ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
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खस्ता शेरों को देख उठे, कुछ सोते शेर हमारे भी ! सुनने वालों तक पंहुचेंगे, कुछ देसी बेर हमारे भी !पढ़ने लिखने का काम नहीं बेईमानों की बस्ती में !बाबा-गुंडों में स्पर्धा , घर में हों , कुबेर हमारे भी !चोट्टे बेईमान यहाँ आकर बाबा बन घर को लूट रहे जनता को समझाते हांफे,...
सतीश सक्सेना
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साधू सन्यासी हमारे , लार टपकाते दिखेंकौन आएगा नमन को ,मेरे हिंदुस्तान में ?धूर्तों ने धन कमाने , घर में, कांटे बो दिए !रोयेंगी अब पीढ़िया,परिवार पुनुरुत्थान में !कौम सारी हो चुकी बदनाम,बहते खून से ,कितनीं पीढ़ी बीत जायेंगीं इसी भुगतान में ! जाहिलों की बुद्धि, कै...
shashi purwar
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महामूर्ख सम्मेलन से लाइव -आज महामूर्ख सम्मलेन अपनी पराकाष्ठा पर था।  सम्मलेन में  मौजूद मूर्खो की संख्या देखकर हम सम्मेलन के मुरीद हो गए. हमें  एहसास हुआ कि हम मूर्खानगरी के नागरिक है , दुनिया ही मूर्खो की है तो हम कहाँ से पृथक हुए।&nb...
सतीश सक्सेना
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आज चौथा दिन है पारंपरिक भोजन का त्याग किये , रोटी , दाल , चावल, सब्जियां बंद किये हुए , और आश्चर्य है कि मन एक बार भी नहीं ललचाया और न भूख लगी न कमजोरी ...शायद इसलिए कि अपने आपको चार दिन पहले बे इंतिहा गालियाँ दी थीं , अपना वजन देखने के बाद अगर उस दिन मशीन न देखता...
सतीश सक्सेना
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आजकल एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक वृद्ध मां को उसका बेटा निर्दयता पूर्वक जमीन पर घसीटता हुआ ट्रेक्टर के आगे ले जा रहा है ताकि उसे कुचल कर मार सके और यह घटना महाराष्ट्र 21जून की है जहाँ राष्ट्र गौरव की बातें सबसे अधिक की जाती हैं !पिछले कुछ वर्षों में , हमारे...
सतीश सक्सेना
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वह दिन भूलीं कृशकाय बदन,अतृप्त भूख से , व्याकुल हो,  आयीं थीं , भूखी, प्यासी सी इक दिन इस द्वारे आकुल हो जिस दिन से तेरे पाँव पड़े  दुर्भाग्य युक्त इस आँगन में !अभिशप्त ह्रदय जाने कैसे ,भावना क्रूर इतनी मन में ,पीताम्बर प...
सतीश सक्सेना
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हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर, ढोर क्यों ?जाहिलों को मुग्ध करने को निरंतर शोर क्यों !अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए ये धूर्त मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में   रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मु...
सतीश सक्सेना
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अगर हार्ट अटैक एवं डायबिटीज से बचना चाहते हो तो पसीना निकलने तक की मेहनत करना सीखना होगा ! धन का उपयोग कर अपने शरीर को आराम देने वाले लोग जान लें कि अभी तक किसी भी खतरनाक बीमारी का, कोई भी इलाज नहीं जो पैसा देकर बीमारी ठीक कर, उम्र बढ़ा दे !अगर आप सीढियां चढ़ते समय अ...
सतीश सक्सेना
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हम मुफ्त में सूरज को भी अच्छा नहीं कहते !इस देश में अच्छे को ही,अच्छा नहीं कहते !बच्चों को भूल पर तो माफ़ कर ही दें ,मगर कम उम्र,नर पिशाच को ,बच्चा नहीं कहते !आधार हिल रहा यहाँ  , बचपन से ,नशे में !इस पाशविक प्रवृत्ति को,कच्चा नहीं कहते !उस...
सतीश सक्सेना
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सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !अगर कभी आ जाए ऊँट पहाड़ के नीचे   उंची गर्दन, तुरत झुकाये, चाल बदल ले !तीखी उनकी धार, नहीं दरबार सहेगा !चंवर बादशाही से...