ओट में तुम्हारी शरारतें वो चंचलतातुम्हारा बचपन अभी बीता भी न था और भाग्य दे गया बहुत सी चुभनतुम में है अदभुत प्रतिभा तुम हो सुंदरता की प्रतिमा तुम्हारी ये सुइयों से दोस्तीत...
मधुलिका पटेल
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हालातों ने उसकी खुशी कोकही दफ़ना दियाउससे छीन कर उसकी मुस्कुराहट कोकहीं छिपा दियाचाहती थी वो सूरज की किरनों से पहलेदौड़ कर धरा को छू लूगुन-गुनी धूप सी गरमाइशहाथों में हुआ करती थीजाड़े में गुलमोहर के नीचेइंतज़ार खत्म होता थाऔर सर्द हवाओं मेंकाँपते उसके हाथ होते...