ब्लॉगसेतु

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 महामृत्युंजय मंत्र  परम शक्ति के सामने, सारी दुनिया मौन। ईश्वर के सम दूसरा ,नहीं जगत में कौन।। रहते शिव के साथ में, नंदी भूत पिशाच।&nb...
kumarendra singh sengar
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परिवार में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने आपमें एक आधार स्तम्भ होते हैं. उनके न कहने के बाद भी वे किसी न किसी रूप में परिवार को एकसूत्र में जोड़े रखने का काम करते हैं. परिवार की मान-मर्यादा को, उसकी प्रतिष्ठा को, उसके वर्चस्व को ऐसे ही लोगों के द्वारा स्वतः ही स्थापना...
kumarendra singh sengar
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शासन-प्रशासन इस समय इस चिंता में हैं कि कैसे वाहन चालकों की जान बचाई जाये. ऐसा पढ़कर आपको आश्चर्य लगेगा. लगना भी चाहिए क्योंकि बात ही ऐसी है. पिछले दिनों वाहन सम्बन्धी अधिनियम में जबरदस्त बदलाव करते हुए जुर्माने को कई-कई गुना बढ़ाया गया. कई प्रदेशों से अचानक से बड़ी-ब...
kumarendra singh sengar
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क्या सपनों का कोई मतलब होता है? क्या देखे हुए सपनों में कोई सन्देश छिपा होता है या फिर ये अचेतन मन की प्रतिक्रिया होती है? सपने महज मन की स्थिति नहीं होती होगी क्योंकि जो कभी सोचा न जाये, जिसके बारे में कभी चर्चा न की जाये वह भी सपनों में दिखाई पड़ जाता है. क्या मान...
 पोस्ट लेवल : सपना मृत्यु अचेतन
kumarendra singh sengar
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इधर कई महीनों से कुछ लिखने का मन नहीं हो रहा है. ब्लॉग पर किसी तरह की बंदिश नहीं है इसलिए कुछ न कुछ थोडा बहुत लिख देते हैं. इसी न लिखने की मानसिकता के चलते न तो समाचार-पत्रों में कोई आलेख भेजा है और न ही किसी पत्रिका में. इस दौरान लगातार पढ़ना हो रहा है. आदत भी ऐसी...
kumarendra singh sengar
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"ज़िन्दगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ हैं जहाँपनाह" कुछ इसी तरह के संवाद हैं किसी फिल्म में. उसमें एक सीन में ही व्यक्ति को उसकी ज़िन्दगी और मौत के बारे में समझाने की कोशिश की गई है. ऐसे ही बहुत से सीन और गीत हैं जिनमें ज़िन्दगी और मौत को लेकर तमाम दार्शनिक बातें कही गई...
 पोस्ट लेवल : मृत्यु ज़िन्दगी
kumarendra singh sengar
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आत्महत्या एक ऐसा शब्द है जो सिवाय झकझोरने के और कोई भाव पैदा नहीं करता. यह महज एक शब्द नहीं बल्कि अनेकानेक उथल-पुथल भरी भावनाओं का, विचारों का समुच्चय है. यह शब्द मौत की सूचना देता है. किसी व्यक्ति के चले जाने की खबर देता है. सम्बंधित व्यक्ति के परिचितों के दुखी हो...
kumarendra singh sengar
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ज़िन्दगी सत्यता से परे एक सत्य है. इसे समझने की आवश्यकता है. सत्य और असत्य के बीच झूलते हुए जिस सत्य को प्राप्त कर लिया जाता है, वही ज़िन्दगी कहलाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी व्यक्ति के जीवन में ज़िन्दगी ही उसका आजीवन साथ देती है. मौत को हसीन बताने वाले कभी नहीं ब...
 पोस्ट लेवल : मृत्यु ज़िन्दगी
Ashok Kumar
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हिन्दी कविता की दुनिया का तो नहीं पता लेकिन आलोचना की दुनिया 'प्रतिबद्ध' और 'कलावाद' की एक अबूझ बायनरी और दोनों ही पदों की एक भ्रष्ट समझ से बनती है अक्सर. कला की उपस्थिति को कलावाद मान लेने का एक असर यह हुआ कि कुछ कवि और अधिक कला की खोल में छिपते चले गए और कुछ कवि...
 पोस्ट लेवल : मृत्युंजय
kumarendra singh sengar
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सूरत की बिल्डिंग में लगी आग सिर्फ वहाँ की अव्यवस्था की निशानी नहीं है बल्कि वहाँ तमाशबीन बने नागरिकों के संवेदनहीन होने की तथा सरकारी तंत्र की नाकामी की भी निशानी है. आग लगने के बाद जिस तरह से उस इमारत की चौथी मंजिल से बच्चे कूदते दिखाई दे रहे थे, वह घबराहट पैदा कर...