ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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पता नहीं अंदर ख़ुद से कितने झूठे वादे कर रखे हैं।एक में हम शादी के बाद पहली बात अकेले घूमने निकलने वाले हैं। में सारी ज़रूरी चीजों में सबसे पहले कैमरे को संभालता हूँ। जिद करके उधार ही सही नौ हज़ार का डिजिटल कैमरा ले आता हूँ। कहीं पहाड़ पर जाएँगे, तब अपनी साथ वाली तसवी...
Shachinder Arya
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कल रात इस ख़याल के दिल में उतरते जाने की देर थी कि नींद फ़िर लौट के नहीं आई। उस दृश्य को अपने सामने घटित होते देखता हूँ तो रौंगटे खड़े हो जाते हैं। रात ऐसे ही कई बार गिरफ़्त में ले लेती है। फ़िर छोड़े नहीं छोड़ती। गुप्ता जी वहीं कहीं सड़क किनारे ख़ून से लथपथ पड़े रह गए हों...
Shachinder Arya
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रात अभी शुरू हुई है। मन में न जाने कितनी बातें एक-दूसरे को धकेलते हुए मरी जा रही हैं। कोई भी किसी का इंतज़ार नहीं करना चाहती। बस एकबारगी कह दूँ तो उन्हे चैन पड़े। पर उन्हें एकसाथ यहाँ कहूँगा तो कोई मतलब भी बन पड़े, कह नहीं सकता। इसलिए तरतीब होनी चाहिए। एक सलीका सबको स...
Shachinder Arya
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कई दिनों से सोच रहा हूँ मेरे लिखने में ऐसा क्या है जो चाहकर भी गायब होता रहा है। इस खाली कमरे का एकांत पता नहीं किस तरह अपने अंदर भरकर यहाँ बैठा रहा हूँ। दीवारें बदल जाती हैं पर मन वहीं कहीं अकेले में रह रहकर अंदर लौटता रहता है। यह बहुत अजीब है कि जब कहीं चेहरे और...
Shachinder Arya
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पता नहीं क्या लिखने बैठा हूँ। पर बैठ गया हूँ। शायद कुछ और बातें होंगी, जो कभी इस दुमाले से नीचे नहीं उतर पायीं। फ़िर बकवास करने में भी हम खुद को इतना तो मान ही लेते हैं कि किसी को कुछ नहीं समझते। खुद को भी नहीं। वह शादी करने के बाद उस मेहनतकश जानवर के सींग की तरह गा...
Shachinder Arya
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अचानक वापस लौटता हूँ उस सीन पर जहाँ सबकुछ ठहर चुका था। वहाँ थोड़ी देर में आसमान से कोई बर्फ नहीं गिरने वाली थी। न हम दोनों अचानक बाहों में आकर एक दूसरे को भूलने वाले थे। कितना भी चाहता, मेरे कमज़ोर से हाथ तुम्हारी कलाई पकड़े उस बड़े से गेट से बाहर निकल जाने की कोशिश क...
Shachinder Arya
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मेरे बगल मेज़ पर दो कागज़ के टुकड़े रखे हुए हैं और मन में कई सारे ख़त। मन इस मौसम में कहीं खोया-खोया सा कहीं गुम हो गया। धूप इतनी नहीं है, पर आँखें जादा दूर तक नहीं देख पा रहीं। उनके नीचे काले घेरे किसी बात पर अरझे रहने के बाद की याद की तरह वहीं रुके रह गए। रातें हैं,...
Shachinder Arya
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वहाँ उस लोहे के दरवाज़े के पीछे उनकी दुनिया थी। इस बड़ी सी दुनिया में एक छोटा सा पता। बड़े लड़के की शादी अभी हुई थी इसलिए घर थोड़ा और छोटा हो गया थी। उनके इस एक कमरे वाले घर के बीचोबीच एक दरी बिछी हुई थी। जब कभी किसी मेहमान के आने की आहट होती, वे लोग कोई धुली सी साफ़ सी...