ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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घूमना-फिरना किसे अच्छा नहीं लगता है? नई-नई जगह देखना, नई-नई जानकारियाँ इकठ्ठा करना, अलग तरह की संस्कृति, कला, जीवन-शैली आदि से परिचय होता है. घूमना-फिरना मतलब साफ़ है कि यात्रा करनी है. यात्राएँ केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का साधन नहीं हैं वरन इनके द्वा...
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जब कोई पुस्तक किसी ऐसे व्यक्ति की हो जो खुद आपमें ही समाहित हो तो उस पुस्तक को पढ़ने का आनंद अलग ही होता है. इस आनंद में और वृद्धि तब हो जाती है जबकि वह उस लेखक की पहली पुस्तक हो. यह बिंदु पढ़ने वाले को आनंदित और गौरवान्वित करता है. आनंद की सीमा यहीं आकर नहीं रुकती व...
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पहले दिन समुद्र तट से विवेकानन्द रॉक के दर्शन करने के बाद उसको एकदम करीब से देखने की चाहत और बढ़ गई थी. सूर्यास्त का अद्भुत दृश्य देखने के बाद सूर्योदय देखने की उत्कंठा बढ़ गई. बहरहाल दो दिन की यात्रा, पहले दिन का समुद्र तट का जबरदस्त भ्रमण तन-मन को बाहरी रूप मे...
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कोई काम पहली बार किया जा रहा हो तो उसमें उत्साह, उमंग, रोमांच जैसी अनुभूति होती है. कुछ ऐसा ही हमारे साथ हो रहा था. पहली बार अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की यात्रा और पहली बार ही हवाई-यात्रा करने का अवसर हाथ आने वाला था. टिकट की बुकिंग से लेकर उसकी अन्य औपचारिकताओं के...
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कार से उतरते ही सबसे पहले आँखों के आगे चार पानी के जहाज सजे हुए नजर आये. एक समुद्री तट के ठीक किनारे और बाकी तीन किनारे से थोड़ा दूर. चारों ओर अँधेरा और उस अँधेरे को चीरते जहाजों की रौशनी समुद्री लहरों के साथ अजब-अजब सी आकृतियाँ बना रही थी. दिन में नीला दिखाई देने व...
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अंडमान-निकोबार की नीले समुद्री जल और नैसर्गिक प्राकृतिक सुन्दरता को दिल-दिमाग में अभी पूरी तरह बसा भी नहीं पाए थे कि वहाँ से वापसी का दिन दिखाई देने लगा. लौटने से पहले उस जगह को देखने का कार्यक्रम बना जिस जगह के बारे में पहले दिन से सुनते आ रहे थे. वो जगह थी बाराटा...
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पोर्ट ब्लेयर में दो दिन की घूमा-फिरी के बाद समुद्र किनारे सजे-सजाये खड़े तीन जहाजों के अद्भुत दृश्य को आत्मसात करते हुए देर रात तक बिटिया रानी के जन्मदिन की पार्टी और फिर सुबह-सुबह हैवलॉक द्वीप को चल देना. अंडमान-निकोबार में जल्दी सूर्योदय होने के कारण सुबह छह बजने...
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सेलुलर जेल, जहाँ एक तरफ अंग्रेजी शासन में अमानवीय यातनाओं का केंद्र रहा वहीं दूसरी तरफ आज आज़ाद भारत में क्रांतिकारियों के तीर्थस्थल के रूप में पहचाना जा रहा है. ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए, जो देश की आज़ादी में न्योछावर हो चुके क्रांतिकारियों के प्रति आदर-सम्मान का भ...
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अंडमान निकोबार की यात्रा करने की इच्छा बहुत लम्बे समय से मन में थी. इसके मूल में एकमात्र कामना पोर्ट ब्लेयर स्थित सेलुलर जेल के दर्शन करना रहा था. जिस स्थान में देश की आज़ादी के दीवानों ने ज़ुल्म सहकर भी उफ़ तक नहीं की, उस स्थान के दर्शन करने की उत्कंठा सदैव से मन में...
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हम लोगों के दर्शनीय स्थलों में मुख्य रूप से विवेकानन्द रॉक मेमोरियल, विवेकानन्द केंद्र और कन्याकुमारी का समुद्रतट था. इसके अलावा कन्याकुमारी में बना वैक्स म्यूजियम, सुचिन्द्रम, माथूर हैंगिंग ब्रिज, पद्मनाभम पैलेस, कोवलम बीच भी शामिल थे. विवेकानन्द केंद्र में संचालि...