ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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Aloneना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|मैं अकेला हूँ...ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई हमदर्द नहीं है|मैं अकेला हूँ....कोई कैसे इतना,उलझ जाता है जिंदगी में,की भूल जाता है,कि कोई...
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--नमन आपको शारदे, मन के हरो विकार।नूतन छन्दों का मुझे, दो अभिनव उपहार।।--तुक-लय-गति का है नहीं, मुझको कुछ भी ज्ञान।मेधावी मुझको करो, मैं मूरख नादान।।--सबसे पहले आपका, करता हूँ मैं ध्यान।शब्दों को पहनाइए, कुछ निर्मल परिधान।।--गीत-ग़ज़ल-दोहे लिखूँ, लिखूँ बाल साहित्य।...
अनीता सैनी
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 उजड़ रहा है साहेब धरा के दामन से विश्वास सुलग रही हैं साँसें कूटनीति जला रही है ज़िंदा मानस   सुख का अलाव जला भी नहीं दर्द धुआँ बन आँखों में धंसाता गया  निर्धन हुआ बेचैन  वक़्त...
अर्चना चावजी
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"Mam aap humare. Liye fighter example haai"1998 में वार्डन थी,2000 तक ...अगर इतने साल बाद भी कोई अच्छे काम याद करे तो जीवन का उद्देश्य सार्थक होता लगता है।2 दिन पहले फेसबुक मैसेंजर पर अचानक पुराने विद्यार्थी ने याद करते हुए लिखा था ,बातचीत में आगे ये भी -Mei kai ba...
 पोस्ट लेवल : मैं संस्मरण
PRABHAT KUMAR
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मुझे हर कहीं अगर उसका चेहरा नजर आए तोसमझो मैं बेपनाह मुहब्बत करता तो हूँ!अश्कों को भी कब निकलना मालूम है शायदमैं उसकी आँखों का अदब करता तो हूँ! हर सूरत में किसी मूरत की तरह वो खड़ी है वोजाग उसे देखने की कोशिश करता तो हूँ!..................शायद नहीं लिख पाऊँगा आगेक्...
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मित्रों!13 सितम्बर को मेरे ज्येष्ठ पुत्र नितिन का जन्मदिन है।शुभकामनास्वरूप प्रस्तुत हैं मेरे कुछ उद्गार...!जीवन के क्रीड़ांगन में, तुम बनकर रहो विजेता।जन्मदिवस की बेला पर, आशीष तुम्हें मैं देता।--आदर्शों की नींव हमेशा, अपने बच्चों में ड...
PRABHAT KUMAR
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मैं तुमको बेवफा क्यों नहीं कहताक्योंकि मैं मुहब्बत के सिवा कुछ नहीं चाहता-प्रभात
अरुण कुमार निगम
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"मैं की बीमारी" - अरुण कुमार निगममैं मैं मैं की बीमारी हैखुद का विपणन लाचारी है।मीठी झील बताता जिसकोदेखा चख कर वह खारी है।पैर कब्र में लटके लेकिनआत्म-प्रशंसा ही जारी है।कई बार यह भ्रम भी होता मनुज नहीं वह अवतारी है।सभागार में लोग बहुत परमाइक से उसकी यारी है।है जुगा...
अरुण कुमार निगम
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"मैं" का मोहजिस तरह किसी ब्याहता के हृदय में "मैका-मोह" समाया होता है, उसी तरह इस नश्वर संसार के हर क्षेत्र में "मैं-का" मोह चिरन्तन काल से व्याप्त है। जिसने इस मोह पर विजय प्राप्त कर ली, समझो कि उसने मोक्ष को प्राप्त कर लिया। एक अति बुजुर्ग साहित्यकार की रुग्णता क...
 पोस्ट लेवल : "मैं" का मोह
ज्योति  देहलीवाल
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दोस्तों, इस कडकडाती धूप में अक्सर हम बाजार से कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कि पेप्सी और फ्रूटी आदि खरीद लेते हैंं। लेकिन बाजार में जो फ्रूटी आदि मिलती हैं उन सब में प्रिजरवेटिव्स मिले होने से वे सेहत के लिए बहुत हानिकारक होती हैं। इसलिए आज हम घर पर ही बनायेंगे मैंगो फ्रूटी....