ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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ज़िन्दगी भर इस बात की टीस रहेगी कि कभी आपसे खुलकर बात भी न कर सके. पिता, पुत्र के बीच का जैसा सम्बन्ध आज देखने को मिलता है, उस समय सोचा भी नहीं जा सकता था. कई-कई महीने तो ऐसे निकल जाया करते थे जबकि हमारे और आपके बीच किसी तरह की कोई बातचीत नहीं होती थी. जबसे होश संभा...
अजय  कुमार झा
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इस पूरी यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए आप  प्रथम ,द्वितीय ,तृतीय और चतुर्थ भाग को भी पढ़ देख सकते हैं | तो जैसा कि पिछली पोस्ट में मैं आपको बता चुका का था कि उदयपुर में बरसों से रह रहे अपने बहन और बहनोई के बताए अनुसार ही माउंट आबू के अगले दोनों दिनों क...
kumarendra singh sengar
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समूचे परिवार के लिए वह ख़ुशी का दिन था. परिवार की सबसे बड़ी बेटी के विवाह सम्बन्धी आयोजनों का शुभारम्भ हुआ था. बड़े-छोटे सभी प्रसन्न होने के साथ-साथ अत्यंत ऊर्जावान लग रहे थे. संयुक्त परिवार की यही विशेषता होती है कि आयोजन छोटा हो या बड़ा, सभी उसमें अपने अधिकाधिक अंश क...
kumarendra singh sengar
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याददाश्त का किसी भी व्यक्ति के जीवन में बड़ा ही महत्त्व माना गया है. ऐसा समझा जाता है कि जिसकी याददाश्त बहुत अच्छी होती है उसे बुद्धिमान कहा जाता है. ऐसे व्यक्तियों को सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता है. किसी पुस्तक में पढ़ा भी था कि स्वामी विवेकानन्द अपने बच...
Bharat Tiwari
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DP Tripathi Dies, DP Tripathi, a big literary figure of politics, Senior NCP Leader Passes awayहाल ही में हिंदी को वर्तमान राजनीति में उसके सबसे बड़े साहित्यप्रेमी देवी प्रसाद त्रिपाठी के निधन का सामना करना पड़ा है.  प्रखर युवा कहानीकार भूमिका द्विवेदी अश्क के उ...
अनीता सैनी
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 यादें तुम्हारी, अनगिनत यादें ही यादें,  छिपाती हूँ, जिन्हें व्यस्तता के अरण्य में,  ख़ामोशी की पतली दीवार में, ओढ़ाती हूँ, उनपर भ्रम की झिमि चादर,  मुस्कुराहट सजा शब्दों पर,  अकेलेपन की बातों...
kumarendra singh sengar
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बीते दिनों से छुटकारा पाना आसान नहीं होता है. उन दिनों की बातें, उनकी यादें किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती हैं. ये यादें कभी हँसाती हैं तो कभी रुलाती हैं. दिल-दिमाग खूब कोशिश करें कि पुरानी बातों को याद न किया जाये मगर कोई न कोई घटना ऐसी हो ही जाती है कि इन या...
अजय  कुमार झा
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शिक्षक दिवस पर प्रकाशित एक आलेख शिक्षकों के लिए कक्षा में दो ही विद्यार्थी पसंदीदा होते हैं अक्सर , एक वो जो खूब पढ़ते लिखते हैं और हर पीरियड में सावधान होकर एकाग्र होकर उन शिक्षकों की बात सुनते समझते हैं और फिर परीक्षा के दिनों में उनके तैयार प्रश्नपत्रों को ब...
अजय  कुमार झा
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कहते हैं कि संगत का असर बहुत पड़ता है और बुरी संगत का तो और भी अधिक | बात उन दिनों की थी जब हम शहर से अचानक गाँव के वासी हो गए थे | चूंकि सब कुछ अप्रत्याशित था और बहुत अचानक हुआ था इसलिए कुछ भी व्यवस्थित नहीं था | माँ और बाबूजी पहले ही अस्वस्थ चल रहे थे | हम सब धीरे...
अजय  कुमार झा
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इस यात्रा के पहले भाग को आप यहाँ पढ़ सकते हैं इस यात्रा को सड़क मार्ग से ही तय करने का कार्यक्रम जब बनाया था तब मुझे ठीक ठीक अंदाजा नहीं था कि, जयपुर से उदयपुर का मार्ग ,बीच में पड़ने वाले शहर आदि की जानकारी ठीक ठीक नहीं थी | न ही अब तक मैं कभी जयपुर से आगे कभी ब...