ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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       वक़्त फ़िल्म का एक डायलॉग- "चाय की प्याली हाथ में उठा कर मुंह तक तक ले जाते-जाते कई बार बरसों बीत जाते हैं, पोटली रुपयों से भरी हो पर इंसान कभी-कभी भीख मांगने पर मजबूर हो जाता है" । फिल्मी दुनिया में ऐसे कारनामे अक्सर होते रहते हैं, इनमें ए...
ज्योति  देहलीवाल
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                               यह घटना तब की है, जब मेरा बेटा सुदीप, चौथी कक्षा में पढ़ता था। एक दिन दोपहर को वो स्कूल से घर आया। उस वक्त मैं घर में अकेली थी। मैंने जैसे ही उसके लिए दरवा...
 पोस्ट लेवल : यादगार पल अन्य