ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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कहीं बादल रहे उमड़कहीं आँधी रही घुमड़अब आ गयी धूप चुभती चिलचिलातीअब सूखे कंठ से चिड़िया गीत न गातीकोयल को तो मिल गया आमों से लकदक  बाग़कौआ ढूँढ़ रहा है मटका गाता फिरे बेसुरा रागचैतभर काटी फ़सल  बैसाख में खलिहान बदला ...
Ravindra Pandey
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मौसम ज़रा ज़र्द हो क्या गया,वो हम से ही नज़रें चुराने लगे।कल तक रहे धड़कनों की तरह,साये से भी पीछा छुड़ाने लगे।काँच से भी नाज़ुक अरमां मेरे,टूटते ही लहू सब बहाने लगे।शुक्र है तुम्हें सम्भलना आ गया,हम आँखों से मोती गिराने लगे।तनहा कटे क्यों उमर का सफ़र,यादों की महफ़िल सजाने...
विजय राजबली माथुर
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sanjiv verma salil
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एक गीत -एक पैरोडी*ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा ३१कहा दो दिलों ने, कि मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा ३०*ये क्या बात है, आज की चाँदनी में २१कि हम खो गये, प्यार की रागनी में २१ये बाँहों में बाँहें, ये बहकी निगाहें २३लो आने लगा जिंदगी का मज़ा १९*सितारों की...
Ravindra Pandey
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मिसालें मिलेंगी तेरे नाम की,तू खुद को ज़रा आजमा के तो देख...चली आयेगी वो हवा की तरह,तू मौसम की तरह बुला के तो देख...भले दूर है वो खुशी की नगर,दो कदम ज़रा तू बढ़ा के तो देख...सिफर है अगर हासिल-ए-ज़िन्दगी,तू आईना ज़रा मुस्कुरा के तो देख...रख उम्मीद में तू सुबह श...
Ravindra Pandey
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बूंदे बारिश की टिप-टिप टपकने लगी,फिर उम्मीदों का मौसम जवां हो गया...हुस्न की क्या अज़ब है ये जादूगरी?आ के गालों पे मोती फ़ना हो गया...ये सुबह शबनमी गुनगुनाने लगी,ख़ौफ रातों का जाने कहाँ खो गया..?तपिश धूप की लो कहीं खो गयी,खिजां का वो मौसम धुआँ हो गया...देखो तनहाई बैरन...
विजय राजबली माथुर
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 Mausmi Chatterjee Did Rape Scene During Her Pregnancyप्रेग्नेंसी में इस एक्ट्रेस ने किया था रेप सीन, शूटिंग के दौरान रोई, उल्टियां भी कीdainikbhaskar.com | Apr 19, 2017, 14:37 ISTमुंबई. एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी 69 साल की होने जा रही हैं। 26 अप्रैल 1948 को कोलकात...
विजय राजबली माथुर
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  हिंदुस्तान, लखनऊ, 09 मार्च 2017 , पृष्ठ --- 14 हिंदुस्तान,लखनऊ, 04-03-2017, पृष्ठ -8 हमारे देश में कुछ वैज्ञानिक, साईंसदान, एथीस्ट और यूरोप का गुणगान करने वाले वामपंथी लोग यह मानते हैं कि, 'वेद ' गड़रियों के गीत हैं और भारत विज्ञान से अछूता देश...
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रंग-गुलाल साथ में लाया।होली का मौसम अब आया।पिचकारी फिर से आई हैं,बच्चों के मन को भाई हैं,तन-मन में आनन्द समाया।होली का मौसम अब आया।।गुझिया थाली में पसरी हैं,पकवानों की महक भरी हैं, मठरी ने मन को ललचाया।होली का मौसम अब आया।।बरफी की है शान निराली,भरी हुई है पूरी...
ऋता शेखर 'मधु'
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565 जले अलाव गप शप में सिंकी यादों की लिट्टी564केंद्र अलावपरिधि पर जुटीसर्द हथेली563शीत लहरगुलबंद लपेटोआठो पहर562खुले दरीचेसरसरा के आएशीत के खत561हीरों का हारवल्लरी पर सजीओस की बूँदें560धूप से डरीकोमल शबनमफुर्र से उड़ी559धूमिल उषाकुहासों के जाल मेंफँसा है रवि558ममत...
 पोस्ट लेवल : हाइकु मौसम हाइकु