हे मृगनयनी , गजगामिनी, त्याग के तुम श्रृंगार  अपने रक्षण हेतु लो हाथों में तलवारना जाने किस वेश में दुश्मन कर दे घात जैसे माता जानकी फसी दशानन हाथ  मत सोचो रक्षण हेतु श्री रामचंद्र जी आएंगे अग्निपरीक्षा लेकर भी तुमको वनवास पठायेंग...