ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 यादें तुम्हारी, अनगिनत यादें ही यादें,  छिपाती हूँ, जिन्हें व्यस्तता के अरण्य में,  ख़ामोशी की पतली दीवार में, ओढ़ाती हूँ, उनपर भ्रम की झिमि चादर,  मुस्कुराहट सजा शब्दों पर,  अकेलेपन की बातों...
kumarendra singh sengar
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बीते दिनों से छुटकारा पाना आसान नहीं होता है. उन दिनों की बातें, उनकी यादें किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती हैं. ये यादें कभी हँसाती हैं तो कभी रुलाती हैं. दिल-दिमाग खूब कोशिश करें कि पुरानी बातों को याद न किया जाये मगर कोई न कोई घटना ऐसी हो ही जाती है कि इन या...
अजय  कुमार झा
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शिक्षक दिवस पर प्रकाशित एक आलेख शिक्षकों के लिए कक्षा में दो ही विद्यार्थी पसंदीदा होते हैं अक्सर , एक वो जो खूब पढ़ते लिखते हैं और हर पीरियड में सावधान होकर एकाग्र होकर उन शिक्षकों की बात सुनते समझते हैं और फिर परीक्षा के दिनों में उनके तैयार प्रश्नपत्रों को ब...
अजय  कुमार झा
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कहते हैं कि संगत का असर बहुत पड़ता है और बुरी संगत का तो और भी अधिक | बात उन दिनों की थी जब हम शहर से अचानक गाँव के वासी हो गए थे | चूंकि सब कुछ अप्रत्याशित था और बहुत अचानक हुआ था इसलिए कुछ भी व्यवस्थित नहीं था | माँ और बाबूजी पहले ही अस्वस्थ चल रहे थे | हम सब धीरे...
अजय  कुमार झा
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इस यात्रा के पहले भाग को आप यहाँ पढ़ सकते हैं इस यात्रा को सड़क मार्ग से ही तय करने का कार्यक्रम जब बनाया था तब मुझे ठीक ठीक अंदाजा नहीं था कि, जयपुर से उदयपुर का मार्ग ,बीच में पड़ने वाले शहर आदि की जानकारी ठीक ठीक नहीं थी | न ही अब तक मैं कभी जयपुर से आगे कभी ब...
जेन्नी  शबनम
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जीवन-युद्ध   *******   यादों के गलियारे से गुज़रते हुए   मुमकिन है यादों को धकेलते हुए   पार तो आ गई जीवन के   पर राहों में पड़ी छोटी-छोटी यादें   मायूसी-से मेरी राह तकती दिखीं   कि ज़रा थम कर याद क...
Yashoda Agrawal
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मेरी कुछ यादें और उम्र के अल्हड़ बरस ।अब भी रचे-बसे होंगें उस छोटे से गाँव में ।।जिसने ओढ़ रखी है बांस के झुरमुटों की चादर ।और सिमटा हुआ है ब्रह्मपुत्र की बाहों में ।।आमों की बौर से लदे सघन कुंजों से ।      पौ फटते ही कोयल की कुहूक गूँजा करती थी ।।गर्म...
सुमन कपूर
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इस दफ़ा शब्दों के मानी बदल गएनहीं उतरे कागज़ पर , तकल्लुफ़ करते रहेवक़्त के हाशिये पर देता रहा दस्तकअनचिन्हा कोई प्रश्न, उत्तर की तलाश मेंकागज़ फड़फड़ाता रहा देर तकबाद उसके, थोड़ा फट कर चुप हो गयाआठ पहरों में बँटकर चूर हुआ दिनटोहता अपना ही कुछ हिस्सा वजूद की तलाश मेंएक सिर...
 पोस्ट लेवल : यादें वक्त जिंदगी
जेन्नी  शबनम
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कड़ी   *******अतीत की एक कड़ी   मैं खुद हूँ   मन के कोने में, सबकी नज़रों से छुपाकर   अपने पिता को जीवित रखा है   जब-जब हारती हूँ   जब-जब अपमानित होती हूँ   अँधेरे में सुबकते हुए, पापा से जा लिपटती...
 पोस्ट लेवल : व्यथा यादें पितृ-दिवस
Bharat Tiwari
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कृष्णा सोबती: प्रतिरोध की आवाज़ [krishna sobti jivan parichay in hindi]—ओम थानवी कृष्णाजी से पाठक के नाते मेरा रिश्ता पुराना था। दिल्ली आने के बाद कुँवर नारायण, कृष्ण बलदेव वैद, राजेंद्र यादव, निर्मल वर्मा, केदारनाथ सिंह, अशोक वाजपेयी आदि से तो जल्द निकट के स...