ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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वर्षों पुराने दो परिचित. सामाजिक ताने-बाने के चक्कर में, शिक्षा-कैरियर के कारण चकरघिन्नी बन दोनों कई वर्षों तक परिचित होने के बाद भी अपरिचित से रहे. समय, स्थान की अपनी सीमाओं के चलते अनजान बने रहे. तकनीकी विकास ने सभी दूरियों को पाट दिया तो उन दोनों के बीच की दूरिय...
HARSHVARDHAN SRIVASTAV
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sanjiv verma salil
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कृति चर्चा :'चुप्पियों को तोड़ते हैं' नव आशाएँ जोड़ते नवगीत चर्चाकार : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'[कृति परिचय - चुप्पियों को तोड़ते हैं, नवगीत संग्रह, योगेंद्र प्रताप मौर्य, प्रथम संस्करण २०१९, ISBN ९७८-९३-८९१७७-८७-९, आवरण पेपरबैक, बहुरंगी, २०.५ से. मी .x १४से...
Bharat Tiwari
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योगिता यादव की लेखनी को मैं सदैव कहानी की विषयवस्तु को बिलकुल ताज़ा लिखने वाली मानता हूँ ,'नई देह में नए देस में' उन्होंने मेरी यह धारणा और मजबूत की हैं, उन्हें बधाई देता हूँ.भरत एस तिवारी "दो औरतें जब आपस में मिलना चाहती हों तो उन्‍हें मिलने देना चाहिए। किसी को भी...
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--जिस बालक का ईश पर, था अनुराग अनन्य।उस नानक के जन्म से, देश हो गया धन्य।।--जाते हैं करतारपुर, जत्थों में सिख लोग।आया सत्तर साल में, आज सुखद संयोग।।--सरिताओं में बह रहा, अब तो पावन नीर।गंगा में डुबकी लगा, निर्मल करो शरीर।।--नदी-झील मिट गया, अब तो सारा पं...
 पोस्ट लेवल : आज सुखद संयोग दोहे
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा: चुप्पियों को तोड़ते हैं  -  नवाशा से जोड़ते हैं  चर्चाकार : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*                                सृष्टि के निर्माण का मूल 'ध्वनि'...
Yashoda Agrawal
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गर बेटियों का कत्ल यूँ ही कोख में होता रहेगा!शर्तिया इन्सान अपनी पहचान भी खोता रहेगा!!मर जायेंगे अहसास सारे खोखली होगी हँसी,साँस लेती देह बस ये आदमी ढोता रहेगा!!स्वर्ग जाने के लिए बेटे की सीढी ढूँढ कर,नर्क भोगेगा सदा ये आदमी रोता रहेगा...
Kajal Kumar
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 पोस्ट लेवल : Auto गाड़ी recession मंदी उद्योग
शिवम् मिश्रा
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ब्लॉग बुलिटेन-ब्लॉग रत्न सम्मान प्रतियोगिता 2019 का अड़तीसवां दिन, समापन दिन है।  यूँ तो यह 24 जुलाई को खत्म होना था, परन्तु, पहली बार को ध्यान में रखते हुए प्रोत्साहन के तौर पर हमने इसे 31 तक कर दिया।मृत्यु दंड | डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी - लघुकथा दुनिया&n...
शिवम् मिश्रा
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दिशादिशा जिन्दगी की, दिशा बन्दगी की, दिशा सपनों की, दिशा अपनों की, दिशा विचारों की, दिशा आचारों की, दिशा मंजिल को पाने की, दिशा बस चलते जाने की....मिलिए दीपाली तिवारी से - उदासीhttps://deepali-disha.blogspot.com/2019/05/blog-post.html?m=1 मत छोड़ तू उम्मीद...