ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
227
चित्र -साभार गूगल दो गीत -जयकृष्ण राय तुषार चित्र -साभार गूगल एक -मन ही मन ख़ामोश कबूतर मन ही मन ख़ामोश कबूतर कुछ बतियाता है |बन्द लिफ़ाफे लेकर अब डाकिया न आता है |क्या इस युग में सब इतने निष्ठुर हो जाएंगे , ,अन्तरंग बातें भी यं...
jaikrishnarai tushar
227
एक गीत-वासंती पाठ पढ़े मौसमनयनों केखारे जल सेभींग रहे अँजुरी में फूल ।वासंतीपाठ पढ़े मौसमपरदेसी राह गया भूल ।भ्रमरों केघेरे में धूपगाँठ बँधी हल्दी से दिन,खिड़की मेंझाँकते पलाशफूलों की देह चुभे पिन,माँझी केसाथ खुली नावधाराएँ,मौसम प्रतिकूल ।सपनों मेंखोल रहा कौनचिट्ठी मे...
मुकेश कुमार
213
ज़ीरो डिग्री पर जम जानारूम टेम्परेचर पर पिघल जानासौ पर खौलने लगनातापमान का ये प्रतिकारक असरपरिवर्तित होता रहता है स्थिति के अनुरूपलेकिनस्नेह किअजब-गजब अनुभूतिरहने नहीं देता एक सा तापमानएक हलकी सी स्मित मुस्कानऔर फिरभरभरा कर गुस्स्से से चूर व्यक्तिटप से बहा देता...
shashi purwar
116
चला बटोही कौन दिशा मेंपथ है यह अनजाना जीवन है दो दिन का मेलाकुछ खोना कुछ पानातारीखों पर लिखा गया हैकर्मों का सब लेखापैरों के छालों को रिसते कब किसने देखाभूल भुलैया की नगरी मेंडूब गया मस्तानाजीवन है दो दिन का मेलाकुछ खोना कुछ पानामृगतृष्णा के गहरे बादलहर पथ पर छितरा...
जेन्नी  शबनम
98
उधार   *******   कुछ रंग जो मेरे हिस्से में नहीं थे   मैंने उधार लिए मौसम से   पर न जाने क्यों ये बेपरवाह मौसम मुझसे लड़ रहा है   और माँग रहा है अपना उधार वापस   जिसे मैंने खर्च दिया उन दिनों   ज...
 पोस्ट लेवल : मौसम उम्मीद ज़िन्दगी
ऋता शेखर 'मधु'
94
ग्रीष्म ऋतु ============ ग्रीष्म की दुपहरिया कोयल की कूक से टूट गयी काँच सी छत पर के पँखेसर्र सर्र नाच रहेहाथों में प्रेमचंदनैंनों से बाँच रहेनिर्मला की हिचकियाँ दिल में हैं खाँच सी कोलतार पर खड़े झुंड हैं मजूरों के द्वार पर नाच रहे बानर जमूरों के लू की बड़ी तपन खस...
 पोस्ट लेवल : नवगीत मौसम
jaikrishnarai tushar
227
चित्र-साभार गूगलएक गीत-मौसम का बासीपन टूटेहँसनाहल्की आँख दबाकरमौसम का बासीपन टूटे ।हलद पुतीगोरी हथेलियोंसे अब कोई रंग न छूटे ।भ्रमरों केमधु गुँजन वालेआँगन में चाँदनी रात हो,रिश्तों मेंगुदगुदी समेटेबच्चों जैसी चुहुल,बात हो,अर्घ्य जलेतुलसी चौरे परकोई मंगल कलश न फूटे...
E & E Group
16
मिर्च का अचार आवश्यक सामग्री - Ingredients for Instant Mirchi Achar Recipeहरी मिर्च- 100 ग्रामसरसों का तेल- 4 से 5 छोटी चम्मचसिरका- 4 छोटी चम्मचसौंफ- 3 छोटी चम्मचकाली सरसों के दाने- 3 छोटी चम्मचनमक- 1.5 छोटी चम्मच या स्वादानुसारमेथी दाने- 1.5 छोटी चम्मचजी...
sanjiv verma salil
6
नवगीत *पल में बारिश, पल में गर्मी गिरगिट सम रंग बदलता है यह मौसम हमको छलता है*खुशियों के ख्वाब दिखाता हैबहलाता है, भरमाता हैकमसिन कलियों की चाह जगासौ काँटे चुभा, खिजाता हैअपना होकर भी छाती परबेरहम! दाल दल हँसता हैयह मौसम हमको छलता है*जब एक हाथ म...
 पोस्ट लेवल : navgeet mausam नवगीत मौसम
Ravindra Pandey
478
जो भी हो जाए कम है,क्यों तेरी आँखें नम हैं?देते हैं  ज़ख्म  अपनें,मिले गैरां से मरहम है।तू अपनी राह चला चल,पीकर अपमान हलाहल।या मोड़ दिशा हवाओं के,गर तुझमें भी कुछ दम है।न्याय सिसक कर रोए,अन्याय की करनी धोए.यहाँ झूठ, फ़रेब के क़िस्से,नित लहराते परचम हैं।नैतिकत...