ब्लॉगसेतु

Kavita Rawat
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PRABHAT KUMAR
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अतीत याद करके यूँ न हो उदासछोड़ दो उस राह को जो ले जाए उसके पास। स्मृतियां अनसुलझी सी हों तो सुलझा नहीं पाएंगे हमकिसी बिछड़े राही को राह दे नहीं पाएंगे हमकहानी के किसी पात्र को खोने से अच्छा भूल जाओलहरों में डूबना अच्छा है, डूबना न बिछड़ों के पासअतीत याद करके यूँ न ह...
PRABHAT KUMAR
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बीते दिनों को याद करोमगर विपदाओं का त्याग करोहुनर सीखे होगे अद्भुतनव वर्ष पर इस्तेमाल करोमन में ज्योति जला लोहवा को साथ मिला लोफफके न दर्द से कभीऐसे दिल का ख्याल करोबीते..कोई शत्रु नहीं है जीवन काआपसी भाईचारा बनी रहेस्मृतियों की छाया में हो जबसकारात्मक तथ्यों से बा...
PRABHAT KUMAR
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सूरज तुम्हारी लाली, आँगन में जो आती हैमेरे बचपन के दिनों को बहुत याद कराती है। कोयल की कूं –कूं के साथ सुबह तेरा होना,फूलों के गुच्छों का, सूरज तेरी ओर होना;उठ कर बैठे देर तक तुम्हारी याद दिलाती है।जाड़े वाले ऋतु की सुबह, अब भी इंतजार कराती है। पानी भ...