ब्लॉगसेतु

Ashok Kumar
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Maria Gorgolas की पेंटिंग यहाँ से साभार ·         अशोक कुमार पाण्डेयअजीब सी किताब थी वह । 2030 में छपी थी । पूरे सौ साल पुरानी! शीर्षक ही समझ से बाहर था – स्मृति और प्रेम। उसके नीचे लिखा था- रचना। यह शायद लिखने वाले...
 पोस्ट लेवल : कहानी मेरी कहानी
अंजू शर्मा
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 ये उन दिनों की बात है जब दिन कुछ अधिक लम्बे हो चले थे और रातें मानों सिकुड़-सी गईं थीं! उनके बड़े हिस्से पर अब दिन का अख्तियार था! ये उन्हीं गुनगुने दिनों में एक बड़े महानगर की एक अलसाई-सी शाम थी जो धीमे-धीमे चलकर अपने होने का अहसास कराने आई थी! दिन था कि खत्म ह...
अंजू शर्मा
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वह अक्सर रंगों से घिरी रहती। चटख रंग, दिप दिप करते रंग, खूब सारे रंग। उसकी पेंटिंग्स में खिलखिलाते, कहकहे लगाते रंग। और वो उदास रंगों में लिपटी उदासी का पैरहन लपेटे, खामोश उन्हें सजाती रहती। "उँह, 17 साल भी कोई उम्र होती है, उदास सफ़ेद, बोरिंग धूसर, सुबक सुबक...
Vivek Rastogi
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(स्टेज पर हल्की रोशनी और, एक कोने में फोकस लाईट जली होती हैं और खड़ी हुई लड़की बोलती है)    मैं एक लड़की जिसे इस समाज में कमजोर समझा जाता है, और वहीं पाश्चात्य समाज में लड़की को बराबर का समझ के उसकी सारी इच्छाओं का सम्मान किया जाता है। जब से घर से ब...
Vivek Rastogi
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सबकी अपनी अपनी तमन्नाएँ होती हैं पर बहुत ही कम लोग अपनी तमन्नाओं के अनुसार काम कर पाते हैं, सबको अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिये, अपने उत्तरादायित्व पूरे करने के लिये, अपने सपनों के अरमानों को कहीं अपने दिल में दफन करना पड़ते हैं, पर बीच बीच में कहीं न कहीं ये अ...
Vivek Rastogi
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    प्रेम में अद्भुत कशिश होती है, प्रेम क्या होता है, प्रेम को क्या कभी किसी ने देखा है, प्रेम को केवल और केवल महसूस किया जा सकता है.. ये शब्द थे राज की डायरी में, जब वह आज की डायरी लिखने बैठा तो अनायास ही दिन में हुई बहस को संक्षेप में लिखने की इच...
Mahesh Barmate
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जो छुपा ही नहीं उसे कैसे करूँ उजागर मेरी हकीकत आ जान ले तूएक बार मेरे करीब आकर।के मेरी कहानी एक खुली किताबजिसमें हैं कुछ भेद और कुछ राज़ बेहिसाब ।हर पन्ने की हकीकत को जरा नजदीक से तू पढ़ और फिर जो है सच्ची कहानी तू अपनी जुबानी ख्वाबों में तू गढ़। तेरी रूह का नूर और मे...
अंजू शर्मा
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      कहीं दूर देश में एक सुनहरे बालों, गहरी आँखों और सुंदर गुलाबी रंगत लिए एक लड़की हर शाम एक जंगल में प्रेम की पुकार भरे गीत गाया करती थी! उसकी गहरी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी और वह नदी किनारे बैठकर दूर क्षितिज को निहारा करती...
 पोस्ट लेवल : मेरी कहानी
PRABHAT KUMAR
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     आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!!      गरीबी:- माँ, मैं और मेरी कहानी रोटी नहीं है खिलाने को खाने की  मांग कब करूँ अशिक्षा बेरोजगारी के आशियानें में नए भारत कि बात कब करूंछुपती हुई देह और दुशाला मे...