ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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मैं गुलों के जैसा महकता नहीं हूँ।सितारा हूँ लेकिन चमकता नहीं हूँ।।ज़माना ये समझे कि खोटा हूँ सिक्का,बाज़ारों में इनकी मैं चलता नहीं हूँ।यूँ  तो अंधेरों से जिगरी है यारी,मैं ऐसा हूँ सूरज कि ढलता नहीं हूँ।सफ़र पे जो निकला तो मंज़िल ज़रूरी,यूँ राहों में ऐसे ...
kuldeep thakur
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स्नेहिल नमस्कार-----–वाद-विवाद में विष घना ,बोले बहुत उपाधमौन रहे सबकी सहे, सुमिरै नाम अगाधकबीरदास के इस दोहे मेंं निहित सार मौन की संपूर्ण व्याख़्या है।मौन का सरल अर्थ शांति।वह अवस्था जहाँ भावों को वाणी से प्रकट नहीं किया जाता  है।विराट सृष्टि के कण-कण में व्य...
 पोस्ट लेवल : 1578 मौन
अनीता सैनी
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 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...
Kailash Sharma
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चारों ओर पसरा है सन्नाटामौन है श्वासों का शोर भी,उघाड़ कर चाहता फेंक देनाचीख कर चादर मौन की,लेकिन अंतस का सूनापनखींच कर फिर से ओढ़ लेता चादर सन्नाटे की।पास आने से झिझकतासागर की लहरों का शोर,मौन होकर गुज़र जाता दरवाज़े से दबे क़दमों से भीड़ का कोलाहल, अनकहे...
Kailash Sharma
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बन न पाया पुल शब्दों का,भ्रमित नौका अहसासों कीमौन के समंदर में,खड़े है आज भी अज़नबी से अपने अपने किनारे पर।****अनछुआ स्पर्शअनुत्तरित प्रश्नअनकहे शब्दअनसुना मौन क्यों घेरे रहतेअहसासों को और माँगते एक जवाब हर पल तन्हाई में।****रात भर सिलते रहे दर्द की चादर,उधेड़ गया फिर...
Kailash Sharma
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जब भी पीछे मुड़कर देखाकम हो गयी गति कदमों की,जितना गंवाया समयबार बार पीछे देखने मेंमंज़िल हो गयी उतनी ही दूर व्यर्थ की आशा में।****बदल जाते हैं शब्दों के अर्थव्यक्ति, समय, परिस्थिति अनुसार,लेकिन मौन का होता सिर्फ एक अर्थअगर समझ पाओ तो।****झुलसते अल्फाज़,कसमसाते अ...
Kailash Sharma
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मत बांटो ज़िंदगीदिन, महीनों व सालों में,पास है केवल यह पलजियो यह लम्हाएक उम्र की तरह।****रिस गयी अश्क़ों मेंरिश्तों की हरारत,ढो रहे हैं कंधों परबोझ बेज़ान रिश्तों का।****एक मौनएक अनिर्णयएक गलत मोड़कर देता सृजितएक श्रंखलाअवांछित परिणामों की,भोगते जिन्हें अनचाहेजीवन पर्य...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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मसूर की दाल जैसा सूरज जब साँझ को पेड़ों के पीछे उतरने लगता है तो उसमें न गरमी रह जाती है, न रोशनी। यही समय होता है जब हरचरन अपने मवेशियों को हाँकता हुआ गाँव वापस लौट चलता है। उसके पास एक बैल है और दो गाएँ। तीनों मवेशी सुंदरा ताई के हैं। ताई उसकी कोई नहीं, पर अपनों...
मुकेश कुमार
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1.खामोशियाँ तब भी थीथी शांत जल धाराशांत थे उसमे तैरतेछोटी-बड़ी मछलियाँप्रॉन, कछुए और केंकड़े भी शांत थी व्हेल भीजब वो पीछे से आयी, थी मुंह बायेऔर फिर आया भूचालकोलाहल अजब गजबकुछ शांत जीवों के लिए ........फिर से शांत हो गया सब कुछकभी कभी नीरवता बन जाती है 'शांति'!...
Yashoda Agrawal
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मौन भी मुखरितसाथ रहे जब राधा और श्यामकंगन बिछुआ, पायल छनके  ‎संग मुरली के तानमगन प्रेम में बिसराये कब भोर से हो गयी साँझनैन की आँख-मिचौली में क्या बतियाने का कामपात कदंब के ले हिलकोरे जमना बैठी लहरे थाम हवा राग...
 पोस्ट लेवल : मौन भी मुखरित