ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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आहत हुए अल्फ़ाज़ ज़माने की आब-ओ-हवा में,  लिपटते रहे  हाथों  में और  सीने में उतर गये, अल्फ़ाज़ में एक लफ़्ज़ था मुहब्बत, ज़ालिम ज़माना उसका साथ छोड़ गया,   मुक़द्दर से झगड़ता रहा ता-उम्र वह,  मक़ाम मानस अपना बदलता गया,&nbs...
PRABHAT KUMAR
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मुझे हर कहीं अगर उसका चेहरा नजर आए तोसमझो मैं बेपनाह मुहब्बत करता तो हूँ!अश्कों को भी कब निकलना मालूम है शायदमैं उसकी आँखों का अदब करता तो हूँ! हर सूरत में किसी मूरत की तरह वो खड़ी है वोजाग उसे देखने की कोशिश करता तो हूँ!..................शायद नहीं लिख पाऊँगा आगेक्...
anamika ghatak
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ख़्वाब तेरी किरचियाँ बन आँखों को अब चुभने लगीगम की आँधियाँ इस तरह ख्वाबों के धूल उड़ा गएमंज़िल पास थी रास्ता साफ था दो कदम डग भरने थेगलतफहमी की ऐसी हवा चली सारे रास्ते धुंधला गएबड़े शिद्दत से फूलों में बहार-ए-जोबन आयी थीवक्त के साथ मिरे गजरे के सारे फूल मुरझा...
Shahid Ajnabi
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देखा जाए तो हर दिन मुहब्बत का है, जिस दिन में मुहब्बत नहीं वो दिन कैसा ? शायद हम और आप ऐसी दुनिया की कल्पना भी नहीं कर सकते , जहाँ मुहब्बत न हो, प्यार न हो, अहसास न हों, संवेदनाएं न हों. और अगर एक दिन मुक़र्रर कर भी दिया प्यार के लिए तो ठीक सही. अगर एक ख़ास दिन के बह...
डॉ शिव राज  शर्मा
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मुहब्बत हो गयी की न थी सुकूँ खोना किसको पसंद है बड़ी कमी है प्यार की यहाँ सब के सब जरुरतमंद है मेरे प्यार की गहराई को गर समझना चाहता है वो कह दो  बाहों में आजाये वरना तो बस साँसे चंद है इत्तेफ़ाकन मिल गयी थी मेरी और उ...
भावना  तिवारी
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अगर तुमने मेरा प्यार सजाया होता अगर तुमने मुझे दिल से लगाया होता नूर बनके चमकता तेरी जिंदगी में तुम्हे काली रातों ने न सताया होतागर तुम्हे मेरी शाम से उल्फत होती या की मेरे नाम से मुहब्बत होती गीली रेत पर लिख कर के मेरा नाम कुछ सोच कर...
 पोस्ट लेवल : अगर मुहब्बत प्यार
डॉ शिव राज  शर्मा
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दिल की तमाम दूरियाँ मिटा दी उसने मेरी मुहब्बत इस तरह सजा दी उसने पाना उसको अब ज़रूरी है ही नहीं दीवानो सी हालात मेरी बना दी उसने ---शिवराज---
 पोस्ट लेवल : मुहब्बत दूरियाँ
PRABHAT KUMAR
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अब तक बातें मुहब्बत का करता आया हूँ इस रीत का उनसे बखान करता आया हूँ मिजाज़ लहरों से उनका  बदलता आया हूँ हर लम्हों को उनसे जोड़ता आया हूँ खुली जुल्फों में जब से उनको देखा मैं तब से बंसी प्रेम का बजाता आया हूँ जवन हवा में खुद को सं...
Manav Mehta
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इस हवा के बदन पर मैंने अपनी मुहब्बत का इत्र छिड़का है .... और भेजा है तेरी ओर बंद लिफ़ाफे में भर कर ..... जब मिल जाए तो इसको धीरे से खोलना महसूस करना मेरी वफ़ा को और भर लेना साँसों में अपनी .... नई सुबह फिर से नया पैगाम भेजूँगा .....
 पोस्ट लेवल : मुहब्बत का इत्र
निहार ranjan
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प्यार की वैज्ञानिक कवितास्मृति के चुम्बक परबारहा लौट आते हो लौह दिल के मालिक यास दिए जाते हो मन नाभिक के पास   इलेक्ट्रान बने घूमते हो आतंरिक कक्षा में बने ना समीप ना दूर होते हो क्यों मेरे ह्रदय कक्ष में असीर हुए जाते हो लौह दिल के मालिक त्रास दिए जाते ह...