ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला गर्ग डिप्रेशन पर अपनी कहानी (Hindi Story on Depression) के बारे में बताते हुए कहती हैं,भारत में सच्चे मनोचिकित्सक नहीं के बराबर हैं। उनका सिर्फ दवा पर निर्भर रहना और मरीज को न समझ पाना अवसाद बढ़ाता है, कम नहीं करता। (adsbygoogle = windo...
Bharat Tiwari
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Love Poems in Hindiहम जानते हैं, जिसका अतीत नहीं होता, उसका भविष्य भी नहीं होता। जो केवल वर्तमान में रहता है, वह किसी प्रकार का रचनात्मक कर्म नहीं संवार सकता। इसलिए सुमन की कविताएं अतीत विरह की नहीं, अतीत अहसास की कविताएं हैं। — मृदुला गर्ग (adsbygoogle =...
Bharat Tiwari
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#पत्र_शब्दांकन: मृदुला गर्ग नया ज्ञानोदय, सितम्बर २०१९ कथा-कहानी विशेषांक आदि परकहते हैं फंतासी को चारों पैरों पर खड़ा होना चाहिए वरना न फंतासी रहती है, न सच...कहानी 'नरम घास, चिड़िया और नींद में मछलियां')  मैने 'नया ज्ञानोदय' में ही पढ़ ली थी। बहुत ही शानदा...
अनंत विजय
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लोकसभा चुनाव के तीन चरण संपन्न हो चुके हैं और चार चरण के चुनाव होना शेष है। चुनावी कोलाहल के बीच साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े सैकड़ों लोग खुलकर नरेन्द्र मोदी के पक्ष और विपक्ष में सामने आ रहे हैं। अबतक कई तरह की अपील जारी की चुकी हैं। किसी अपील में मोदी का नाम...
Bharat Tiwari
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सिम्मी हर्षिता की कहानी उनका जाना और मृदुला गर्ग का मर्म ...इससे ज़्यादा,मृत्यु के बाद याद किये जाने के लिए एक लेखक क्या कर सकता है? "तुम्हें तो पसंद हैं न? बस इतना ही काफी होना चाहिए। अपनी पसंद का कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। जीवन को यही पसंद है। तुम तो फूल...
Bharat Tiwari
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साहित्यकार और क्या करे, मृदुला गर्गजी ने कहानी के माध्यम से चेताया...नहीं चेते, अब सुमन केशरी दीदी कहानी के अपने पाठ से उपजी विवेचना से चेता रही हैं...जागिये! दिक्कत यह है कि जब सत्ता के खिलाड़ी हमें यह महसूस करा देते हैं, कि खिलाड़ी वो नहीं हम हैं, और हम सब दाँव पर...
Bharat Tiwari
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गारत हो दिमाग़! कमबख्त डिश कहीं की हो, क्या फ़र्क़ पड़ता है। पर दिमाग़ है कि सबकुछ नोट किये बिना मानता नहीं, बस जीवन की मुफ़लिस-सी आवाज़ में बयान किये तबील ब्यौरे ही दस्तक नहीं दे पाते।सितम के फ़नकार— मृदुला गर्ग (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});...
Bharat Tiwari
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जेएलऍफ़ में रोमांटिक उपन्यास 'लास्ट ईमेल' और मृदुला गर्ग जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में मृदुलाजी के कार्यक्रम पर यह छोटी टिप्पणी  में हुए उनके कार्यक्रम के बाद, जेएलऍफ़ के ब्लॉग के लिए लिखी थी जो जेएलऍफ़ की वेबसाइट पर है. कल मृदुलाजी का फ़ोन आया था, ख़ूब  लम...
अनंत विजय
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इन दिनों कहानी पर लिखना बर्रे के छत्ते में हाथ डालने जैसा है, सात्विक कहानियों पर अगर लिख दें तो चल भी जाएगा लेकिन स्त्रीवादी कहानी पर लिखना बेहद जोखिम का काम है । दरअसल हम सहिष्णुता की बहुत बात करते हैं लेकिन जहां कहीं भी जरा सी आलोचना दिख जाए या उसका अंदेशा भी दि...
रविशंकर श्रीवास्तव
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