ब्लॉगसेतु

ज्योति  देहलीवाल
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आम के पापड़ या आम की मिठाई कई तरह की बनाई जाती हैं। लेकिन स्टफ्ड मैंगो रोल ऐसी टेस्टी मिठाई या यूं कहिए ऐसा स्टफ्ड आम पापड़ हैं, जो आपने कभी खाया नहीं होगा। ये मिठाई खाने में इतनी लजीज लगती हैं कि एक बार बनाने पर आप इसे बार-बार बनायेंगे। तो आइए, बनाते हैं बिना धूप के...
PRABHAT KUMAR
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जब मैंने उससे पूछा कि खैरियत है सब? उसने कहा- हां। मैंने फिर पूछा, ऐसे कैसे बोल रही हो। कुछ और नहीं बोलोगी? नहीं, बस ठीक है। मैं चाहता था कि वो सब कुछ बक दे। मगर सम्भव न था। मैं दूर था बहुत। चाहकर भी उससे सारी चीजें पूछ तो नहीं सकता था। अचानक से फ़ोन कट गया। मैं पूछ...
अरुण कुमार निगम
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"मैं" का मोहजिस तरह किसी ब्याहता के हृदय में "मैका-मोह" समाया होता है, उसी तरह इस नश्वर संसार के हर क्षेत्र में "मैं-का" मोह चिरन्तन काल से व्याप्त है। जिसने इस मोह पर विजय प्राप्त कर ली, समझो कि उसने मोक्ष को प्राप्त कर लिया। एक अति बुजुर्ग साहित्यकार की रुग्णता क...
 पोस्ट लेवल : "मैं" का मोह
आदित्य सिन्हा
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किरण हूँ मैं, कंचन है दिल मेरा  संसार में सब से पृथक,शीतल तरु की छाँव हो तुम,उष्म हवा को क्षीण करते, सावन की फुहार हो तुम , क्षितिज पर फैली अरुणिमा जैसे,सुनहरे कल का संवाद लिए ,तुम्हारे होने का आभास ही,      &nbsp...
sanjiv verma salil
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मुक्तिकासंजीव*मुझमें कितने 'मैं' बैठे हैं?, किससे आँख मिलाऊँ मैं?क्या जाने क्यों कब किस-किससे बरबस आँख चुराऊँ मैं??*खुद ही खुद में लीन हुआ 'मैं', तो 'पर' को देखे कैसे?बेपर की भरता उड़ान पर, पर को तौल न पाऊँ मैं.*बंद करूँ जब आँख, सामना तुमसे होता है तब हीकहीं न होकर...
 पोस्ट लेवल : मैं मुक्तिका
अनीता सैनी
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टूटे पंखों से लिख दूँ मैं,बना लेखनी वह कविता।पीर परायी धरुँ हृदय पर,छंद बहे रस की सरिता।मर्मान्तक की पीड़ा लिख दूँ,पूछ पवन संदेश बहे।प्रीत लिखूँ छलकाते शशि को,भानु-तपिश जो देख रहे,जनमानस की हृदय वेदना,अहं झूलती सृजन कहे।पथ ईशान सारथी लिख दूँ,विहान कलरव की सुनीता।टूट...
अनीता सैनी
7
शून्य नभ से झाँकते तारों की पीड़ा,हिंद-हृदय सजाता अश्रुमाला आज, मूक स्मृतियों का सिसका खंडहर हूँ मैं, आलोक जगत में देख धधकते प्राण,चुप्पी साधे बिखरता वर्तमान हूँ मैं।कलुषित सौंदर्य हुआ,नहीं विचार सापेक्ष,जटिलताओं में झूलता भावबोध हूँ मैं,उत्थान की अभिलाषा...
अनीता सैनी
7
 विपदा में बैठी उस माँ की फ़िक्र हूँ, महक ममता की लहू में बहूँ  मैं, बेचैन बाबुल के दिल की दुआ हूँ, यादों में झलके नयन-नीर  हूँ मैं, दिलों में बहती शीतल हवा मैं...हवा हूँ...भाई से बिछड़ी बहन की हँसी मैं, स्नेह-बंधन मे...
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--मैं हूँ निपट भिखारी, कुछ दान माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।। --दुनिया की भीड़ से मैं,बच करके चल रहा हूँ,माँ तेरे रजकणों को,माथे पे मल रहा हूँ,निष्प्राण अक्षरों में, मैं प्राण माँगता हूँ।झोली पसारकर माँ, मैं ज्ञान माँगता हूँ।। -- अज्ञान...
अनीता सैनी
7
 मैंने देखा ता-उम्र तुम्हें,    ज़िंदा है इंसानियत तुम में आज भी तुम बहुत ही बहादुर हो,  इतने बहादुर की जूझते हो स्वयं से ,   तलाशते हो हर मोड़ पर प्रेम  |देखा है तुम्हारे नाज़ुक दिल को मैंने अनगिनत बार छलनी होते...