ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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वैश्विक समुदाय के साथ कदमताल करने के प्रयास में लगभग सारा समाज पूरे जीजान से जुटा हुआ है. पश्चिमी सभ्यता के सुर-लय को पकड़ने की कोशिशों में हमने पहनावा, रहन-सहन, शालीनता, संस्कृति, भाषा, रिश्तों, मर्यादा आदि तक को दरकिनार करने से परहेज नहीं किया जा रहा है. पश्चिम से...
Vijay Prabhakar Nagarkar
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The Gateway to Educational Material (GEM) यह अमेरिकन सरकार का प्रोजेक्ट है जो स&#2367...
Yash Rawat
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Ayurvedic Khana Khazanaहमारे मौजूदा व्‍यस्‍त और भाग-दौड़ वाले समय में, आध्‍या‍त्मिक, सेहतमंद और सुखी जीवन की पहले से कहीं ज्‍यादा जरुरत है। पीड़ा, बीमारी और पर्यावरण के विनाश के अलावा जेनेटिक इंजीनियरिंग में विकास ने, मानवता और पृथ्‍वी को गंभीर स्थिति तक पहुंचा दिया...
Yash Rawat
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योग का आठवां अंग ध्यान अति महत्वपूर्ण हैं। एक मात्र ध्यान ही ऐसा तत्व है कि उसे साधने से सभी स्वत: ही सधने लगते हैं, लेकिन योग के अन्य अंगों पर यह नियम लागू नहीं होता। ध्यान दो दुनिया के बीच खड़े होने की स्थिति है।ध्यान की परिभाषा: तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम।।...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )सबहि नचावत ट्रंप गुसाई !================अब थोड़ा-थोड़ा समझ में आने लगा है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और युद्ध की आशंकाओं के...
राजीव सिन्हा
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मैं पीजी में मौजूद अपने कमरे में दाखिल हुआ और दरवाजा बंद करके उसकी चटखनी लगाकर अपनी धौकनी सी चलती साँसों को काबू में लाने की कोशिश करने लगा। “क्या हुआ”,शेखर ने अपने फोन से नजरें उठाकर मेरी तरफ देखा। शेखर मेरा रूम मेट था। हम कॉलेज के वक्त से ही दोस्त थे...
राजीव सिन्हा
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“अरे उठो! नशे में हो क्या?” मैं झटके से उठा “हरिद्वार आ गया क्या?” “अरे हाँ, तभी तो उठा रहा हूँ, पर तू उठने को तैयार ही नहीं, कुंभकरण के वंशज”, बस कंडक्टर थोडा गुस्से में था. शायद मुझे थोडा ज्यादा समय ऐसे ही सोते हुए हो गया था. बस पूरी ख़ाली हो चुकी थी. बस से मैं चु...
राजीव सिन्हा
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हमको बचपन से ही सिखाया जाता है कि कभी किसी के साथ बुरा मत करो क्योंकि ईश्वर सब देख रहा होता है और इसके अलावा हमको बचपन से ये भी सिखाया जाता है कि बुरे कर्मों के फल हमको इसी जन्म में मिलते हैं लेकिन अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर मैं ये कह सकता हूँ कि कुछ काम ऐसे...
राजीव सिन्हा
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                 अच्छे मियाँ ने जब पाँच साल की उम्र से ही अच्छे-अच्छे लक्षण दिखाने शुरू कर दिये, तो उनके बाप परेशान हो गये। माँ-बहन की अच्छी-अच्छी गालियाँ न सिर्फ़ याद थीं बल्कि गाँव के हाफ़ी जी जिस तरह से क़ुरान की तिलावत करते थे, उसी अंदाज़ में अच्छे मियाँ इन गाल...
राजीव सिन्हा
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(उनको समर्पित जिनके लिए वतन…. धर्म और मज़हब से बढ़ कर था। उनको सुनाने के लिए जिनके लिए कौम और धर्म उनके मुल्क से बढ़ कर हैं. ) 18 मार्च 1858 (झांसी के किले में कहीं किसी जगह) “कितने हैं?” “दस हजार से कम न होंगे हुज़ूर साहिबा! पंद्रह भी हों तो बड़ी बात...