ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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मिटकर मेहंदी को रचते सबने देखा है,उजड़कर मोहब्बत कोरंग लाते देखा है?चमन में बहारों काबस वक़्त थोड़ा है,ख़िज़ाँ ने फिर अपनारुख़ क्यों मोड़ा है?ज़माने के सितम सेन छूटता दामन है,जुदाई से बड़ाभला कोई इम्तिहान है?मज़बूरी के दायरों मेंहसरतें दिन-रात पलीं,मचलती उम्मीदेंकब क़दम...
kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादन-------सोमवारीय विशेषांक में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन★मेंहदी श्रृंगार अनुराग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।पुरातन काल से आधुनिक  होने के क्रम में भले ही मेंहदी लगाने का ढंग बदल गया,मेंहदी हरी पत्तियों में उपेक्षित हो गयी औरकै...
 पोस्ट लेवल : 1480 मेहंदी
Akhilesh Karn
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तृप्ति शक्याकजरीपिया मेहंदी लिया द मोती झील से जाके सायकिल से नापिया मेहंदी लिया द मोती झील से जाके सायकिल से जाके सायकिल से जाके सायकिल से जाके सायकिल से पिया मेहंदी लिया द मोती झील से जाके सायकिल से नापिया मेहंदी लियावाï, छोटकी...
Kailash Sharma
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कैसे देखूं मैं अब सपने, इन आँखों में अश्रु भरे हैं,नींद खडी है दरवाज़े पर, हर कोने में दर्द खड़े हैं।रातों का हर पहर डराता तिमिर ढांक अंतस को जाता,रात अमावस की काली में कोई अस्तित्व नज़र न आता,कैसे हाथ बढ़ा कर पकडूँसौगंधों के शूल गढ़े हैं।धूमिल हुई ह...
shashi purwar
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मेहंदी लगे हाथ ,करते पिया का इंतजारसात फेरो संग मिलाउम्र भर का साथ मिले दो अजनबीजैसे नदी के दो किनारोका हुआ संगमबदल गयी दिशाए जीवन की हवाए बहती एक जलधारा .नाजुक होते ये रिश्तेकांच से कच्चे धागेविश्वास की डोर बांधेदिलो की प्रीत ,पर कठिन पलदुर्गम डगर पे मजबूत हो...
संगीता पुरी
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मेहंदी लिथेसिई कुल का काँटेदार आठ दस फुट तक ऊंचा झाडीनुमा पौधा होता है , जिसका वैज्ञानिक नाम लॉसोनिया इनर्मिस है। इसे त्वचा, बाल, नाखून, चमड़ा और ऊन रंगने के काम में प्रयोग किया जाता है। जंगली रूप से यह ताल तलैयों के किनारे उगता है , पर इसकी टहनियों को काटकर भूमि म...
 पोस्ट लेवल : मेहंदी सावन
संगीता पुरी
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मेहंदी लिथेसिई कुल का काँटेदार आठ दस फुट तक ऊंचा झाडीनुमा पौधा होता है , जिसका वैज्ञानिक नाम लॉसोनिया इनर्मिस है। इसे त्वचा, बाल, नाखून, चमड़ा और ऊन रंगने के काम में प्रयोग किया जाता है। जंगली रूप से यह ताल तलैयों के किनारे उगता है , पर इसकी टहनियों को काटकर भूमि म...
 पोस्ट लेवल : मेहंदी सावन
S B Singh
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आइये आज फ़िर जिक्र करें महान शायर फ़िराक गोरखपुरी साहब का। यह उस शायर का जिक्र है जो हजार खराबियों के बाद भी जिंदगी को खुल्दे-बरीं पर तरजीह देता है। जो जिंदगी का शायर है, विवेक का शायर है। जो प्रेम को शारीरिक रति मात्र से निकाल कर उस बौधिक धरातल पर ले जाता है जहाँ...