ब्लॉगसेतु

Lokendra Singh
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मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम भारत की आत्मा हैं। राम भारतीय संस्कृति के भव्य-दिव्य मंदिर के न केवल चमकते शिखर हैं, अपितु वे वास्तव में उसके आधार भी हैं। इसलिए राम का जीवन उनके समय से लेकर आज तक प्रासंगिक है। उनका जीवन प्रकाश स्तम्भ की तरह है, जो अंधेरे में हमारा...
Lokendra Singh
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सक्रिय पत्रकारिता और उसके शिक्षण-प्रशिक्षण के सशक्त हस्ताक्षर प्रो. कमल दीक्षित की नयी पुस्तक ‘मूल्यानुगत मीडिया : संभावना और चुनौतियां’ ऐसे समय में आई है, जब मीडिया में मूल्यहीनता दिखाई पड़ रही है। मीडिया में मूल्यों और सिद्धांतों की बात तो सब कर रहे हैं, लेकिन उस...
अनीता सैनी
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एक नन्हा-सा पौधा तुलसी का, पनपा मेरे मन के एक कोने में, प्रार्थना-सा प्रति दिन लहराता, सुकोमल साँसों का करता दानसतत प्राणवायु बहाता आँगन में    संताप हरण करता हृदय का,   संतोष का सुखद एहसास सजा,  पीड़ा को पल में...
Lokendra Singh
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बैतूल में आरएसएस के समविचार संगठन 'विद्या भारती' द्वारा संचालित हॉस्पिटलप्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो संवाद ‘मन की बात’ में भगवान श्रीकृष्ण और महात्मा गांधी के जीवन का उल्लेख करते हुए सेवा को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। भारतीय परंपरा-सं...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
sanjiv verma salil
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लेख-लघुकथा: नव विधान और मूल्यआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*भारतीय लघुकथा का उद्गम व् उपयोगिता -भारतीय लघुकथा का उद्गम आदिवासियों में प्रचलित वाचिक लोक कथाओं में है। कालान्तर में यही तथा अन्य कथाएँ तत्कालीन भाषाओँ पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, संस्कृत आदि में कही-सुनी जाती रह...
kumarendra singh sengar
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जिस तरह एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह जीवन भी दो पहलुओं में सिमटा हुआ है. दुःख और सुख का, हँसी और आँसू का, ख़ुशी और गम का सह-सम्बन्ध जीवन में सहज ही देखने को मिलता है. जीवन जितना सहज, खुशनुमा, सुरमयी दिखाई देता है उतना ही क्रूर, जटिल, दुखद भी है. दुःख-सुख क...
राजीव कुमार झा
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दूर गगन का कोई अंत नहीं है मन प्रफुल्लित न हो तो बसंत नहीं है जीवन के सफ़र में कांटे भी मिलेंगेकुछ जख्मों से जीवन का अंत नहीं है मन के भावों को गर समझ पाए कोई गम एक भी हो तो खुशियाँ अनंत नहीं है टूटते हैं मूल्य स्वार्थ भरी दुनियां में क...
 पोस्ट लेवल : बसंत गगन मूल्य जीवन
Lokendra Singh
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 देश  के लगभग एक हजार केंद्रीय विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को संस्कृत और हिंदी में प्रार्थना कराई जाती हैं। वर्षों से यह प्रार्थनाएं हो रही हैं। परंतु, आज तक देश में कभी विद्यालयों में होने वाली प्रार्थनाओं पर विवाद नहीं हुआ। कभी किसी को ऐसा नह...
Kajal Kumar
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