ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
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चित्र -गूगल से साभार एक गीत -मौसम को प्यार हुआ खेतों में धान जला गेहूं लाचार हुआ |चकाचौंध -शहरों से मौसम को प्यार हुआ |हम करैलमिटटी में कर्ज़ -सूद बोते हैं ,ऋतुओं की इच्छा पर हँसते हैं रोते हैं ,फागुन में ओले थे सावन...
संतोष त्रिवेदी
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अभी तक मौसम को देखकर नेता ही रंग बदलते रहे हैं पर अब इधर मौसम ने भी पलटवार कर दिया है।वसंत ऋतु में ओलों के साथ जमकर बारिश हो रही है।उसने भी नेताओं की तरह यू-टर्न ले लिया है।नेताओं के ‘अच्छे दिन’ यदि जुमले में बदल सकते हैं और 'इंसान का इंसान से भाईचारा’ गहरी साजिश म...
Kajal Kumar
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ऋता शेखर 'मधु'
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362फागुनी तालरस रंग बिखरेमन बासंती|361मन का जोगीबना रूप का लोभीगा उठा फाग|360खिले पलाशजोगन वन घूमेबासंती आस|359प्रीत में बसीरंगों की छिटकनमन भ्रमर|358मोहक खुश्बूचुरा कर ले गईबासंती हवा|357भीनी सुगंधटपका बौर रसमन बावरा|356बोले है कागाकुहकी कोयलियापाहुन आए|*ऋता शेखर...
Kailash Sharma
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सपने हैं जीवन,       जीवन एक सपना,कौन है सच कौन है अपना?*****आंधियां और तूफ़ान      आये कई बार आँगन में पर नहीं ले जा पाये उड़ाकर अपने साथ,आज भी बिखरे हैं आँगन में पीले पात बीते पल की यादों केतुम्हारे साथ.*****नफरतों...
राजीव कुमार झा
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वसंत में बौराया है मनफगुनाहट की आहट हैपीले सरसों के गंध सुगंध सेउल्लासित कर जाता है मनवसंत में बौराया है मनवन उपवन टेसू फूलेवसंत के सज गए मेलेबर्फीले सफ़ेद चादरों सेढँक जाता है तन मनवसंत में बौराया है मननभ में विहग...
 पोस्ट लेवल : ऋतू वसंत मौसम
सतीश सक्सेना
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समय प्रदूषित लेकर आये , क्या दोगे ?कालचक्र विकराल,तुम मुझे क्या दोगे ? दैत्य , शेर , सम्राट   ऐंठ कर , चले गए !शक्तिपुरुष बलवानगर्व कर  चले गए ! मैं हूँ प्रकृति प्रवाह, तुम मुझे क्या दोगे ?  हँसता काल विशाल,तुम मुझे क्या दोगे ?मै...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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मौसम के मानिंद रिश्तों का रक्तचाप भी निरंतर झूले सा झूलता रहता है कभी घटता कभी बढ़ता तो कभी सामान्य हो जाता है झुंझलाहट मेंक्रोध में तनाव मेंबढ़ जाता है ख़ुशी में,सोहाद्र में  मिल जुल कर हँसने से  सामान्य हो जाता हैअपनों की पीड़ा दुविधा को देख कर दर्द की अनुभ...
राजेंद्र  गुप्ता
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अरुण कुमार निगम
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(१) कहाँ बदला है मौसम............. पिसते  हरदम ही  रहे, मन में  पाले टीस तुझको भी मौका मिला, तू भी ले अब पीस तू भी ले अब पीस , बना कर  खा ले रोटी   हम  चालों के बीच , सदा चौसर की गोटी पूछ  रहा  विश्वास , कहाँ ...