ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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       वक़्त फ़िल्म का एक डायलॉग- "चाय की प्याली हाथ में उठा कर मुंह तक तक ले जाते-जाते कई बार बरसों बीत जाते हैं, पोटली रुपयों से भरी हो पर इंसान कभी-कभी भीख मांगने पर मजबूर हो जाता है" । फिल्मी दुनिया में ऐसे कारनामे अक्सर होते रहते हैं, इनमें ए...
ज्योति  देहलीवाल
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                               यह घटना तब की है, जब मेरा बेटा सुदीप, चौथी कक्षा में पढ़ता था। एक दिन दोपहर को वो स्कूल से घर आया। उस वक्त मैं घर में अकेली थी। मैंने जैसे ही उसके लिए दरवा...
 पोस्ट लेवल : यादगार पल अन्य
Aamir  Ali
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डियर रीडर्स , पिता के बारे में इतना सुन्दर किसी ने फेसबुक पर लिखा था ,मुझे इसके अल्फाज़ बहुत पसंद आये ,इसलिए इसे शेयर कर रहा हूँ ,ये उसी भाई को समर्पित करता हूँ ,जिन्होंने इसे लिखा।4 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा महान है.!6 वर्ष की आयु मेँ : मेरे पापा सबकुछ जानते है....
 पोस्ट लेवल : यादगार
Anju choudhary(anu)
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 बाएँ से दाएँ.........उद्‍भ्रांत जी, रामकुमार कृषक जी  ,फिर हम खड़े हैं (अनु ) , यशवंत सिंह जी , इमरोज जी (प्रसिद्ध चित्रकार ) और  वरिष्ठ कवि विजय शंकर जी....और साथ में मंच संचालक ...प्रमोद जी |२७ फरवरी ...२०१२ ...दिन ..सोमवार ....मेरे पहले कविता संग्...