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"ये ज़रूरी तो नहीं" मेरी110 ग़ज़लनुमा कविताओं का संग्रह है, जिन्हें आप ब्लॉग पर भी पढ़ सकते हैं और ebook के रूप में भी | दोनों के लिंक निम्न हैं - ebook*****इसी ब्लॉग पर *****
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मैं लौटकर आऊँगा यार, इंतज़ार करनालाऊँगा फिर नई बहार, इंतज़ार करना।ग़म के बादल में कब तक छुपेगा ख़ुशी का चाँदहोगा कभी-न-कभी दीदार, इंतज़ार करना।माना बेक़रारियाँ बहुत हैं सफ़रे-प्यार मेंइन्हीं में से मिलेगा क़रार, इंतज़ार करना।दिल की सदा तुम दिल तक पहुँचने तो दोफिर होगा मौसम...
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जैसे सूरज उगने के बाद दिल ढले हैऐसे क़िस्मत मेरी रोज़ रंग बदले है।आख़िर बुझना ही होगा देर-सवेर इसेदौरे-तूफ़ां में कब तलक चिराग़ जले है।दिन-ब-दिन जवां हुई, इसका इलाज क्यामेरे इस दिल में तेरी जो याद पले है।न गवारा था मुझको अश्क बहाना लेकिनइस तक़दीर पर कब किसी का ज़ोर चले है...
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हमने दिल दिया था जिनको एक नज़र में वो हमें अपना बना न पाए, पूरी उम्र में। न जज़्बों की अहमियत, न दिलों की क़द्र आ गया हूँ मैं, पत्थरों के किस शहर में। दीवारें ही दीवारें खींच दी यहाँ-वहाँ पूरी बस्ती ही बना डाली एक घर में। इनकी नादानियों...
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वफ़ा को परखता है, मुहब्बत का इम्तिहांनज़राने में देता है ये, ज़ख़्मों के निशां। पागल दिल पागलपन कर ही बैठता है नाम के साथ जुड़ जाती है दर्द की दास्तां। हसरतों को लगाम देना आया ही नहीं मैं भूल गया था, चाँद का घर है आसमां।तूने अहमियत नहीं दी, ये बात और है आँखों का वा’दा त...
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जुदा होकर जब तुम मुझसे दूर चले जाओगे क्या बताएँ तुम्हें, तब कितना याद आओगे। शामिल हो तुम मेरे ख़्यालों-ख़्वाबों में यादों की ख़ुशबू से तन-मन महकाओगे। दोस्ती की बेल पर खिलते ही रहेंगे फूल अगर रंजिशों को अपने दिल से मिटाओगे। जब भी समेटना चा...
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बहारों के दिन तो दोस्तो कब के गुज़र गए कच्चे रंग थे, पहली बारिश में ही उतर गए।कोई तमन्ना नहीं अब नए ज़ख़्म खाने की उन्हीं ज़ख़्मों की जलन बाक़ी है, जो भर गए। हमसफ़र था जो, वो आँधियाँ लेकर आया था संभले न हमसे, आशियाने के तिनके बिखर गए। आख़िर एक दिन हमें टकराना ही पड़ा उनसे ज...
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ख़ुशी का बूटा उग सके हर घर के आँगन में आ दुनिया के ग़म, सिमट जा मेरे दामन में। बाल सफेद होने की बात करें जिसके लिए मैंने उतना महसूस कर लिया है बचपन में। क्या करें, कभी-कभी वो भी अपना नहीं होता जो शख़्स हो ख़्यालों में, ख़्वाबों में, धड़कन में।दर्...
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भूलकर औक़ात, क्या से क्या हो जाते हैं लोग थोड़ी-सी ताक़त पाकर ख़ुदा हो जाते हैं लोग। तमन्ना रखते हैं, कि उम्र भर निभती रहे दोस्तीछोटी-सी बात को लेकर खफ़ा हो जाते हैं लोग। मुहब्बत को गालियाँ देकर, रोते हैं बाद में बस हसीं चेहरे देखकर फ़िदा हो जाते हैं...
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आख़िर वजह तो है, मय पीने-पिलाने के लिए थोड़ा ज़हर तो चाहिए ही, ग़म भुलाने के लिए। वक़्त ने मिट्टी में मिला दिया देखते-देखतेउम्र लगी थी हमें, जो आशियां बनाने के लिए। ख़ुद को बचाना गर बग़ावत है तो बग़ावत सही वो कर रहा है कोशिशें, मुझे मिटाने के लिए।&nbsp...